{"_id":"57b5505a4f1c1ba2506ec191","slug":"crowded-in-train-can-not-find-a-place-in-rakhi","type":"story","status":"publish","title_hn":"ट्रेनों में पैर रखने भर जगह के लिए बहनों की जद्दोजहद ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ट्रेनों में पैर रखने भर जगह के लिए बहनों की जद्दोजहद
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Thu, 18 Aug 2016 11:36 AM IST
विज्ञापन
राखी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
रक्षाबंधन पर भाइयों को राखी बांधने के लिए घर से निकली बहनों के ट्रेनें सहारा बनीं। जिसके चलते बुधवार को ट्रेनों में अन्य दिनों की तुलना में भीड़ अधिक रही। ट्रेनों में चढ़ने के लिए भी मारामारी रही। जबकि गुुरुवार को ट्रेनों में और भीड़ बढ़ेगी।
गुुरुवार को भाई बहन के प्यार का प्रतीक त्योहार रक्षाबंधन मनाया जाएगा। बहन भाईयों के घर जाएंगी तो भाई भी बहन से राखी बंधवाने के लिए उनके घर जाएंगे। हर किसी को घर पहुंचने की लगी हुई है। जिसके चलते ट्रेनों में जबरदस्त भीड़ रही।
बुधवार को स्टेशन अन्य दिनों की तुलना में अलग ही नजारा था। सभी प्लेटफार्म तक फुल थे। ट्रेन आने के साथ ही चढ़ने की होड़ लग जा रही थी। हालत ये थी कि कोच में घुसने के लिए ट्रेन से उतरने वालों को ही अंदर धक्का दिया जा रहा था।
विज्ञापन
सुबह तक तो स्थिति सामान्य थी, लेकिन दोपहर बाद से भीड़ बढ़ना शुरू हो गई। जो भी ट्रेन आई उसमें पहले से ही भीड़ थी। इसके बावजूद कोच में चढ़ने के लिए धक्कामुक्की और मारामारी होती रही।
महिला कोच पर कब्जे वाले कम नहीं
मुरादाबाद। महिला कोच में कब्जा करने वाले भी कम नहीं थे। जब कहीं जगह नहीं मिली तो महिला कोच पर भी कब्जा जमाने लगे। लेकिन रेलवे की ओर से त्योहार के लिए कोई विशेष इंतजाम नहीं किया गया। यहां तक कि महिला कोच को खाली कराने के लिए जीआरपी और आरपीएफ भी मौजूद नहीं थी।
गुुरुवार को भाई बहन के प्यार का प्रतीक त्योहार रक्षाबंधन मनाया जाएगा। बहन भाईयों के घर जाएंगी तो भाई भी बहन से राखी बंधवाने के लिए उनके घर जाएंगे। हर किसी को घर पहुंचने की लगी हुई है। जिसके चलते ट्रेनों में जबरदस्त भीड़ रही।
विज्ञापन
बुधवार को स्टेशन अन्य दिनों की तुलना में अलग ही नजारा था। सभी प्लेटफार्म तक फुल थे। ट्रेन आने के साथ ही चढ़ने की होड़ लग जा रही थी। हालत ये थी कि कोच में घुसने के लिए ट्रेन से उतरने वालों को ही अंदर धक्का दिया जा रहा था।
विज्ञापन
सुबह तक तो स्थिति सामान्य थी, लेकिन दोपहर बाद से भीड़ बढ़ना शुरू हो गई। जो भी ट्रेन आई उसमें पहले से ही भीड़ थी। इसके बावजूद कोच में चढ़ने के लिए धक्कामुक्की और मारामारी होती रही।
महिला कोच पर कब्जे वाले कम नहीं
मुरादाबाद। महिला कोच में कब्जा करने वाले भी कम नहीं थे। जब कहीं जगह नहीं मिली तो महिला कोच पर भी कब्जा जमाने लगे। लेकिन रेलवे की ओर से त्योहार के लिए कोई विशेष इंतजाम नहीं किया गया। यहां तक कि महिला कोच को खाली कराने के लिए जीआरपी और आरपीएफ भी मौजूद नहीं थी।