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Moradabad News: जिला अस्पताल में हर साल कम हो रहे डॉक्टर, बढ़ रहे सिर्फ उपकरण

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 07 Apr 2024 02:35 AM IST
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Doctors are decreasing every year in the district hospital, only equipment is increasing
मुरादाबाद। मंडल मुख्यालय के जिला अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में हर साल सिर्फ उपकरण बढ़ रहे हैं। जबकि डॉक्टरों की संख्या कम होती जा रही है। अस्पताल में 22 विशेषज्ञों समेत 35 डॉक्टरों के पद खाली हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास वेंटीलेटर तो है लेकिन इलाज नहीं है।
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आईसीयू होने के बावजूद सांस के गंभीर मरीजों को मेरठ, दिल्ली के अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। जनरल फिजिशियन, हृदय रोग विशेषज्ञ, दंत रोग विशेषज्ञ, न्यूरोसर्जन समेत कई पद खाली हैं। एमआरआई भवन एक साल पहले बनकर तैयार हो चुका है लेकिन उसमें अब तक मशीन स्थापित नहीं हो पाई है। ट्रामा सेंटर में अब तक न्यूरोसर्जन की तैनाती नहीं हो पाई है। यह स्थिति तब है जबकि ओपीडी व इमरजेंसी में हर साल एक लाख मरीज बढ़ रहे हैं। निजी विश्वविद्यालयों से एमडी, एमएस आदि कोर्स कर रहे प्रशिक्षु डॉक्टरों के भरोसे ओपीडी चल रही है। बर्न वार्ड में भी अब तक विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती नहीं हो पाई है। वार्ड में पुख्ता इंतजाम न होने के कारण गंभीर जले मरीजों को रेफर करना पड़ता है।
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यही स्थिति मुख्य चिकित्सा अधिकारी के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की है। हर सप्ताह लगने वाले आयुष्मान व आरोग्य मेलों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। विभाग निजी अस्पतालों से विशेषज्ञ डॉक्टर को बुलाकर आयुष्मान मेले में मरीजों को लाभ दिलवाने का दावा करता है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। विभाग की ओर से जो डॉक्टर तैनात किए गए हैं अक्सर वे भी ड्यूटी से गायब मिलते हैं।
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यह पद हैं खाली

जिला अस्पताल में जनरल फिजिशियन का एक, चेस्ट फिजिशियन का एक, बाल रोग विशेषज्ञ का एक, रेडियोलॉजिस्ट के दो, हृदय रोग विशेषज्ञ के दो, न्यूरो सर्जन का एक, दंत रोग विशेषज्ञ का एक, एनेस्थेटिक, मानसिक रोग विशेषज्ञ, जनरल सर्जन, ऑर्थो सर्जन, ईएनटी सर्जन, न्यूरोलॉजिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट, न्यूरो फिजिशियन के एक-एक पद खाली हैं। इसी तरह इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर के दो व एमओ के तीन पद खाली हैं।


एक वर्ष में इन सुविधाओं में हो सकता है विस्तार

जिला अस्पताल में अगले एक वर्ष के अंदर डीएनबी कोर्स के लिए दो डॉक्टर आएंगे। इससे अस्पताल में पीकू संचालित किया जा सकेगा और गंभीर रूप से बीमार बच्चों का इलाज हो सकेगा। 10 बेड का आईसीयू तैयार करने की भी योजना है। आईसीयू से पहले बच्चों के लिए विशेष निगरानी वाली हाई डिपेंडेंसी यूनिट तैयार करने के लिए बजट मांगा गया है। साथ ही मेडिसिन का भी डीएनबी कोर्स शुरू करने की तैयारी है।
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