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पूर्व विधायक को ऐश कराने में फंसे पुलिस कर्मी

Thu, 08 Dec 2016 02:36 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुरादाबाद
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुरादाबाद Updated Thu, 08 Dec 2016 02:36 AM IST
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police implicated in luxury to prisoner mla
पुलिस कर्मी फंसे - फोटो : demo
 पूर्व विधायक उस्मानउल हक को ऐश कराने में तीन पुलिस कर्मी बूरे फंस गए हैं। हत्या के केस में सजा काट रहे पूर्व विधायक को पुलिस कस्टडी में बीमारी की जांच के लिए लखनऊ पीजीआई ले जाया गया था। वहां पूर्व विधायक को अस्पताल में न ठहराते हुए गैस्ट हाउस में रुकवाया और सुख सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
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एसएसपी के आदेश पर एएसपी से पूरे प्रकरण की जांच की। जांच में पूर्व विधायक के गैस्ट हाउस में रुकने के पुख्ता सबूत मिले। जिसमें तीनों सिपाही दोषी पाए गए हैं। उन्होंने अपनी रिपोर्ट एसएसपी को सौंप दी है।
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मुरादाबाद देहात विधान सभा से विधायक शमीमुलहक के भतीजे व पूर्व विधायक उस्मान उलहक मोअज्जम हत्याकांड में जिला जेल में सजा काट रहे हैं। उस्मान उल हक लंबे समय से बीमार हैं। जेल अस्पताल के डाक्टर ने हत्या के मुजरिम पूर्व विधायक को बीमारी की जांचों के लिए पीजीआई लखनऊ भेजा था।
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पुलिस लाइन के तीन सिपाही उस्मान उल हक को 23 अगस्त 2016 को लखनऊ पीजीआई लेकर गए थे। जांचें कराने में करीब पांच दिन बीत गए थे। छह दिन बाद पुलिस कर्मी विधायक को लेकर वापस आए थे। मोअज्जम हत्याकांड के वादी ने इस मामले की शिकायत तत्कालीन एसएसपी से की थी।

इसके अलावा शासन से भी शिकायत की र्गई। शासन ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए जिला कारागार इलाहाबाद के डीआईजी को जांच के लिए कहा था। डीआईजी की ओर से एसएसपी मुरादाबाद के लिए पत्र आया। जिसमें शिकायत का जिक्र किया गया।

इसके बाद एसएसपी ने पूरे मामले की जांच एएसपी डा. यशवीर सिंह से कराई। जिसमें पाया गया  कि पुलिस लाइन के तीन सिपाही पूर्व विधायक को लेकर लखनऊ गए थे। वहां विधायक को गैस्ट हाउस में ठहराया गया था। इस मामले में तीनों सिपाही दोषी पाए गए हैं। डा. यश्वीर सिंह ने बताया कि जांच में सिपाही दोषी पाए गए हैं। उच्च अधिकारियों को जांच रिपोर्ट सौंप दी गई है।

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पूर्व एसओ को ऐश कराने वाले बख्श दिए
मुरादाबाद। सर्राफ हत्याकांड के आरोपी मूंढापांडे थाने के पूर्व एसओ सैयद मंसूर आबिद को बिजनौर जिले की कोर्ट में पेशी के बाद वापस लाते समय उमरी के पास बंदी वाहन रुकवा कर स्पेशल ट्रीटमेंट दिया गया था। वाहन में तीन अन्य बंदी भी थे। लेकिन उन्हें पानी की एक बूंद तक नहीं दी गई थी। लौटने पर जेल गेट पर अन्य बंदियों ने हंगामा किया था और दरोगा के साथ मारपीट की थी। इस मामले में जांच कराने को कहा गया था। लेकिन जांच नहीं कराई गई। जबकि हत्यारोपी की जमानत भी हो चुकी है।
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