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नक्सलियों को कारतूस सप्लाई, हैंडलर की पहचान को कराई पुलिस परेड

Fri, 22 Jul 2016 11:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद Updated Fri, 22 Jul 2016 11:10 AM IST
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cartridge supply me be Naxalites from moradabad
अपराध - फोटो : demo
 बनारस एसटीएफ के हत्थे चढ़े नक्सलियों को कारतूस सप्लाई करने वाले तस्करों के खुलासे से लखनऊ तक हड़कंप मच गया है। एसटीएफ टीम बनारस से दोनों अभियुक्तों को मुरादाबाद लेकर आई और अफसरों के सामने पुलिसलाइन, पीएसी बटालियन, पुलिस अकादमी के एक एक सिपाही को तस्करों के सामने से गुजारा गया।  आधी रात ही एसटीएफ दोनों अभियुक्तों को लेकर बनारस लौट गई। हालांकि इस मामले में अभी चुप है, लेकिन उनका कहना है कि बनारस पुलिस जो सहयोगी मांगेगी, वो किया जाएगा।
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बनारस में कारतूस तस्करों को पकड़े जाने के बाद ही लखनऊ के आला अधिकारी बरेली, मुरादाबाद और रामपुर के अफसरों से संपर्क साधे हैं। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक लखनऊ के डायरेक्शन पर ही दोनों को अभियुक्तों को एसटीएफ बनारस से मुरादाबाद लाई थी। चूंकि मामला कारतूस तस्करी के साथ ही नक्सलियों से जुड़ा है, लिहाजा पूरी गोपनीयता बरती जा रही है। अफसरों का मानना है बनारस में पकड़ा गया कारतूस तस्करी का रैकेट 2011 के रामपुर सीआरपीेफ कारतूस कांड से जुड़ा मान रहे हैं।
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याद रहे सीआरपीएफ के एक आर्मरर समेत तीन जवान और मुरादाबाद पुलिस अकदामी का एक आर्मरर नातीराम पकड़ा गया था। पुलिस परेड के बाद अफसरों का मानन है कि इस मामले में भी तार सीारपीएफ से जुड़े निकलेंगे। वहीं नातीराम के संपर्कसूत्र भी तलाशे जा रहे हैं। तस्करों ने अफसरोंको बताया है कि कारतूसस देने वाला हैंडलर उन्हें मुरादाबाद रेलवे स्टेशन पर मिला था और वहीं हमेशा बुलाता था। चूंकि सीआरपीएफ कांड का सरगना भी इसी तरह मुरादाबाद रेलवे स्टेशन पर हैंडलर से सप्लाई दिलवाता था। इसलिए अफसर इस रामपुर सीआरपीएफ से जुड़ा मान रहे हैं। 
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सीतपुर पीटीसी भी भेजी गई एक टीम
चूंकि सीतापुर पीटीसी में प्रदेशभर की पुलिस अकदामी के इस्तेमाल किए गए खाली कारतूस जमा कराए जाते हैं और उनका रिकार्ड रखा जाता है इसलिए पुलिस टीम वहां का रिकार्ड चेक करेगी।


ट्रेनिंग की बजाए केवल रिकार्ड में चलाए कारतूस!
मुरादाबाद और रामपुर के पुलिस अफसरों ने अकादमी, पुलिस लाइन और पीएसी बटालियन में ट्रेनिंग के दौरान की गई फायरिंग का रिकार्ड भी खंगलवाना शुरू कर दिया है। अंदेशा है कि यहां लंबे समय से ट्रेनिंग के दौरान कारतूस इस्तेमाल ना करके रिकार्ड में उनका इस्तेमाल दिखाया जा रहा था। ट्रेनिंग को दिए जाने वाले कारतूस सप्लाई किए जा रहे थे। सीतापुर यूनिट में दूसरी जगह से खाली खोखे जमा कराए जा रहे थे। सीतापुर यूनिट से से खाखे के रिकार्ड लेकर यहां से तस्दीक कराई जाएगी।

 
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