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चूल्हा हटा पर सीओपीडी नहीं, धूम्रपान व प्रदूषण बने कारण
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चूल्हा हटा पर सीओपीडी नहीं, धूम्रपान व प्रदूषण बने कारण
मुरादाबाद। शहर से लेकर गांवाें तक अब बेशक चूल्हे पर खाना पकाना लगभग बंद हो गया है। घरों में गैस कनेक्शन हो गए हैं, लेकिन सीओपीडी की समस्या लगातार बनी हुई है। अब प्रदूषण और धूम्रपान इसके बड़े कारण के रूप में सामने आए हैं। जिला अस्पताल में सीओपीडी के औसतन छह मरीज रोज आ रहे हैं। कई गंभीर मामलों में मरीजों को मेरठ और दिल्ली रेफर किया जा रहा है।
शहर के वरिष्ठ चेस्ट फिजीशियन के मुताबिक धूम्रपान के कारण बड़े और प्रदूषण के कारण बच्चे इसकी चपेट में आ रहे हैं। इसका निवारण संभव नहीं है, लेकिन दवाओं से राहत पाई जा सकती है। इसमें बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। हालत ज्यादा बिगड़ने पर मरीज को बचाना मुश्किल हो जाता है। इसमें केवल इनहेलर थैरेपी को कामयाब बताया गया है।
क्या है सीओपीडी रोग
क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज फेफड़ों का ऐसा रोग है, जिसमें मरीज सामान्य रूप से सांस नहीं ले पाता। फेफड़े बहुत स्पॉन्जी होते हैं। जब हम सांस के जरिये हवा अंदर लेते हैं तो ऑक्सीजन हमारे खून के अंदर मिल जाती है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर चली जाती है, लेकिन सीओपीडी रोग इस प्रक्रिया को रोकता है। सीओपीडी के मरीज को सांस लेने में परेशानी होती है और ऑक्सीजन उसके शरीर में पूरी मात्रा में नहीं पहुंच पाती है। डॉक्टरों के मुताबिक सामान्य व्यक्ति एक मिनट में 13 से 16 बार सांस लेता है। जबकि सीओपीडी रोगी का श्वसन मार्ग अवरुद्ध होने के कारण एक मिनट में 30 बार तक सांस लेनी पड़ती है।
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नवजात भी हो रहे शिकार
प्रदूषण की वजह से हर व्यक्ति यहां तक कि नवजात शिशु भी आज एक से लेकर तीन सिगरेट पीने के बराबर प्रदूषण ग्रहण कर रहा है। जो उसके जीवन के लिए आगे चलकर खतरा बनता है। उन्होंने कहा कि पहले के दौर में इस बीमारी की चपेट में अमूमन वे लोग आते थे जो सिगरेट पीते थे और जिनकी उम्र 40 से 45 वर्ष से ऊपर है। लेकिन, वर्तमान में यह बीमारी 18 और 20 वर्ष की उम्र के बाद से भी देखी जा रही है। मुरादाबाद में ऐसे कई मामले सामने आए हैं।
लक्षण
- सांस लेने में बेहद परेशानी होना
- कफ, खांसी, जुकाम, सीने में जकड़न
- वजन कम होना
- ह्दय संबंधी समस्याएं
- फेफड़ों का कैंसर
जिला अस्पताल में सीओपीडी के मरीजों के आंकड़ें
महीना मरीजों की संख्या
जुलाई 144
अगस्त 159
सितंबर 147
अक्तूबर 178
नवंबर (अब तक) 121
प्रदूषण हमारे बस में नहीं है, लेकिन इससे बचने के लिए धूम्रपान को त्यागना चाहिए। एक व्यक्ति के धूम्रपान के कारण परिवार भी खतरे में आ सकता है। बीमारी को दमा न समझें, यह उससे कई गुना घातक है। लक्षण दिखने पर फौरन डॉक्टर की सलाह लें और इनहेलर का प्रयोग करें। इस बीमारी में सिर्फ यही कारगर थैरेपी है।
- डॉ. प्रवीण शाह, चेस्ट फिजीशियन जिला अस्पताल
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मुरादाबाद। शहर से लेकर गांवाें तक अब बेशक चूल्हे पर खाना पकाना लगभग बंद हो गया है। घरों में गैस कनेक्शन हो गए हैं, लेकिन सीओपीडी की समस्या लगातार बनी हुई है। अब प्रदूषण और धूम्रपान इसके बड़े कारण के रूप में सामने आए हैं। जिला अस्पताल में सीओपीडी के औसतन छह मरीज रोज आ रहे हैं। कई गंभीर मामलों में मरीजों को मेरठ और दिल्ली रेफर किया जा रहा है।
शहर के वरिष्ठ चेस्ट फिजीशियन के मुताबिक धूम्रपान के कारण बड़े और प्रदूषण के कारण बच्चे इसकी चपेट में आ रहे हैं। इसका निवारण संभव नहीं है, लेकिन दवाओं से राहत पाई जा सकती है। इसमें बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। हालत ज्यादा बिगड़ने पर मरीज को बचाना मुश्किल हो जाता है। इसमें केवल इनहेलर थैरेपी को कामयाब बताया गया है।
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क्या है सीओपीडी रोग
क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज फेफड़ों का ऐसा रोग है, जिसमें मरीज सामान्य रूप से सांस नहीं ले पाता। फेफड़े बहुत स्पॉन्जी होते हैं। जब हम सांस के जरिये हवा अंदर लेते हैं तो ऑक्सीजन हमारे खून के अंदर मिल जाती है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर चली जाती है, लेकिन सीओपीडी रोग इस प्रक्रिया को रोकता है। सीओपीडी के मरीज को सांस लेने में परेशानी होती है और ऑक्सीजन उसके शरीर में पूरी मात्रा में नहीं पहुंच पाती है। डॉक्टरों के मुताबिक सामान्य व्यक्ति एक मिनट में 13 से 16 बार सांस लेता है। जबकि सीओपीडी रोगी का श्वसन मार्ग अवरुद्ध होने के कारण एक मिनट में 30 बार तक सांस लेनी पड़ती है।
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नवजात भी हो रहे शिकार
प्रदूषण की वजह से हर व्यक्ति यहां तक कि नवजात शिशु भी आज एक से लेकर तीन सिगरेट पीने के बराबर प्रदूषण ग्रहण कर रहा है। जो उसके जीवन के लिए आगे चलकर खतरा बनता है। उन्होंने कहा कि पहले के दौर में इस बीमारी की चपेट में अमूमन वे लोग आते थे जो सिगरेट पीते थे और जिनकी उम्र 40 से 45 वर्ष से ऊपर है। लेकिन, वर्तमान में यह बीमारी 18 और 20 वर्ष की उम्र के बाद से भी देखी जा रही है। मुरादाबाद में ऐसे कई मामले सामने आए हैं।
लक्षण
- सांस लेने में बेहद परेशानी होना
- कफ, खांसी, जुकाम, सीने में जकड़न
- वजन कम होना
- ह्दय संबंधी समस्याएं
- फेफड़ों का कैंसर
जिला अस्पताल में सीओपीडी के मरीजों के आंकड़ें
महीना मरीजों की संख्या
जुलाई 144
अगस्त 159
सितंबर 147
अक्तूबर 178
नवंबर (अब तक) 121
प्रदूषण हमारे बस में नहीं है, लेकिन इससे बचने के लिए धूम्रपान को त्यागना चाहिए। एक व्यक्ति के धूम्रपान के कारण परिवार भी खतरे में आ सकता है। बीमारी को दमा न समझें, यह उससे कई गुना घातक है। लक्षण दिखने पर फौरन डॉक्टर की सलाह लें और इनहेलर का प्रयोग करें। इस बीमारी में सिर्फ यही कारगर थैरेपी है।
- डॉ. प्रवीण शाह, चेस्ट फिजीशियन जिला अस्पताल