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Nainital News: 35 साल से नहीं दिखे सुदर्शन, आशा ने हक के लिए उम्मीद से दी दस्तक
Tue, 25 Aug 2026 02:42 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Tue, 25 Aug 2026 02:42 AM IST
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हल्द्वानी। यूपी के समय में नैनीताल जिले में बतौर सिपाही तैनात रहे वाराणसी निवासी सुदर्शन का 35 साल से कोई सुराग नहीं है। इसके बावजूद उनकी पत्नी आशा ने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा। पति के बिछड़ने के बाद कठिन हालात में बेटी को संभालती रहीं। अब आर्थिक जरूरतों के बीच पति की नौकरी से जुड़े हक की आस लेकर सोमवार को वह पुलिस की चौखट पर पहुंचीं।
वाराणसी जिले के गांव कैथी (चौबेपुर तहसील) निवासी आशा देवी ने पुलिस बहुउद्देशीय भवन पहुंचकर एसपी सिटी मनोज कुमार कत्याल से मदद की गुहार लगाई। उन्होंने बताया कि उनके पति सुदर्शन सिंह वर्ष 1988 से 1989 तक जीआरपी में तैनात रहे। उस समय उत्तराखंड उत्तर प्रदेश का हिस्सा था। इसके बाद उनका तबादला सिविल पुलिस में हुआ और उन्हें नैनीताल जिले में सिपाही के पद पर तैनाती मिली।
आशा देवी के अनुसार वर्ष 1991 में तत्कालीन एसएसपी नैनीताल ने किसी गलती के चलते सुदर्शन सिंह को निलंबित कर दिया था। निलंबन के बाद वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगे। कुछ समय बाद वह अचानक लापता हो गए। परिवार ने काफी तलाश की लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद वर्षों तक आशा देवी और उनकी इकलौती बेटी भी इस सदमे से जूझती रहीं। मायके पक्ष के लोगों ने उनका इलाज कराया।
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अब मानसिक स्थिति ठीक होने के बाद आशा देवी ने पति की नौकरी से जुड़े हक की तलाश शुरू की है। उन्होंने बताया कि परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा है और बेटी की शादी समेत कई जिम्मेदारियां सामने हैं। ऐसे में यदि सुदर्शन सिंह की सेवा से संबंधित कोई लाभ शेष है तो वह उन्हें दिलाया जाए।
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रिकॉर्ड तलाशने में जुटा पुलिस मुख्यालय
आशा देवी के पास पति का सर्विस नंबर, पीपीओ नंबर या नौकरी से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं है। इसके बावजूद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सुदर्शन सिंह की सेवा से जुड़े रिकॉर्ड की तलाश शुरू कर दी है। इधर आशा का कहना है कि 35 साल से पति का कोई पता नहीं चला। अब उम्मीद है कि उनकी नौकरी से जुड़े किसी हक के सहारे बेटी का भविष्य संवर सके।
-- - महिला के पास पति का सर्विस नंबर और पीपीओ नंबर नहीं है। जीआरपी और पुलिस मुख्यालय दोनों को पत्र भेजकर उनके पति की जानकारी मांगी गई है। रिकॉर्ड मिलने पर आगे की कार्रवाई कर उच्चाधिकारियों को जानकारी दी जाएगी। मनोज कुमार कत्याल, एसपी सिटी
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वाराणसी जिले के गांव कैथी (चौबेपुर तहसील) निवासी आशा देवी ने पुलिस बहुउद्देशीय भवन पहुंचकर एसपी सिटी मनोज कुमार कत्याल से मदद की गुहार लगाई। उन्होंने बताया कि उनके पति सुदर्शन सिंह वर्ष 1988 से 1989 तक जीआरपी में तैनात रहे। उस समय उत्तराखंड उत्तर प्रदेश का हिस्सा था। इसके बाद उनका तबादला सिविल पुलिस में हुआ और उन्हें नैनीताल जिले में सिपाही के पद पर तैनाती मिली।
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आशा देवी के अनुसार वर्ष 1991 में तत्कालीन एसएसपी नैनीताल ने किसी गलती के चलते सुदर्शन सिंह को निलंबित कर दिया था। निलंबन के बाद वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगे। कुछ समय बाद वह अचानक लापता हो गए। परिवार ने काफी तलाश की लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद वर्षों तक आशा देवी और उनकी इकलौती बेटी भी इस सदमे से जूझती रहीं। मायके पक्ष के लोगों ने उनका इलाज कराया।
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अब मानसिक स्थिति ठीक होने के बाद आशा देवी ने पति की नौकरी से जुड़े हक की तलाश शुरू की है। उन्होंने बताया कि परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा है और बेटी की शादी समेत कई जिम्मेदारियां सामने हैं। ऐसे में यदि सुदर्शन सिंह की सेवा से संबंधित कोई लाभ शेष है तो वह उन्हें दिलाया जाए।
रिकॉर्ड तलाशने में जुटा पुलिस मुख्यालय
आशा देवी के पास पति का सर्विस नंबर, पीपीओ नंबर या नौकरी से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं है। इसके बावजूद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सुदर्शन सिंह की सेवा से जुड़े रिकॉर्ड की तलाश शुरू कर दी है। इधर आशा का कहना है कि 35 साल से पति का कोई पता नहीं चला। अब उम्मीद है कि उनकी नौकरी से जुड़े किसी हक के सहारे बेटी का भविष्य संवर सके।