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Moradabad News: इंटर पास ने हरियाणा के कॉलेज से खरीदी आयुष-यूनानी चिकित्सक की डिग्री

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 25 Aug 2026 02:39 AM IST
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Class 12 graduate bought an Ayush-Unani medical degree from a Haryana college.
मुरादाबाद। फर्जी डिग्री के सहारे आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धति में पंजीकरण कराने वाला पाकबड़ा निवासी तनवीर अहमद इंटर पास है। इसके बावजूद उसके पास आयुर्वेद-यूनानी चिकित्सा की डिग्री थी। उसने वर्ष 2022-23 में हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित श्रीकृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल से यह डिग्री फर्जी तरीके से हासिल की थी।
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क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. अमरदीप नायक की जांच में डिग्री फर्जी होने की जानकारी सामने आई। तनवीर ने इसी डिग्री और दस्तावेजों के आधार पर भारतीय चिकित्सा परिषद में भी पंजीकरण करा लिया था। हालांकि मुरादाबाद में उसका पंजीकरण नहीं है। लखनऊ स्तर पर फर्जी डिग्रियों की जांच शुरू होने की जानकारी सामने आने के बाद तनवीर ने वर्ष 2025 में अपनी डिग्री कॉलेज को वापस कर दी। फिलहाल वह पाकबड़ा क्षेत्र के एक गांव में खेती-बाड़ी कर रहा है। सोमवार शाम क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी के कार्यालय में तनवीर को बुलाया गया। अधिकारी ने उससे शपथ पत्र लिखवाया। इस दौरान वह शपथ पत्र भी ठीक से नहीं लिख पाया। इसके बाद उसके बयान और दस्तावेजों की जानकारी जुटाई गई। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. अमरदीप नायक ने बताया कि तनवीर के मामले में जांच-पड़ताल के बाद पूरी सूचना लखनऊ भेज दी गई है। आगे की जांच और कार्रवाई लखनऊ स्तर से ही होनी है। मुरादाबाद में तनवीर का पंजीकरण नहीं है।
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रजिस्ट्रेशन पर उठे सवाल
फर्जी डिग्री के सहारे पंजीकरण होने से आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा में चिकित्सकों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। किसी व्यक्ति के चिकित्सक के रूप में पंजीकरण के लिए मान्य चिकित्सा योग्यता जरूरी होती है। इसके लिए डिग्री और संबंधित शैक्षिक दस्तावेज जमा किए जाते हैं। नियमों के मुताबिक डिग्री मान्यता प्राप्त संस्थान से होनी चाहिए। दस्तावेजों के आधार पर पात्रता की जांच के बाद ही पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी होती है। ऐसे में तनवीर की डिग्री फर्जी होने के बावजूद पंजीकरण कैसे हो गया, यह भी जांच का हिस्सा है। अब जांच में डिग्री जारी होने से लेकर पंजीकरण तक के पूरे रिकॉर्ड की पड़ताल की जाएगी। इसमें डिग्री के दस्तावेज, कॉलेज के रिकॉर्ड और पंजीकरण के दौरान जमा किए गए कागजात की जांच शामिल होगी। 41 लोगों की सूची सामने आने के बाद यह भी देखा जा रहा है कि फर्जी डिग्रियों के आधार पर पंजीकरण कराने में कहीं एक जैसी प्रक्रिया तो नहीं अपनाई गई।
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