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कांट्रेक्टर से मांगी एक करोड़ रुपये की रंगदारी
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मुरादाबाद। मझोला थानाक्षेत्र में रहने वाले एक ठेकेदार और उसके भाई को फोन कर एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई है। आरोपी एक प्रापर्टी डीलर और उसके साथी हैं। इनमें एक युवती और अधिवक्ता भी शामिल है। रकम न मिलने पर फर्जी मुकदमे में जेल भिजवाने या हत्या कराने की धमकी भी दी गई। डीआईजी के निर्देश पर सीओ सिविल लाइन की जांच में आरोप सही पाए जाने पर आरोपियों के खिलाफ शनिवार को सिविल लाइन थाने में नामजद एफआईआर दर्ज की गई है।
मझोला के शिव विहार कालोनी में रहने वाले अशोक कुमार सिंह ने बताया कि वह पीडब्ल्यूडी, नगर निगम सहित अन्य सरकारी विभागों से ठेके लेता है। पहले उसने भाई अनिल (सरकारी अध्यापक) के साथ मिलकर डिप्टीगंज निवासी विक्रम सिंह के साथ प्रापर्टी डीलिंग का काम किया था। अशोक कुमार का आरोप है कि विक्रम ने लोगों के साथ धोखाधड़ी की। इसके बाद दोनों भाइयों ने उसके काम करना बंद कर दिया। इसी वजह से विक्रम रंजिश रखने लगा। आरोप है कि उसने पहले तो न्यायालय में अशोक और उसके भाई के खिलाफ 2016 में न्यायालय में एक वाद दायर किया, जिसमें उन्हें जमानत मिल गई। इसके बाद छह फरवरी 2019 को एक युवती सोनम के जरिए न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिलवाया गया, जिसमें संगीन आरोप लगाए गए। जब न्यायालय ने इस संबंध में नागफनी पुलिस से आख्या मांगी तो पुलिस ने आरोपों की पुष्टि न होना बताया। जिस वजह से रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई।
अशोक का आरोप है कि रकम ऐंठने के उद्देश्य से उसके और भाई के खिलाफ झूठा मुकदमा लिखाने की कोशिश की गई। फोन कर एक करोड़ रुपये की रंगदारी भी मांगी गई। इस मामले में विक्रम चौधरी, सोनम, अधिवक्ता अनुज विश्नोई के अलावा विवेक और साकिब निवासी नागफनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। डीआईजी जे रविंद्र गौड़ ने कहा कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
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मझोला के शिव विहार कालोनी में रहने वाले अशोक कुमार सिंह ने बताया कि वह पीडब्ल्यूडी, नगर निगम सहित अन्य सरकारी विभागों से ठेके लेता है। पहले उसने भाई अनिल (सरकारी अध्यापक) के साथ मिलकर डिप्टीगंज निवासी विक्रम सिंह के साथ प्रापर्टी डीलिंग का काम किया था। अशोक कुमार का आरोप है कि विक्रम ने लोगों के साथ धोखाधड़ी की। इसके बाद दोनों भाइयों ने उसके काम करना बंद कर दिया। इसी वजह से विक्रम रंजिश रखने लगा। आरोप है कि उसने पहले तो न्यायालय में अशोक और उसके भाई के खिलाफ 2016 में न्यायालय में एक वाद दायर किया, जिसमें उन्हें जमानत मिल गई। इसके बाद छह फरवरी 2019 को एक युवती सोनम के जरिए न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिलवाया गया, जिसमें संगीन आरोप लगाए गए। जब न्यायालय ने इस संबंध में नागफनी पुलिस से आख्या मांगी तो पुलिस ने आरोपों की पुष्टि न होना बताया। जिस वजह से रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई।
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अशोक का आरोप है कि रकम ऐंठने के उद्देश्य से उसके और भाई के खिलाफ झूठा मुकदमा लिखाने की कोशिश की गई। फोन कर एक करोड़ रुपये की रंगदारी भी मांगी गई। इस मामले में विक्रम चौधरी, सोनम, अधिवक्ता अनुज विश्नोई के अलावा विवेक और साकिब निवासी नागफनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। डीआईजी जे रविंद्र गौड़ ने कहा कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
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