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‘मुर्दों के बीमे’ के डर से कंपनियां सहमीं
ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद
Updated Sat, 02 Jul 2016 02:40 AM IST
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फर्जीवाड़ा
- फोटो : demo pic
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मुर्दों का बीमा कराके करोड़ों का क्लेम हड़पने वाले बीमा कंपनियों में कार्यरत जालसाज कर्मचारियों की वजह से इंश्योरेंस सेक्टर में खलबली मची हुई है। पिछले करीब डेढ़ साल में मुर्दों के फर्जी क्लेम के कारण पांच नामी बीमा कंपनियां मुरादाबाद से अपना कारोबार समेट चुकी हैं।
कुछ कंपनियों ने पड़ोसी मंडल बरेली में बड़े आफिस खोल लिए हैं तो कु छ ने अपना एजेंसी मॉडल बंद कर दिया है। मुर्दों के बीमा कराने जैसे फ्राड केस बढ़ने के कारण मुरादाबाद को इंश्योरेंस सेक्टर ने डार्कजोन घोषित करके काम करना शुरू कर दिया है।
ब्रास सिटी और औद्योगिक रूप से विकसित होने के कारण मुरादाबाद में वर्ष 2005-06 के बाद बढ़ी संख्या में निजी बीमा कंपनियों ने यहां आकर अपना कारोबार शुरू किया। एक साथ टाटा एआईजी, कोटक महेंद्रा, एचडीएफसी लाइफ, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, बजाज, भारती अक्सा, अबीबा, फ्यूचर जनरली, रैली गेयर, रिलायंस लाइफ, बिड़ला सन लाइफ जैसी बीमा कंपनियों ने कारोबार शुरू किया।
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तीन चार वर्ष बाद ही कंपनियों में कुछ ऐसे एडवाइजर और एजेंसी मैनेजर घुसे की पूरा इंश्योरेंस सेक्टर प्रभावित हो गया। मरे हुए लोगों के डाक्यूमेंट जुटाकर और उनके फर्जी दस्तावेज तैयार कराके बीमा किए जाने और फिर फर्जी क्लेम निकालने से कई कंपनियां प्रभावित हुईं। इन कंपनियों में ही यह जालसाज कर्मचारी इधर उधर नौकरी करके फर्जीवाड़ा करते रहे।
011 के बाद फर्जीवाड़ा खुलने लगा। इसके बाद मुरादाबाद में कार्यरत कई बीमा कंपनियां यहां से अपना कारोबार समेट कर चली गईं। जिसमें ताड़ीखाना में अपनी बड़ा आफिस खोलने के बाद अबीबा लाइफ इंश्योरेंस, सिविल लाइंस में एचडीएफसी बैंक के ऊपर से फ्यूचर जरनली, पार्श्वनाथ प्लाजा में आफिस खोलने के बाद रैली गेयर और कोटक महेंद्रा, टाटा एआईजी ने अपने आफिस समेट कर बरेली में बड़े आफिस खोल लिए।
कोटक महेंद्रा ने बड़ा आफिस बंद कर छोटा कलेक्शन सेंटर बना दिया। वहीं आईसीआईसीआई अपना एजेंसी मॉडल खत्म करके दूसरी तरह से इंश्योरेंस कर रही है। मुर्दों के बीमा कराके फर्जी क्लेम निकालने के कारण पूरे इंश्योरेंस सेक्टर में खलबली मची हुई है। इसीलिए मुरादाबाद डार्कजोन घोषित हो चुका है।
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कुछ कंपनियों ने पड़ोसी मंडल बरेली में बड़े आफिस खोल लिए हैं तो कु छ ने अपना एजेंसी मॉडल बंद कर दिया है। मुर्दों के बीमा कराने जैसे फ्राड केस बढ़ने के कारण मुरादाबाद को इंश्योरेंस सेक्टर ने डार्कजोन घोषित करके काम करना शुरू कर दिया है।
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ब्रास सिटी और औद्योगिक रूप से विकसित होने के कारण मुरादाबाद में वर्ष 2005-06 के बाद बढ़ी संख्या में निजी बीमा कंपनियों ने यहां आकर अपना कारोबार शुरू किया। एक साथ टाटा एआईजी, कोटक महेंद्रा, एचडीएफसी लाइफ, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, बजाज, भारती अक्सा, अबीबा, फ्यूचर जनरली, रैली गेयर, रिलायंस लाइफ, बिड़ला सन लाइफ जैसी बीमा कंपनियों ने कारोबार शुरू किया।
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तीन चार वर्ष बाद ही कंपनियों में कुछ ऐसे एडवाइजर और एजेंसी मैनेजर घुसे की पूरा इंश्योरेंस सेक्टर प्रभावित हो गया। मरे हुए लोगों के डाक्यूमेंट जुटाकर और उनके फर्जी दस्तावेज तैयार कराके बीमा किए जाने और फिर फर्जी क्लेम निकालने से कई कंपनियां प्रभावित हुईं। इन कंपनियों में ही यह जालसाज कर्मचारी इधर उधर नौकरी करके फर्जीवाड़ा करते रहे।
011 के बाद फर्जीवाड़ा खुलने लगा। इसके बाद मुरादाबाद में कार्यरत कई बीमा कंपनियां यहां से अपना कारोबार समेट कर चली गईं। जिसमें ताड़ीखाना में अपनी बड़ा आफिस खोलने के बाद अबीबा लाइफ इंश्योरेंस, सिविल लाइंस में एचडीएफसी बैंक के ऊपर से फ्यूचर जरनली, पार्श्वनाथ प्लाजा में आफिस खोलने के बाद रैली गेयर और कोटक महेंद्रा, टाटा एआईजी ने अपने आफिस समेट कर बरेली में बड़े आफिस खोल लिए।
कोटक महेंद्रा ने बड़ा आफिस बंद कर छोटा कलेक्शन सेंटर बना दिया। वहीं आईसीआईसीआई अपना एजेंसी मॉडल खत्म करके दूसरी तरह से इंश्योरेंस कर रही है। मुर्दों के बीमा कराके फर्जी क्लेम निकालने के कारण पूरे इंश्योरेंस सेक्टर में खलबली मची हुई है। इसीलिए मुरादाबाद डार्कजोन घोषित हो चुका है।