फ्रेंड्स! मैं गई तुम्हारे रूम-लाइफ से..बी हैप्पी
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दीक्षा ने सुसाइड नोट में लिखा है कि ‘... मेरे मरने का रीजन तो मेरे आसपास के लोग हैं.. जो दिनभर कमेंट्स करते रहते हैं .. यहां तक कि सोने के बाद भी ...यहां कोई किसी का नहीं है... कोई अच्छा नहीं है, .. सो मैं जा रही हूं .. बहुत ट्राई किया खुश रहने का, नहीं रह पा रही यहां... मैं हार गई हर चीज से...और रूममेट्स मैं अब बाहर गई तुम्हारे रूम, लाइफ से ... बी हैप्पी अब तो.. तुम लोगों ने बहुत परेशान किया है.. स्पेशिएली निधि और मिश्वा.. मुझे तुम लोगों ने.. रोज-रोज सहन नहीं होता’।
अपने अाखिरी पत्र में कह गई दीक्षी
..बहुत फोन किया तुमने नहीं उठाया आयुष
दीक्षा ने मरने से पहले अपने दोस्तों को कॉल कॉल की थी। लेकिन शायद क्लास का वक्त होने की वजह से कोई भी उसकी कॉल रिसीव नहीं कर सका। दीक्षा ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है ‘... सॉरी आयुष सबसे बिना बात किए जा रही हूं... बहुत फोन किया बट तुम फोन ही नहीं उठाए... तो अब जा रही हूं .. बाय ’।
‘पापा बहुत कोशिश की पर अच्छी बेटी न बन सकी’
दीक्षा पिछले कुछ दिनों से तनाव में थी। उसने सुसाइड नोट में अपने इस दर्द और तनाव को पिता से बयां किया है। सुसाइड नोट में उसने अपने पिता से कहा है,‘... सॉरी पापा ...मैं आपकी अच्छी बेटी नहीं हूं... मैं आपकी बेटी होने के लायक भी नहीं ...आप खुद खून कर देते मेरा अगर आपके बस में होता ..पापा यहां मैंने बहुत ट्राई किया आपकी अच्छी बेटी बनने का ... लेकिन मैं हार गई...आई लव यू टू पापा.. आपकी वजह से इतना कुछ हूं मैं ...लेकिन अब जा रही हूं.. बॉय ’
‘मेरे दोस्त आयुष को परेशान मत करना ’
बीडीएस छात्रा दीक्षा ने मरने से पहले लिखे नोट में अपने दोस्त आयुष का बचाव किया है। उसने सुसाइड नोट में बार - बार कहा है कि आयुष उसका दोस्त है और वह उसे प्यार करती है। उसके मरने के बाद उसे परेशान न किया जाए। बीडीएस छात्रा ने दो पेज के सुसाइड नोट में लिखा है, ‘..मैं दीक्षा अग्रवाल.. मेरे सुसाइड का रीजन मेरा बीएफ (ब्वायफ्रेंड) नहीं है.. प्लीज उसके ऊपर कुछ भी मत डालना.. मैं उससे बहुत प्यार करती हूं और वो मुझसे ... ’।