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शहर को बीमार कर देगा निगम का डंपिंग ग्राउंड
मुरादाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 25 Dec 2017 12:25 AM IST
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dumping ground
- फोटो : अमर उजाला
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नगर निगम के कूड़ा डंपिंग ग्राउंड में करीब पांच साल पहले तक कूड़ा निस्तारण होता था। यहां कूड़ा निस्तारण के लिए ए टू जेड नाम की कंपनी ने प्लांट लगाया गया। प्लांट में कूड़े से खाद बनाई जाती थी। लेकिन ए टू जेड से निगम का किसी कारणवश अनुबंध टूट जाने के बाद से डंपिंग ग्राउंड पहाड़ का डेर और महानगर को बीमार करने का कारण बनता जा रहा है।
निगम का डंपिंग ग्राउंड रामपुर रोड पर गुलाबाड़ी के पास रामगंगा पुल से थोड़ा आगे है। शहर का पूरा कूड़ा यहीं डंप किया जाता है। लेकिन पिछले करीब पांच सालों से यहां कूड़ा तो डाला जा रहा है लेकिन उसका निस्तारण नहीं हो रहा है। इस कारण यहां आसपास के लोगों में बीमारी फैलने लगी है।
यहां भैंसिया, गुलाब बाड़ी समेत आसपास के लोग गंदगी से होने वाली बीमारियों से पीड़ित रहते हैं। पिछले साल भैंसिया गांव में दर्जनों लोग मलेरिया की चपेट में आ गए थे। वहीं अब जब कूड़ा बढ़ने लगा है तो गंदगी से होने वाले इंफेक्शन से और अधिक आबादी प्रभावित हो सकती है। वहीं इससे प्रदूषण भी बढ़ता जा रहा है।
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डंपिंग ग्राउंड तक कूड़ा पहुंचाने वाली गाड़ियों के कई चालक डंपिंग ग्राउंड से पहले ही कूड़ा डाल जाते हैं। बाद में लोग उस कूड़े में आग लगा देते हैं। अगर डंपिंग ग्राउंड से पहले कूड़ा डालने और कूड़े में आग लगाने का क्रम यूं ही जारी रहा तो महानगर का प्रदूषण स्तर बढ़ जाएगा। वहीं यह डंपिंग ग्राउंड नदी के पास है। ऐसे में अगर यहां कूड़ा डलता रहा तो कूड़ा नदी में जाएगा। इससे नदी भी दूषित होगी। डंपिंग ग्राउंड में रोजाना साढ़े तीन से 4 सौ मीट्रिक टन कूड़ा डंप किया जाता है। ऐसे में यहां कूड़े का पहाड़ बनाता जा रहा है।
निगम नहीं कर रहा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों का पालन
नगर निगम नगरीय ठोस अवशिष्ट नियमावली 2016 का पालन नहीं कर रहा है। जिसके अंतर्गत कूड़े का निस्तारण करना अनिवार्य है। इस संबंध में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने निगम को कई बार नोटिस जारी किया है। लेकिन कूड़े को वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर निस्तारण करने की बजाए डंपिंग ग्राउंड पर कोई कार्य नहीं किया जा रहा है।
जर्जर हो गया प्लांट, जंग खा रही गाड़ियां
प्लांट में लगी मशीनें देखरेख के अभाव में जर्जर हो गई हैं। मशीनों में जंग लग गया है। अब इस प्लान का उपयोेग करना भी चाहें तो इसमें करोड़ों की लागत से इसकी मरम्मत करानी पड़ेगी। वहीं यहां नगर निगम की कई उपयोगी वाहन जंग खा रहे हैं। यहां जेसीबी, टाटा एस, टिपर, रिक्शा समेत दर्जनों वाहन सालों से खड़े-खड़े जंग खा रहे हैं। लेकिन उनका उपयोग करने के लिए निगम ने कोई पहल नहीं की।
डंपिंग ग्राउंड में कूड़े के निस्तारण के लिए एक कंपनी से वार्ता चल रही है। पहले यहां प्लांट में कूड़े से खाद बनाया जाता था। लेकिन अब कोशिश की जा रही है कि यहां कूड़े से बिजली बनाने का प्लांट लगे। इसके लिए प्रक्रिया जारी है। - आशीष शुक्ला, वरिष्ठ प्रभारी अधिकारी स्वच्छ भारत मिशन।
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निगम का डंपिंग ग्राउंड रामपुर रोड पर गुलाबाड़ी के पास रामगंगा पुल से थोड़ा आगे है। शहर का पूरा कूड़ा यहीं डंप किया जाता है। लेकिन पिछले करीब पांच सालों से यहां कूड़ा तो डाला जा रहा है लेकिन उसका निस्तारण नहीं हो रहा है। इस कारण यहां आसपास के लोगों में बीमारी फैलने लगी है।
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यहां भैंसिया, गुलाब बाड़ी समेत आसपास के लोग गंदगी से होने वाली बीमारियों से पीड़ित रहते हैं। पिछले साल भैंसिया गांव में दर्जनों लोग मलेरिया की चपेट में आ गए थे। वहीं अब जब कूड़ा बढ़ने लगा है तो गंदगी से होने वाले इंफेक्शन से और अधिक आबादी प्रभावित हो सकती है। वहीं इससे प्रदूषण भी बढ़ता जा रहा है।
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डंपिंग ग्राउंड तक कूड़ा पहुंचाने वाली गाड़ियों के कई चालक डंपिंग ग्राउंड से पहले ही कूड़ा डाल जाते हैं। बाद में लोग उस कूड़े में आग लगा देते हैं। अगर डंपिंग ग्राउंड से पहले कूड़ा डालने और कूड़े में आग लगाने का क्रम यूं ही जारी रहा तो महानगर का प्रदूषण स्तर बढ़ जाएगा। वहीं यह डंपिंग ग्राउंड नदी के पास है। ऐसे में अगर यहां कूड़ा डलता रहा तो कूड़ा नदी में जाएगा। इससे नदी भी दूषित होगी। डंपिंग ग्राउंड में रोजाना साढ़े तीन से 4 सौ मीट्रिक टन कूड़ा डंप किया जाता है। ऐसे में यहां कूड़े का पहाड़ बनाता जा रहा है।
निगम नहीं कर रहा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों का पालन
नगर निगम नगरीय ठोस अवशिष्ट नियमावली 2016 का पालन नहीं कर रहा है। जिसके अंतर्गत कूड़े का निस्तारण करना अनिवार्य है। इस संबंध में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने निगम को कई बार नोटिस जारी किया है। लेकिन कूड़े को वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर निस्तारण करने की बजाए डंपिंग ग्राउंड पर कोई कार्य नहीं किया जा रहा है।
जर्जर हो गया प्लांट, जंग खा रही गाड़ियां
प्लांट में लगी मशीनें देखरेख के अभाव में जर्जर हो गई हैं। मशीनों में जंग लग गया है। अब इस प्लान का उपयोेग करना भी चाहें तो इसमें करोड़ों की लागत से इसकी मरम्मत करानी पड़ेगी। वहीं यहां नगर निगम की कई उपयोगी वाहन जंग खा रहे हैं। यहां जेसीबी, टाटा एस, टिपर, रिक्शा समेत दर्जनों वाहन सालों से खड़े-खड़े जंग खा रहे हैं। लेकिन उनका उपयोग करने के लिए निगम ने कोई पहल नहीं की।
डंपिंग ग्राउंड में कूड़े के निस्तारण के लिए एक कंपनी से वार्ता चल रही है। पहले यहां प्लांट में कूड़े से खाद बनाया जाता था। लेकिन अब कोशिश की जा रही है कि यहां कूड़े से बिजली बनाने का प्लांट लगे। इसके लिए प्रक्रिया जारी है। - आशीष शुक्ला, वरिष्ठ प्रभारी अधिकारी स्वच्छ भारत मिशन।