{"_id":"da883a7b2cf5eb5a85e5f84aa81f3867","slug":"bawankhedi-kand-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शबनम- सलीम के डेथ वारंट निरस्त","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
शबनम- सलीम के डेथ वारंट निरस्त
ब्यूरो/ अमर उजाला मुरादाबाद
Updated Thu, 28 May 2015 06:09 PM IST
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश के अमरोहा के बावनखेड़ी नरसंहार में दोषी ठहराई गई शबनम और उसके प्रेमी सलीम के खिलाफ जारी डेथ वारंट को सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि दोषियों के पास अब भी कानूनी विकल्प मौजूद हैं। शबनम ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर 10 वर्र्षीय बच्ची समेत अपने परिवार के सात सदस्यों की हत्या कर दी थी।
गत 15 मई को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी फांसी की सजा पर मुहर लगा दी थी, जिसके बाद निचली अदालत ने दोनों के खिलाफ डेथ वारंट जारी कर दिया था।न्यायमूर्ति एके सिकरी और न्यायमूर्ति यूयू ललित की अवकाशकालीन पीठ ने अमरोहा की अदालत द्वारा जारी डेथ वारंट को दोषपूर्ण बताया। पीठ ने कहा कि डेथ वारंट में सुप्रीम कोर्ट द्वारा फांसी देने संबंधी दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया गया है।
दोनों दोषियों के पास पुनर्विचार और सुधारात्मक याचिका दायर करने सहित और भी कानूनी विकल्प मौजूद हैं। लिहाजा उन्हें इन विकल्पों का इस्तेमाल करने का मौका मिलना चाहिए। साथ ही पीठ ने यह भी कहा कि डेथ वांरट में फांसी देने की तिथि और समय का जिक्र नहीं है, जो इलाहाबाद हाईकोर्ट के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है। शीर्ष अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को दिशानिर्देशों का पालन करने को कहा है। साथ ही अदालत ने सरकार से कहा कि दोनों का कानूनी विकल्पों का उपयोग करने में सहायता मुहैया कराई जाए। दोनों के पास पुनर्विचार याचिका व सुधारात्मक याचिका दायर करने के अलावा राष्ट्रपति के पास दया याचिका दाखिल करने का भी विकल्प मौजूद है।
विज्ञापन
विज्ञापन
गत 15 मई को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी फांसी की सजा पर मुहर लगा दी थी, जिसके बाद निचली अदालत ने दोनों के खिलाफ डेथ वारंट जारी कर दिया था।न्यायमूर्ति एके सिकरी और न्यायमूर्ति यूयू ललित की अवकाशकालीन पीठ ने अमरोहा की अदालत द्वारा जारी डेथ वारंट को दोषपूर्ण बताया। पीठ ने कहा कि डेथ वारंट में सुप्रीम कोर्ट द्वारा फांसी देने संबंधी दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया गया है।
विज्ञापन
दोनों दोषियों के पास पुनर्विचार और सुधारात्मक याचिका दायर करने सहित और भी कानूनी विकल्प मौजूद हैं। लिहाजा उन्हें इन विकल्पों का इस्तेमाल करने का मौका मिलना चाहिए। साथ ही पीठ ने यह भी कहा कि डेथ वांरट में फांसी देने की तिथि और समय का जिक्र नहीं है, जो इलाहाबाद हाईकोर्ट के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है। शीर्ष अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को दिशानिर्देशों का पालन करने को कहा है। साथ ही अदालत ने सरकार से कहा कि दोनों का कानूनी विकल्पों का उपयोग करने में सहायता मुहैया कराई जाए। दोनों के पास पुनर्विचार याचिका व सुधारात्मक याचिका दायर करने के अलावा राष्ट्रपति के पास दया याचिका दाखिल करने का भी विकल्प मौजूद है।
विज्ञापन