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ड्यूटी करते जान गंवाई, सिविल डिफेंस ने झाड़ा पल्ला
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Thu, 13 Oct 2016 01:52 AM IST
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धर्मेंद्र की चिता को मुखाग्नि देते उनके पिता।
- फोटो : अमर उजाला
आरआरके स्कूल में टीचर श्रद्धा शर्मा के हादसे में लीपापोती करने वाली सिविल डिफेंस ने सेक्टर वार्डन धर्मेंद्र की मौत के मामले में भी पल्ला झाड़ लिया। बड़ी बेदर्दी से सिविल डिफेंस के अधिकारियों ने कहा कि धर्मेंद्र... वो तो सिविल डिफेंस में है ही नहीं।
2015 से उसकी कोई ड्यूटी नहीं लगाई गई। उसने अपना रिन्यूअल ही नहीं कराया था। उसने ड्रेस भी वापस नहीं की। वही पहनकर चला आया और ड्यूटी करने लगा। हमने तो उसकी ड्यूटी नहीं लगाई थी।
सिविल डिफेंस के असिस्टेंट डिप्टी कंट्रोलर जगदीश प्रसाद फौजदार ने बताया कि धर्मेंद्र दशहरा पर ड्यूटी पर नहीं था। उसके कार्ड की अवधि 2015 में ही समाप्त हो गई थी। 2015 से कहीं भी उसकी ड्यूटी नहीं लगाई गई थी। धर्मेंद्र 2013 में सिविल डिफेंस से जुड़ा था।
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तीन साल बाद उसे अपने कार्ड का नवीनीकरण कराना था, लेकिन उसने नहीं कराया। इस कारण सिविल डिफेंस के रिकॉर्ड में उसका नाम ही नहीं है। मंगलवार को भी वह ड्यूटी पर तैनात नहीं किया गया था।
उन्होंने बताया कि अधिकांश वार्डन अपनी ड्रेस वापस नहीं करते और अपने पास ही रख लेते हैं। धर्मेंद्र ने भी वही ड्रेस पहन ली थी। 2013 में भी धर्मेंद्र वार्डन नहीं बल्कि पोस्ट वार्डन के संदेश वाहक के तौर पर कार्यरत था। जरूरत पड़ने पर संदेश वाहकों की भी ड्यूटी लगाई जाती है।
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2015 से उसकी कोई ड्यूटी नहीं लगाई गई। उसने अपना रिन्यूअल ही नहीं कराया था। उसने ड्रेस भी वापस नहीं की। वही पहनकर चला आया और ड्यूटी करने लगा। हमने तो उसकी ड्यूटी नहीं लगाई थी।
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सिविल डिफेंस के असिस्टेंट डिप्टी कंट्रोलर जगदीश प्रसाद फौजदार ने बताया कि धर्मेंद्र दशहरा पर ड्यूटी पर नहीं था। उसके कार्ड की अवधि 2015 में ही समाप्त हो गई थी। 2015 से कहीं भी उसकी ड्यूटी नहीं लगाई गई थी। धर्मेंद्र 2013 में सिविल डिफेंस से जुड़ा था।
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तीन साल बाद उसे अपने कार्ड का नवीनीकरण कराना था, लेकिन उसने नहीं कराया। इस कारण सिविल डिफेंस के रिकॉर्ड में उसका नाम ही नहीं है। मंगलवार को भी वह ड्यूटी पर तैनात नहीं किया गया था।
उन्होंने बताया कि अधिकांश वार्डन अपनी ड्रेस वापस नहीं करते और अपने पास ही रख लेते हैं। धर्मेंद्र ने भी वही ड्रेस पहन ली थी। 2013 में भी धर्मेंद्र वार्डन नहीं बल्कि पोस्ट वार्डन के संदेश वाहक के तौर पर कार्यरत था। जरूरत पड़ने पर संदेश वाहकों की भी ड्यूटी लगाई जाती है।