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छात्र अतुल की मौत: कुत्ते का सिर्फ नाखून लगने से भी हो सकता है रेबीज, डाॅक्टर बोले- जरूर लगवाएं वैक्सीन
Mon, 12 Oct 2026 12:13 PM IST
Vimal Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
Published by: Vimal Sharma
Updated Mon, 12 Oct 2026 12:13 PM IST
सार
कुत्ते के काटने के साथ नाखून से त्वचा छिलने पर भी रेबीज का खतरा हो सकता है। बिलारी के 12 वर्षीय अतुल की मौत के बाद सतर्कता की जरूरत बढ़ गई है। जिला अस्पताल में रोजाना कुत्ते के काटने के करीब 100 मामले पहुंच रहे हैं।
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सड़कों पर कुत्ते
- फोटो : फाइल
विस्तार
कुत्ते का काटना ही नहीं, उसका नाखून लगने से त्वचा छिलना भी रेबीज के खतरे की वजह बन सकता है। ऐसे में मामूली खरोंच समझकर घाव को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। बिलारी निवासी छात्र अतुल (12) की मौत के मामले ने रेबीज को लेकर सतर्कता की जरूरत फिर सामने ला दी है।
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जिला अस्पताल में हर दिन कुत्ते के काटने के करीब 100 मामले पहुंच रहे हैं। इसके अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई जा रही है। कुत्तों के हमलों के साथ टीकाकरण की जरूरत बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग पर आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है।
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डॉक्टरों का कहना है कि कुत्ते के नाखून से खरोंच लगने पर खतरा इस बात पर निर्भर करता है कि त्वचा कितनी छिली है और घाव में संक्रमित लार पहुंचने की आशंका है या नहीं। कुत्ते अपने पंजे चाटते हैं लेकिन केवल नाखून लगने से हर बार रेबीज नहीं होता। त्वचा छिलने पर संक्रमण की आशंका का आकलन जरूरी है।
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खून न निकलने पर भी खरोंच को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर टीका लगवाना संक्रमण से बचाव में अहम है। जिला अस्पताल में रोजाना कुत्ते के काटने के करीब 100 मामले आने का आंकड़ा समस्या की गंभीरता दिखाता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी लोगों को एंटी रेबीज वैक्सीन दी जा रही है।
निजी अस्पतालों में वैक्सीन की तीन से चार खुराक लगवाने पर करीब दो से पांच हजार रुपये तक खर्च हो सकते हैं। सरकारी अस्पतालों में टीकाकरण का खर्च स्वास्थ्य विभाग उठाता है। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर कुत्तों के काटने के मामलों और वैक्सीन पर हर माह करीब 50 लाख रुपये खर्च होते हैं।
एसआईसी डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय का कहना है कि रेबीज की आशंका में देरी जानलेवा हो सकती है। इसलिए कुत्ते के काटने के साथ नाखून से खरोंच लगने पर भी वैक्सीन लगवाना जरूरी है। लक्षण सामने आने के बाद रेबीज लगभग हमेशा जानलेवा होता है, जबकि समय रहते बचाव के उपाय किए जा सकते हैं।
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डॉक्टरी सलाह (फिजिशियन डॉ. आशीष सिंह के मुताबिक)
- कुत्ते के काटने या खरोंच लगने पर घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोएं।
- त्वचा छिल गई हो, भले ही खून न निकला हो, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
- डॉक्टर टीके की जरूरत बताएं तो एंटी रेबीज टीका जरूर लगवाएं।
- खून निकलने या गहरे घाव की स्थिति में टीके के साथ रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन की जरूरत भी पड़ सकती है।
- घाव पर मिर्च, तेल या अन्य घरेलू पदार्थ न लगाएं और टीकाकरण में देरी न करें।
- कुत्ता पालतू हो या आवारा, केवल उसके व्यवहार या दिखने से संक्रमण का खतरा खारिज न करें।