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सीडीओ के फर्जी दस्तखत से निकाले छात्रवृत्ति के 1.93 करोड़
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Sun, 26 Jun 2016 11:19 AM IST
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घोटाला
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मुख्य विकास अधिकारी और अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के फर्जी दस्तखत बनाकर सरकारी बैंक खातों से 1.93 करोड़ रुपये उड़ाए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। घोटाले में एसबीआई के चार शाखा प्रबंधकों और पांच स्कूलों के प्रिंसिपल व प्रबंधक के साथ ही समाज कल्याण विभाग के एक कंप्यूटर आपरेटर के खिलाफ शनिवार देर रात सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। घोटाले में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के कुछ अधिकारियों पर भी तलवार लटक रही है।
सरकारी एकाउंट में सेंधमारी करके फर्जी दस्तखत से उड़ाई गई यह रकम अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों में छात्रवृत्ति वितरित करने के लिए सरकार से मिली थी। इस रकम को आदर्श पब्लिक जूनियर हाईस्कूल भोजपुर धर्मपुर, आनंद पब्लिक स्कूल नाखूनका, आदर्श पब्लिक स्कूल मुरादाबाद, सकलैनी पब्लिक जूनियर हाईस्कूल कांकरखेड़ा और आस्था पब्लिक जूनियर हाईस्कूल भोजपुर के खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।
समाज कल्याण विभाग के सरकारी बैंक खाते से यह रकम सीडीओ और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के फर्जी दस्तखतों के जरिए नवंबर 2015 से लेकर जनवरी 2016 के बीच में ट्रांसफर की गई। रकम को भारतीय स्टेट बैंक की सिविल लाइंस स्थित मुख्य शाखा, पीली कोठी शाखा, करुला ब्रांच और भोजपुर शाखा में खुले स्कूलों के खातों में ट्रांसफर किया गया।
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सरकारी एकाउंट में सेंधमारी करके इतनी बड़ी रकम उड़ाने के खुलासे से अफसरों में खलबली है। डीएम जुहैर बिन सगीर के आदेश पर शनिवार रात अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी वीके मिश्र ने सिविल लाइंस थाने में महकमे के पूर्व संविदा कंप्यूटर आपरेटर राहुल कुमार पुत्र अधिराज सिंह निवासी आदर्श कालोनी, धर्मानंद भटनागर पुत्र आनंदस्वरूप निवासी पीपलसाना, सुरेंद्र सिंह और एसबीआई के चारों शाखा प्रबंधकों व अन्य कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी करके सरकारी धन के गबन की रिपोर्ट दर्ज करा दी है।
छह महीने से घोटाले को दबाए बैठे थे अफसर
मुरादाबाद। जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारियों को इस घोटाले के बारे में छह माह पहले से जानकारी थी, लेकिन अधिकारी पूरे घोटाले को दबाकर बैठे रहे। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारियों का दावा किसी के गले नहीं उतर रहा है कि सरकारी खाते से 1.93 करोड़ रुपये निकल गए और उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी। महकमे के अधिकारियों का रवैय्या उन्हें कठघरे में खड़ा कर रहा है।
डीएम ने बैठाई हाई लेवल इंक्वायरी
मुरादाबाद। जिलाधिकारी जुहैर बिन सगीर ने पूरे प्रकरण पर उच्च स्तरीय जांच बैठा दी है। डीएम ने बताया कि जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया गया है, जिसमें सीडीओ, डीडीओ, एक एडीएम, चीफ ट्रेजरी आफिसर और अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी शामिल रहेंगे। दूसरे सरकारी खातों को भी चेक किया जाएगा कि कहीं उनमें भी इस प्रकार का घोटाला तो नहीं हुआ है।
पोल खुली तो एकाउंट में वापस कर दिए 80 लाख
मुरादाबाद। खेल उजागर होने से घबराए जालसाजों ने शनिवार को सरकारी खाते में 80 लाख रुपये वापस कर दिए हैं। डीएम ने बताया कि सरकारी एकाउंट से निकाली गई रकम में से 80 लाख रुपये वापस खाते में डलवा दिए जाने की सूचना मिली है। लेकिन इस बात से अब कोई फर्क नहीं पड़ता। सरकारी रकम का गबन किया गया है, लिहाजा जो भी इस खेल में शामिल हैं उन सभी को अंजाम भुगतना होगा।
डीएम ने कराई जांच तो खुली पोल
1.93 करोड़ रुपये का यह घोेटाला शायद वक्त के साथ रिकार्ड में ही कहीं दफन हो गया होता अगर डीएम को इस बारे में सूचना नहीं मिली होती। जिलाधिकारी जुहैर बिन सगीर को करीब पंद्रह दिन पहले सूचना मिली थी कि जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति के लिए आई रकम को पात्रों तक पहुंचाने के बजाए धीरे - धीरे ठिकाने लगाया जा रहा है। इस पर डीएम ने मामले की गोपनीय जांच कराई को पूरा खेल खुलकर सामने आ गया। डीएम ने जांच कराई तो पता चला कि वित्तीय वर्ष 2015-16 की आखिरी दो तिमाही में सरकारी खातों से 1.93 करोड़ रुपये उड़ाए गए हैं। जब इस मामले में डीएम ने संबंधित अफसरों से सवाल जवाब किए तो अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने जवाब दिया दस्तखत उनके नहीं हैं, किसी ने फर्जी हस्ताक्षर से रकम निकाली है।
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सरकारी एकाउंट में सेंधमारी करके फर्जी दस्तखत से उड़ाई गई यह रकम अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों में छात्रवृत्ति वितरित करने के लिए सरकार से मिली थी। इस रकम को आदर्श पब्लिक जूनियर हाईस्कूल भोजपुर धर्मपुर, आनंद पब्लिक स्कूल नाखूनका, आदर्श पब्लिक स्कूल मुरादाबाद, सकलैनी पब्लिक जूनियर हाईस्कूल कांकरखेड़ा और आस्था पब्लिक जूनियर हाईस्कूल भोजपुर के खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।
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समाज कल्याण विभाग के सरकारी बैंक खाते से यह रकम सीडीओ और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के फर्जी दस्तखतों के जरिए नवंबर 2015 से लेकर जनवरी 2016 के बीच में ट्रांसफर की गई। रकम को भारतीय स्टेट बैंक की सिविल लाइंस स्थित मुख्य शाखा, पीली कोठी शाखा, करुला ब्रांच और भोजपुर शाखा में खुले स्कूलों के खातों में ट्रांसफर किया गया।
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सरकारी एकाउंट में सेंधमारी करके इतनी बड़ी रकम उड़ाने के खुलासे से अफसरों में खलबली है। डीएम जुहैर बिन सगीर के आदेश पर शनिवार रात अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी वीके मिश्र ने सिविल लाइंस थाने में महकमे के पूर्व संविदा कंप्यूटर आपरेटर राहुल कुमार पुत्र अधिराज सिंह निवासी आदर्श कालोनी, धर्मानंद भटनागर पुत्र आनंदस्वरूप निवासी पीपलसाना, सुरेंद्र सिंह और एसबीआई के चारों शाखा प्रबंधकों व अन्य कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी करके सरकारी धन के गबन की रिपोर्ट दर्ज करा दी है।
छह महीने से घोटाले को दबाए बैठे थे अफसर
मुरादाबाद। जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारियों को इस घोटाले के बारे में छह माह पहले से जानकारी थी, लेकिन अधिकारी पूरे घोटाले को दबाकर बैठे रहे। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारियों का दावा किसी के गले नहीं उतर रहा है कि सरकारी खाते से 1.93 करोड़ रुपये निकल गए और उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी। महकमे के अधिकारियों का रवैय्या उन्हें कठघरे में खड़ा कर रहा है।
डीएम ने बैठाई हाई लेवल इंक्वायरी
मुरादाबाद। जिलाधिकारी जुहैर बिन सगीर ने पूरे प्रकरण पर उच्च स्तरीय जांच बैठा दी है। डीएम ने बताया कि जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया गया है, जिसमें सीडीओ, डीडीओ, एक एडीएम, चीफ ट्रेजरी आफिसर और अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी शामिल रहेंगे। दूसरे सरकारी खातों को भी चेक किया जाएगा कि कहीं उनमें भी इस प्रकार का घोटाला तो नहीं हुआ है।
पोल खुली तो एकाउंट में वापस कर दिए 80 लाख
मुरादाबाद। खेल उजागर होने से घबराए जालसाजों ने शनिवार को सरकारी खाते में 80 लाख रुपये वापस कर दिए हैं। डीएम ने बताया कि सरकारी एकाउंट से निकाली गई रकम में से 80 लाख रुपये वापस खाते में डलवा दिए जाने की सूचना मिली है। लेकिन इस बात से अब कोई फर्क नहीं पड़ता। सरकारी रकम का गबन किया गया है, लिहाजा जो भी इस खेल में शामिल हैं उन सभी को अंजाम भुगतना होगा।
डीएम ने कराई जांच तो खुली पोल
1.93 करोड़ रुपये का यह घोेटाला शायद वक्त के साथ रिकार्ड में ही कहीं दफन हो गया होता अगर डीएम को इस बारे में सूचना नहीं मिली होती। जिलाधिकारी जुहैर बिन सगीर को करीब पंद्रह दिन पहले सूचना मिली थी कि जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति के लिए आई रकम को पात्रों तक पहुंचाने के बजाए धीरे - धीरे ठिकाने लगाया जा रहा है। इस पर डीएम ने मामले की गोपनीय जांच कराई को पूरा खेल खुलकर सामने आ गया। डीएम ने जांच कराई तो पता चला कि वित्तीय वर्ष 2015-16 की आखिरी दो तिमाही में सरकारी खातों से 1.93 करोड़ रुपये उड़ाए गए हैं। जब इस मामले में डीएम ने संबंधित अफसरों से सवाल जवाब किए तो अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने जवाब दिया दस्तखत उनके नहीं हैं, किसी ने फर्जी हस्ताक्षर से रकम निकाली है।