Moradabad: अब्दुल्ला आजम के स्टे प्रार्थनापत्र पर बहस पूरी, मंगलवार को आएगा फैसला, छजलैट मामले में हुई थी सजा
बहस सुनने के बाद कोर्ट ने आदेश के लिए मंगलवार की तिथि नियत की है। वहीं दूसरी ओर पूर्व मंत्री आजम खां की तरफ से दाखिल किए गए स्टे प्रार्थनापत्र पर एक मार्च को सुनवाई की जाएगी।
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मुरादाबाद में एमपी एमएलए स्पेशल मजिस्ट्रेट कोर्ट ने रामपुर के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दो-दो साल के कारावास समेत प्रत्येक पर तीन हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। जिसके बाद दोनों लोगों को जमानत पर रिहा कर दिया गया था। इस मामले में जनपद न्यायाधीश की अदालत में आदेश के खिलाफ अपील दाखिल की गई थी। इसमें अब्दुल्ला आज़म की तरफ से दाखिल स्थगन प्रार्थनापत्र पर सुनवाई की गई। बहस के बाद आदेश के लिए मंगलवार की तिथि नियत की गई है।
रामपुर के पूर्व विधायक और सपा सरकार में मंत्री रहे आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म के खिलाफ थाना छजलैट प्रकरण में दोषी पाए जाने पर एमपी एमएलए स्पेशल मजिस्ट्रेट कोर्ट स्मिता गोस्वामी ने दोनों पिता-पुत्रों को सजा सुनाई थी। जिसके बाद दोनों को ज़मानत पर रिहा कर दिया गया था। अब्दुल्ला आज़म की ओर से उनके वकील शहनवाज सिब्तैन ने जनपद न्यायाधीश की अदालत में स्टे प्रार्थनापत्र भी अपील के साथ प्रस्तुत किया गया था। इसमें कहा गया कि दोषी करार दिए गए अब्दुल्ला आज़म के खिलाफ एमपी एमएलए स्पेशल मजिस्ट्रेट कोर्ट ने गलत आदेश पारित किया है। उनके खिलाफ कोई मुकदमा नहीं बनता है।
जिला शासकीय अधिवक्ता नितिन गुप्ता एवं विशेष लोक अभियोजक मोहन लाल विश्नोई ने बताया कि इस मुकदमे में शासन स्तर से लखनऊ से आए विशेष अधिवक्ता अनिल प्रताप सिंह ने आकर बहस की। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय पुनीत गुप्ता की अदालत में दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद आदेश के लिए मंगलवार की तिथि नियत की है। वहीं दूसरी ओर पूर्व मंत्री आजम खां की तरफ से दाखिल किए गए स्टे प्रार्थनापत्र पर एक मार्च को सुनवाई की जाएगी।
यह था छजलैट प्रकरण
दो जनवरी 2008 को आजम खां अपने परिवार के साथ मुजफ्फरनगर एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जा रहे थे। दो दिन पहले ही रामपुर के सीआरपीएफ कैम्प में आतंकवादी हमला हुआ था। इस कारण से आसपास के जनपदों में भी सतर्कता बरती जा रही थी। उस समय थाना छजलैट के बाहर आजम खां के वाहन को चेकिंग के लिए रोका गया था। उनकी गाड़ी में लगी काली पन्नी हटाने के लिए पुलिस कर्मियों ने उनसे कहा था। इसको लेकर काफी विवाद बढ़ गया था। आसपास के जिलों से भी सपा नेता एकत्र हो गए थे। उनके ऊपर आरोप था कि इन्होंने सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न की और लोगों को भड़काकर बवाल किया।
इस मामले में आजम खां और अब्दुल्ला आज़म समेत पूर्व महानगर अध्यक्ष राजकुमार प्रजापति, पूर्व विधायक हाजी इकराम कुरैशी, नूरपुर विधायक नईम ऊल हसन, नगीना के मनोज पारस, पूर्व विधायक महबूब अली, सपा नेता राजेश यादव और डी पी यादव के खिलाफ दो जनवरी 2008 में मुकदमा दर्ज किया गया था । जिसमें अदालत ने सात आरोपियों को दोष मुक्त कर आजम खां और अब्दुल्ला आज़म के खिलाफ आदेश पारित किया था।