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सिविल डिफेंस की लापरवाही ने अंधेरे में धकेलीं जिंदगी

Sat, 15 Oct 2016 02:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद Updated Sat, 15 Oct 2016 02:07 AM IST
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civil defence irresponsibility will waste his life
हादसे के बाद टीचर श्रद्धा शर्मा चल नहीं पा रही हैं। - फोटो : अमर उजाला

महिला टीचर से लगवा दी थी मौत की छलांग

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आरआरके पब्लिक स्कूल में सिविल डिफेंस की ओर से पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया था। इसमें पांच दिन तक आपात स्थिति से निपटने के लिए छात्र छात्राओं के अलावा शिक्षिकाओं को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान सुरक्षा मानकों की पूरी तरह से अनदेखी की गई थी।

प्रशिक्षण के अंतिम दिन छत से घायलों को नीचे उतारने की माक ड्रिल कराई गई। तीसरी मंजिल से घायलों को नीचे उतारने के लिए पट्टी लगाई गई। इस दौरान आरआरके की शिक्षिका श्रद्धा शर्मा को नीचे उतारने के दौरान तीसरी मंजिल से ही नीचे गिर गईं।
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तीसरी मंजिल से वह बाएं पैर के बल गिरने से पैर की हड्डी कई जगह से टूट गई। इसके अलावा सिर में भी गंभीर चोट आई। चार दिन जिंदगी और मौत से जूझने के बाद उनकी जान तो बच गई, लेकिन अभी तक अपने पैरों पर चल नहीं पा रही हैं।
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घटना के चार महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी वे बिस्तर पर ही हैं। रोजाना फीजियोथैरिपिस्ट उनकी थैरिपी करते हैं। लेकिन उन्हें पूरी तरह से ठीक होने में चार महीने का समय लग जाएगा। श्रद्धा शर्मा उस दिन की घटना को सोचकर सिहर उठती हैं।

कहती हैं कि उस घटना को भी नहीं भूल सकती। सिविल डिफेंस वालों की लापरवाही और अति आत्मविश्वास ने उनकी जान ले ही ली थी। जो हादसा उसे सोचकर रातों को नींद नहीं आती। ईश्वर की कृपा से उनकी जान बच गई।

लेकिन अभी तक बिस्तर से उठना मुश्किल है। बाथरूम जाने के लिए भी सहारे की जरूरत पड़ती है। पता नहीं चलने फिरने में कितना समय और लगेगा। दूसरों की लापरवाही की सजा मैं और मेरा परिवार भुगत रहा है।

धर्मेंद्र की मौत पर सुबक रहा पूरा परिवार

लाइनपार रामलीला मैदान में रावण के पुतले के नीचे दब कर मरे सिविल डिफेंस कर्मी धर्मेंद्र का परिवार घटना के तीन दिन बाद भी सुबक रहा है। धर्मेंद्र की याद में भाई, पिता का रो रोकर बुरा हाल है तो पत्नी बेसुध सी हो गई है।

परिजन एक दूसरे को दिलासा तो दे रहे हैं। लेकिन खुद अपने आंसू नहीं रोक पा रहे। शुक्रवार को धर्मेंद्र के तीजे की रस्म अदा गई। जिसमें परिजन,उनके परिजन और रिश्तेदार जुटे।मुगलपुरा के गुड़िया मोहल्ला निवासी मुन्ना लाल दिवाकर के चार बेटों में तीसरे नंबर का बेटा धर्मेंद्र दिवाकर अताई मोहल्ले में कपड़ों पर प्रेस करता था।

जबकि वह सिविल डिफेंस में भी था। मंगलवार की रात उसकी ड्यूटी लाइनपार रामलीला मैदान में लगी थी। जलता हुआ रावण का पुतला पब्लिक के ऊपर गिर गया था। जिसमें धर्मेंद्र की मौत हो गई थी। सिविल डिफेंस, रामलीला कमेटी, पुलिस और जन प्रतिनिधियों ने परिवार को आर्थिक मदद को कर दी।

लेकिन हादसे से परिवार को जो जख्म दिया है। उसे भर पाना मुश्किल है। घर में पिता मुन्ना लाल दिवाकर, मां शीला, भाई कमल, सूरज, पवन और पत्नी प्रीति का रो रोकर  बुरा हाल है।


जबकि मासूम बेटी चिंकी की नजरें भी बार बार अपने पिता को खोज रही हैं। शुक्रवार को परिजनों के तीजे की रस्म अदा गई। जिसमें परिचित, रिश्तेदार भी जुटे। पिता मुन्ना लाल ने बताया कि अभी उन्हें  प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली है। 
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