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बेटियों को न समझें कम, कुश्ती व बॉक्सिंग में दिखा रहीं दम
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अगवानपुर। मुरादाबाद की बेटियां हर क्षेत्र में दमखम दिखा रही हैं। कठिन मेहनत और लगन की बदौलत खेल के मैदानों में जीत का परचम लहरा रही हैं। प्रतिद्वंद्वियों को मैदान में धूल चटाकर गोल्ड मेडल हासिल कर उन्हाेंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। हाल ही में सगी बहनों ने कुश्ती और एक बेटी ने बॉक्सिंग में गोल्ड मेडल जीतकर जिले का नाम रोशन किया है।
ग्रामीण इलाके की बेटियां खेल प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर जिले का नाम रोशन कर रही हैं। हाल ही में दो सगी बहनों ने कुश्ती में गोल्ड मेडल और दयानातपुर निवासी किसान की बेटी कनिका ने बॉक्सिंग में गोल्ड मेडल जीता है। सगी बहनें मुस्कान और राशिका गांव लदावली की रहने वाली हैं।
उन्होंने पिछले दिनों राजस्थान के जैसलमेर स्थित इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में प्रतिद्वंद्वी पहलवान को पछाड़कर गोल्ड मेडल जीता था। सगी बहनों की जीत से गांव में खुशी का माहौल था। उनके घर लौटने के बाद गांव में जोरदार स्वागत किया गया। वहीं, परिवार के लोगों ने जीत का जश्न भी मनाया। उनके पिता करतार सिंह कसाना भी राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रहे हैं।
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करतार के अनुसार बेटियां बचपन से ही कुश्ती में रुचि रखती थीं। मेहनत और लगन के बल पर जिला, राज्य व राष्ट्रीय स्तर की कुश्तियों में हिस्सा ले रही हैं। पहली बार उनको कुश्ती में गोल्ड मेडल मिला है। जबकि इससे पहले वह सिल्वर तक पहुंचने में सफ ल रही है। उन्होंने अपने हौसले के बल पर परिवार और जिले का हर जगह मान बढ़ाया है।
बेटा बन पिता का सपना किया पूरा
लदावली निवासी करतार सिंह कसाना के परिवार में पत्नी, दो बेटी और एक बेटा है। वह राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रहे हैं। उनकी ख्वाहिश थी कि उनके परिवार में पहले बेटे का जन्म हो। उनका बेटा पहलवान बने। राष्ट्रीय खेलों में वह नाम रोशन करे। इस तमन्ना को लिए वह आगे बढ़ रहे थे। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। 12 सितंबर 2005 को उनके घर में मुस्कान का जन्म हुआ। पैदाइशी के दौरान मुस्कान तंदरुस्त थी। सभी ने उसको पहलवान की बेटी पहलवान कहा तो करतार सिंह का इरादा बदल गया। उन्होंने तभी से लड़के और लड़की में फ र्क वाली बात को मन से बाहर निकाल दिया। उन्होंने मुस्कान को बेटे की तरह पहलवान बनाने का फैसला लिया। वह बचपन से ही मुस्कान की डाइट का ख्याल रखते थे। उसको बचपन से ही कुश्ती के अखाड़े में ले जाते थे। उनको अखाड़े में लड़ता देखकर उसको जोश आता था। एक दफ ा जब वह सोनकपुर स्टेडियम में कुश्ती लड़ रहे तो दो साल की मुस्कान ने उनके प्रतिद्वंद्वी की अखाड़े में कूदकर टांग पकड़ ली थी। इससे वहां मौजूद लोगों ने उसकी खूब तारीफ की थी। पिता के अनुसार उनकी दोनों बेटियों में पहलवानी का जज्बा है।
किसान की बेटी स्कूल में एक पंच से बनी बॉक्सर
गांव दयानातपुर निवासी राहुल किसान हैं। उनकी बेटी कनिका राष्ट्रीय स्तर पर बॉक्सिंग की खिलाड़ी हैं। कनिका हिंदू कॉलेज से एमए कर रही हैं। हाईस्कूल तक की पढ़ाई अगवानपुर के जैकब स्कूल से हुई है। कनिका के अनुसार जब वह आठवीं में थीं तो उनका हाईस्कूल में पढ़ने वाली छात्रा से विवाद हो गया था। विवाद में उसने छात्रा के सिर में पंच मार दिया था। इससे छात्रा बेहोश हो गई। उसको घंटों के बाद होश आया। इससे कनिका परेशान हो गई। वहीं एक टीचर ने उनके पंच की ताकत को महसूस किया। टीचर ने उसको स्टेडियम ज्वाइन करने की सलाह दी। उनके कहने पर कनिका ने सोनकपुर स्टेडियम ज्वाइन कर लिया। उसने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर में बॉक्सिंग के खेलों में हिस्सा लिया। उसने जिला और स्टेट स्तर के खेलों में सिल्वर ट्रॉफ ी जीती। जबकि 2019 में उसने लखनऊ में मेरठ की प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी को हराकर गोल्ड मेडल जीता था। हाल ही में वह स्पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की तरफ से खेल रही हैं।
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ग्रामीण इलाके की बेटियां खेल प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर जिले का नाम रोशन कर रही हैं। हाल ही में दो सगी बहनों ने कुश्ती में गोल्ड मेडल और दयानातपुर निवासी किसान की बेटी कनिका ने बॉक्सिंग में गोल्ड मेडल जीता है। सगी बहनें मुस्कान और राशिका गांव लदावली की रहने वाली हैं।
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उन्होंने पिछले दिनों राजस्थान के जैसलमेर स्थित इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में प्रतिद्वंद्वी पहलवान को पछाड़कर गोल्ड मेडल जीता था। सगी बहनों की जीत से गांव में खुशी का माहौल था। उनके घर लौटने के बाद गांव में जोरदार स्वागत किया गया। वहीं, परिवार के लोगों ने जीत का जश्न भी मनाया। उनके पिता करतार सिंह कसाना भी राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रहे हैं।
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करतार के अनुसार बेटियां बचपन से ही कुश्ती में रुचि रखती थीं। मेहनत और लगन के बल पर जिला, राज्य व राष्ट्रीय स्तर की कुश्तियों में हिस्सा ले रही हैं। पहली बार उनको कुश्ती में गोल्ड मेडल मिला है। जबकि इससे पहले वह सिल्वर तक पहुंचने में सफ ल रही है। उन्होंने अपने हौसले के बल पर परिवार और जिले का हर जगह मान बढ़ाया है।
बेटा बन पिता का सपना किया पूरा
लदावली निवासी करतार सिंह कसाना के परिवार में पत्नी, दो बेटी और एक बेटा है। वह राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रहे हैं। उनकी ख्वाहिश थी कि उनके परिवार में पहले बेटे का जन्म हो। उनका बेटा पहलवान बने। राष्ट्रीय खेलों में वह नाम रोशन करे। इस तमन्ना को लिए वह आगे बढ़ रहे थे। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। 12 सितंबर 2005 को उनके घर में मुस्कान का जन्म हुआ। पैदाइशी के दौरान मुस्कान तंदरुस्त थी। सभी ने उसको पहलवान की बेटी पहलवान कहा तो करतार सिंह का इरादा बदल गया। उन्होंने तभी से लड़के और लड़की में फ र्क वाली बात को मन से बाहर निकाल दिया। उन्होंने मुस्कान को बेटे की तरह पहलवान बनाने का फैसला लिया। वह बचपन से ही मुस्कान की डाइट का ख्याल रखते थे। उसको बचपन से ही कुश्ती के अखाड़े में ले जाते थे। उनको अखाड़े में लड़ता देखकर उसको जोश आता था। एक दफ ा जब वह सोनकपुर स्टेडियम में कुश्ती लड़ रहे तो दो साल की मुस्कान ने उनके प्रतिद्वंद्वी की अखाड़े में कूदकर टांग पकड़ ली थी। इससे वहां मौजूद लोगों ने उसकी खूब तारीफ की थी। पिता के अनुसार उनकी दोनों बेटियों में पहलवानी का जज्बा है।
किसान की बेटी स्कूल में एक पंच से बनी बॉक्सर
गांव दयानातपुर निवासी राहुल किसान हैं। उनकी बेटी कनिका राष्ट्रीय स्तर पर बॉक्सिंग की खिलाड़ी हैं। कनिका हिंदू कॉलेज से एमए कर रही हैं। हाईस्कूल तक की पढ़ाई अगवानपुर के जैकब स्कूल से हुई है। कनिका के अनुसार जब वह आठवीं में थीं तो उनका हाईस्कूल में पढ़ने वाली छात्रा से विवाद हो गया था। विवाद में उसने छात्रा के सिर में पंच मार दिया था। इससे छात्रा बेहोश हो गई। उसको घंटों के बाद होश आया। इससे कनिका परेशान हो गई। वहीं एक टीचर ने उनके पंच की ताकत को महसूस किया। टीचर ने उसको स्टेडियम ज्वाइन करने की सलाह दी। उनके कहने पर कनिका ने सोनकपुर स्टेडियम ज्वाइन कर लिया। उसने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर में बॉक्सिंग के खेलों में हिस्सा लिया। उसने जिला और स्टेट स्तर के खेलों में सिल्वर ट्रॉफ ी जीती। जबकि 2019 में उसने लखनऊ में मेरठ की प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी को हराकर गोल्ड मेडल जीता था। हाल ही में वह स्पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की तरफ से खेल रही हैं।