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साइबर अपराध
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मुरादाबाद। थोड़ी सी लापरवाही और लालच के चक्कर में पड़कर शिक्षित लोग भी साइबर ठगी के शिकार हो रहे हैं। इनमें इंजीनियर और आईपीएस अफसर तक शामिल हैं। आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि साइबर ठगी के शिकार लोगों में 80 प्रतिशत पढ़े लिखे हैं, जबकि 20 प्रतिशत लोग कम जानकार और अशिक्षित हैं। साइबर ठग डॉक्टर, व्यापारी, शिक्षक, सरकारी विभागों के अधिकारी और कर्मचारी, पुलिस कर्मी, रिटायर कर्मचारी, वकील, प्रशासनिक अधिकारी और नेताओं को भी चपत लगा चुके हैं।
मुरादाबाद में तैनात रहे एक वरिष्ठ आईपीएस अफसर भी साइबर ठगी के शिकार हो चुके हैं। ये बात उन दिनों की है, जब वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी साइबर अपराध पर एक किताब लिख रहे थे, जिसे प्रशिक्षण संस्थानों में ट्रेनी सिपाही और दरोगाओं को पढ़ाए जाने की तैयारी चल रही थी। इस संबंध में सिविल लाइंस थाने में केस भी दर्ज किया गया था, लेकिन साइबर अपराधियों तक पुलिस नहीं पहुंच सकी थी।
दिल्ली निवासी इंजीनियर गुरुग्राम की एक निजी कंपनी में तैनात हैं। उन्होंने अपने मकान को किराये पर देने के लिए सोशल मीडिया पर विज्ञापन पोस्ट किया था। कुछ ही देर बाद साइबर ठग ने इंजीनियर को कॉल की। उसने इंजीनियर से कहा कि उसे मकान किराये पर लेना है। उसने इंजीनियर से मकान के फोटो व्हाट्सएप करा लिए। इसके बाद उसने मकान पसंद आने की बात कर किराया तय कर लिया था। एडवांस में रुपये देने के लिए उनका एकाउंट ले लिया था। आरोपी ने पहले एकाउंट में एक रुपये भेज कर चेक करने की बात की, इंजीनियर के खाते में कोई भुगतान नहीं हुआ। इसके बाद आरोपी ने एक लिंक भेजकर उनके खाते से दस हजार रुपये उड़ा लिए।
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सिविल लाइंस के जिगर कॉलोनी निवासी आईटी इंजीनियर ने थाने में केस दर्ज कराया था, जिसमें उन्होंने बताया था कि ग्यारह हजार रुपये डेबिट कार्ड द्वारा निकाले जाने का मैसेज उनके मोबाइल पर आया था। उन्होंने बैंक के हेल्प लाइन नंबर पर कॉल कर डेबिट कार्ड बंद कर दिया था। अगले दिन इंजीनियर ने बैंक जाकर पता किया तो जानकारी हुई कि रुपये विदेश में निकाले गए हैं।
मुरादाबाद में तैनात सेक्शन इंजीनियर को साइबर ठग ने वर्ष 2020 में 29 दिसंबर को कॉल की थी। साइबर ठग ने खुद को बीमा कंपनी मुंबई ऑफिस के कस्टमर केयर से बताकर काल की थी। आरोपी ने सेक्शन इंजीनियर से बताया था कि आपकी पॉलिसी मैच्योर हुई है। उसका कुछ रिफंड बकाया है। इसका लालच देकर ऑनलाइन करीब 1.81 लाख रुपये की ठगी की थी।
सिविल थानाक्षेत्र के हरथला मंडी निवासी आरिफ अली पुलिस विभाग से दरोगा के पद से सेवानिवृत्त हैं। पांच फरवरी की शाम साइबर ठगों ने उनके खाते से दो बार में बीस हजार निकल लिए थे। खास बात ये है कि उन्होंने न तो किसी को ओटीपी बताया था और न ही किसी ने कॉल की थी।
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मुरादाबाद में तैनात रहे एक वरिष्ठ आईपीएस अफसर भी साइबर ठगी के शिकार हो चुके हैं। ये बात उन दिनों की है, जब वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी साइबर अपराध पर एक किताब लिख रहे थे, जिसे प्रशिक्षण संस्थानों में ट्रेनी सिपाही और दरोगाओं को पढ़ाए जाने की तैयारी चल रही थी। इस संबंध में सिविल लाइंस थाने में केस भी दर्ज किया गया था, लेकिन साइबर अपराधियों तक पुलिस नहीं पहुंच सकी थी।
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दिल्ली निवासी इंजीनियर गुरुग्राम की एक निजी कंपनी में तैनात हैं। उन्होंने अपने मकान को किराये पर देने के लिए सोशल मीडिया पर विज्ञापन पोस्ट किया था। कुछ ही देर बाद साइबर ठग ने इंजीनियर को कॉल की। उसने इंजीनियर से कहा कि उसे मकान किराये पर लेना है। उसने इंजीनियर से मकान के फोटो व्हाट्सएप करा लिए। इसके बाद उसने मकान पसंद आने की बात कर किराया तय कर लिया था। एडवांस में रुपये देने के लिए उनका एकाउंट ले लिया था। आरोपी ने पहले एकाउंट में एक रुपये भेज कर चेक करने की बात की, इंजीनियर के खाते में कोई भुगतान नहीं हुआ। इसके बाद आरोपी ने एक लिंक भेजकर उनके खाते से दस हजार रुपये उड़ा लिए।
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सिविल लाइंस के जिगर कॉलोनी निवासी आईटी इंजीनियर ने थाने में केस दर्ज कराया था, जिसमें उन्होंने बताया था कि ग्यारह हजार रुपये डेबिट कार्ड द्वारा निकाले जाने का मैसेज उनके मोबाइल पर आया था। उन्होंने बैंक के हेल्प लाइन नंबर पर कॉल कर डेबिट कार्ड बंद कर दिया था। अगले दिन इंजीनियर ने बैंक जाकर पता किया तो जानकारी हुई कि रुपये विदेश में निकाले गए हैं।
मुरादाबाद में तैनात सेक्शन इंजीनियर को साइबर ठग ने वर्ष 2020 में 29 दिसंबर को कॉल की थी। साइबर ठग ने खुद को बीमा कंपनी मुंबई ऑफिस के कस्टमर केयर से बताकर काल की थी। आरोपी ने सेक्शन इंजीनियर से बताया था कि आपकी पॉलिसी मैच्योर हुई है। उसका कुछ रिफंड बकाया है। इसका लालच देकर ऑनलाइन करीब 1.81 लाख रुपये की ठगी की थी।
सिविल थानाक्षेत्र के हरथला मंडी निवासी आरिफ अली पुलिस विभाग से दरोगा के पद से सेवानिवृत्त हैं। पांच फरवरी की शाम साइबर ठगों ने उनके खाते से दो बार में बीस हजार निकल लिए थे। खास बात ये है कि उन्होंने न तो किसी को ओटीपी बताया था और न ही किसी ने कॉल की थी।