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हादसे में कांवड़िए की मौत पर बवाल, पीआरवी समेत पांच वाहन तोड़े
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कांठ (मुरादाबाद)।
छजलैट थानाक्षेत्र में रविवार सुबह ही एक ट्रक ने कावंडिए को कुचल दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। दो अन्य कांवड़िए जख्मी हो गए। हादसे से नाराज कांवड़ियों ने बिजनौर-मुरादाबाद मार्ग पर जाम लगाया। दो घंटे तक जमकर बवाल किया। एक पीआरवी, रोडवेज बस और वहां से जा रहे एक ट्रक सहित पांच वाहनों में जमकर तोड़फोड़ की। बवाल बढ़ता देख प्रशासनिक अधिकारी और एसपी देहात उदय शंकर सिंह ने मौके पर जाकर कांवड़ियों को समझा बुझाकर शांत किया। कांवड़िए के शव को पोस्टमार्टम के बाद परिवार के सुपुर्द किया गया है। जख्मी कांवड़ियों का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।
मझोला के पुराना मझरा निवासी मदन सिंह (38) साथियों के साथ कांवड़ लेने हरिद्वार गया था। वहां से वह तीन अन्य साथियों के साथ पैदल ही कांवड़ लेकर आ रहा था। शुक्रवार सुबह साढे़ छह बजे वह कांठ मार्ग पर छजलैट थानाक्षेत्र के रजपुरा के पास पहुंचा तो बिजनौर की ओर से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने मदन सिंह को टक्कर मार दी, उसके दो साथी दारा सिंह और सोनू शर्मा जख्मी हो गए। दोनाें को एंबुलेंस की मदद से साथी कांवड़ियों ने अस्पताल पहुंचाया। इस दौरान ही वहां से जा रहे कांवड़ियों के जत्थे ने हादसे के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए रोड पर जाम लगा दिया। धीरे धीरे कांवडियों के जत्थे वहां पर एकजुट हो गए। सूचना पर पुलिस मौके पर एक घंटे तक भी नहीं पहुंची। जिसकी वजह से गुस्से में आए कांवड़ियों ने वाहनों में तोड़फोड़ शुरू कर दी गई। एक रोडवेज बस, ट्रक सहित चार वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया। इस दौरान पहुंची पीआरवी में भी पत्थर मारकर क्षतिग्रस्त कर दिया। स्थानीय लोगों ने बताया कि हादसे की सूचना पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी समय पर नहीं पहुंचे। इसकी वजह से वाहनाें में हुई तोड़फोड़ को बचाया नहीं जा सका है। दो घंटे बाद पहुंचे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने कांवड़ियों को समझाया तब हंगामा शांत हुआ। सुबह साढे़ आठ बजे जाम खुलवाया जा सका। हादसे की सूचना पर मदन सिंह के घर पर भी कोहराम मच गया है। परिवार में वह इकलौता कमाने वाला था। पिता की मौत हो चुकी है। घर में मां परमेश्वरी देवी, पत्नी बबीता और तीन बच्चे हैं। एसपी देहात उदय शंकर सिंह ने बताया कि कांवड़िये मदन सिंह को टक्कर मारने वाला ट्रक मौके से भाग गया है, उसकी तलाश की जा रही है।
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काश पहले चेत जाता पुलिस प्रशासन तो शायद न जाती कांवड़िये की जान
कांठ। प्रतिबंध और रूट डायवर्ट किए जाने के बाद भी बिजनौर - हरिद्वार मार्ग पर भारी वाहन खूब दौड़ रहे थे। बिजनौर की ओर से आने वाले भारी वाहनों को अगवानपुर के पाकबड़ा बाइपास से होकर निकाला जा रहा था। बिजनौर से वाया छजलैट होकर अगवानपुर तक भारी वाहन लगातार चल रहे थे। इसी का परिणाम सामने आया कि एक कांवड़िये की जान चली गई। बिजनौर की ओर से भी हर साल बड़ी तादाद में कांवड़िये जल लेकर लौटते हैं। लेकिन एक जान जाने के बाद पुलिस और प्रशासन चेता। रविवार को इस मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही को रोका गया। काश इसे पहले ही रोका जाता तो शायद कांवड़िये की जान बच जाती।
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सवाल: ढाई किलोमीटर तक पहुंचने में पुलिस को लगा एक घंटा
कांठ। घटनास्थल से छजलैट थाने की दूरी महज ढाई किलोमीटर है। इसके बावजूद घटनास्थल पर पुलिस को पहुंचने में एक घंटे का समय लग गया। इसको लेकर भी स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि अगर पुलिस समय से पहुंच जाती तो कांवडियों को समझाकर रोका जा सकता था। कांवड़ियों के दूसरे जत्थों को पीछे ही रोक दिया जाता और वाहनों में हुई तोड़फोड़ को बचाया जा सकता था।
हंगामे के डर से घर पर तैनात रही पुलिस
कांठ। कांवड़िये की मौत की सूचना मझोला पुलिस को भी दी गई। एहतियातन एक दरोगा सहित चार पुलिसकर्मियों को कांवड़िए मदन के घर पर तैनात किया गया, जिससे की वहां पर हंगामा न हो सके। मदन की मौत और हादसे में दो कांवडियों के जख्मी होने की सूचना पर आसपास के लोग भी शोक में हैं।
हमला होेने पर पुलिसकर्मी जान बचाकर भागे
कांठ। कांवड़ियों ने जब पीआरवी पर हमला किया। पत्थरबाजी कर पीआरवी के शीशे तोडे़ तो पुलिसकर्मी वहां से जान बचाकर भागे। कांवड़ियों के हमले के बाद पुलिसकर्मियों ने वायरलेस पर सूचना दी। इसके बाद पुलिस बल वहां पर पहुंचा। कांवड़ियों को काबू में करने में पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी।
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छजलैट थानाक्षेत्र में रविवार सुबह ही एक ट्रक ने कावंडिए को कुचल दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। दो अन्य कांवड़िए जख्मी हो गए। हादसे से नाराज कांवड़ियों ने बिजनौर-मुरादाबाद मार्ग पर जाम लगाया। दो घंटे तक जमकर बवाल किया। एक पीआरवी, रोडवेज बस और वहां से जा रहे एक ट्रक सहित पांच वाहनों में जमकर तोड़फोड़ की। बवाल बढ़ता देख प्रशासनिक अधिकारी और एसपी देहात उदय शंकर सिंह ने मौके पर जाकर कांवड़ियों को समझा बुझाकर शांत किया। कांवड़िए के शव को पोस्टमार्टम के बाद परिवार के सुपुर्द किया गया है। जख्मी कांवड़ियों का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।
मझोला के पुराना मझरा निवासी मदन सिंह (38) साथियों के साथ कांवड़ लेने हरिद्वार गया था। वहां से वह तीन अन्य साथियों के साथ पैदल ही कांवड़ लेकर आ रहा था। शुक्रवार सुबह साढे़ छह बजे वह कांठ मार्ग पर छजलैट थानाक्षेत्र के रजपुरा के पास पहुंचा तो बिजनौर की ओर से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने मदन सिंह को टक्कर मार दी, उसके दो साथी दारा सिंह और सोनू शर्मा जख्मी हो गए। दोनाें को एंबुलेंस की मदद से साथी कांवड़ियों ने अस्पताल पहुंचाया। इस दौरान ही वहां से जा रहे कांवड़ियों के जत्थे ने हादसे के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए रोड पर जाम लगा दिया। धीरे धीरे कांवडियों के जत्थे वहां पर एकजुट हो गए। सूचना पर पुलिस मौके पर एक घंटे तक भी नहीं पहुंची। जिसकी वजह से गुस्से में आए कांवड़ियों ने वाहनों में तोड़फोड़ शुरू कर दी गई। एक रोडवेज बस, ट्रक सहित चार वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया। इस दौरान पहुंची पीआरवी में भी पत्थर मारकर क्षतिग्रस्त कर दिया। स्थानीय लोगों ने बताया कि हादसे की सूचना पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी समय पर नहीं पहुंचे। इसकी वजह से वाहनाें में हुई तोड़फोड़ को बचाया नहीं जा सका है। दो घंटे बाद पहुंचे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने कांवड़ियों को समझाया तब हंगामा शांत हुआ। सुबह साढे़ आठ बजे जाम खुलवाया जा सका। हादसे की सूचना पर मदन सिंह के घर पर भी कोहराम मच गया है। परिवार में वह इकलौता कमाने वाला था। पिता की मौत हो चुकी है। घर में मां परमेश्वरी देवी, पत्नी बबीता और तीन बच्चे हैं। एसपी देहात उदय शंकर सिंह ने बताया कि कांवड़िये मदन सिंह को टक्कर मारने वाला ट्रक मौके से भाग गया है, उसकी तलाश की जा रही है।
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काश पहले चेत जाता पुलिस प्रशासन तो शायद न जाती कांवड़िये की जान
कांठ। प्रतिबंध और रूट डायवर्ट किए जाने के बाद भी बिजनौर - हरिद्वार मार्ग पर भारी वाहन खूब दौड़ रहे थे। बिजनौर की ओर से आने वाले भारी वाहनों को अगवानपुर के पाकबड़ा बाइपास से होकर निकाला जा रहा था। बिजनौर से वाया छजलैट होकर अगवानपुर तक भारी वाहन लगातार चल रहे थे। इसी का परिणाम सामने आया कि एक कांवड़िये की जान चली गई। बिजनौर की ओर से भी हर साल बड़ी तादाद में कांवड़िये जल लेकर लौटते हैं। लेकिन एक जान जाने के बाद पुलिस और प्रशासन चेता। रविवार को इस मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही को रोका गया। काश इसे पहले ही रोका जाता तो शायद कांवड़िये की जान बच जाती।
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सवाल: ढाई किलोमीटर तक पहुंचने में पुलिस को लगा एक घंटा
कांठ। घटनास्थल से छजलैट थाने की दूरी महज ढाई किलोमीटर है। इसके बावजूद घटनास्थल पर पुलिस को पहुंचने में एक घंटे का समय लग गया। इसको लेकर भी स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि अगर पुलिस समय से पहुंच जाती तो कांवडियों को समझाकर रोका जा सकता था। कांवड़ियों के दूसरे जत्थों को पीछे ही रोक दिया जाता और वाहनों में हुई तोड़फोड़ को बचाया जा सकता था।
हंगामे के डर से घर पर तैनात रही पुलिस
कांठ। कांवड़िये की मौत की सूचना मझोला पुलिस को भी दी गई। एहतियातन एक दरोगा सहित चार पुलिसकर्मियों को कांवड़िए मदन के घर पर तैनात किया गया, जिससे की वहां पर हंगामा न हो सके। मदन की मौत और हादसे में दो कांवडियों के जख्मी होने की सूचना पर आसपास के लोग भी शोक में हैं।
हमला होेने पर पुलिसकर्मी जान बचाकर भागे
कांठ। कांवड़ियों ने जब पीआरवी पर हमला किया। पत्थरबाजी कर पीआरवी के शीशे तोडे़ तो पुलिसकर्मी वहां से जान बचाकर भागे। कांवड़ियों के हमले के बाद पुलिसकर्मियों ने वायरलेस पर सूचना दी। इसके बाद पुलिस बल वहां पर पहुंचा। कांवड़ियों को काबू में करने में पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी।