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नहाय खाय के साथ शुरू हुआ महापर्व छठ
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बुद्वि विहार में छठ पूजा पर नहाय खाय कर पूजा करती महिलाएं।
- फोटो : CITY
मुरादाबाद। दीपावली और भाईदूज के बाद शहर में महापर्व छठ की धूम है। शहर में कई स्थानों पर छठ पर्व मनाया जा रहा है। बुधवार को नहाय खाय के साथ महापर्व की शुरुआत हुई। महिलाओं ने विधि विधान से प्रसाद तैयार किया और छठी मैया का पूजन किया। घाटों पर कोरोना संक्रमण से बचने के लिए एहतियात बरती जाएंगी।
बुधवार को चार दिवसीय महापर्व छठ के पहले दिन व्रती महिलाओं ने स्नान कर नए कपड़े धारण किए। विधि विधान से पूजा के बाद चला दाल, कद्दू की सब्जी और चावल को प्रसाद के तौर पर ग्रहण किया। व्रती के भोजन करने के बाद परिवार के बाकी सदस्यों ने भोजन किया। नहाय खाय में व्रती महिलाओं ने छठ पूजा के गीत कांच ही बंास के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए, करेली छठ बरतिया से उनखे लागी आदि गाए। समिति के पदाधिकारियों द्वारा घाटों पर पूजन के लिए आने वाली महिलाओं को सैनिटाइजेशन करने और उनके तापमान की जांच करने बाद प्रवेश दिया जाएगा।
नगर निगम की ओर से भी होगा सैनिटाइजेशन
बुधवार को घाटों पर रंगाई-पुताई का कार्य किया गया। पूर्वांचल लोक सेवा संस्था के अध्यक्ष परमजीत सिंह ने बताया कि गुरुवार को नगर निगम की ओर से पार्क में साफ-सफाई कराई जाएगी। इसके साथ ही परिसर को सैनिटाइज भी किया जाएगा। पूर्वांचल जन कल्याण संस्था के सचिव अशोक कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि कोरोना संक्रमण की वजह से सामूहिक रामगंगा किनारे विधि विधान से मानते थे। इस बार जिला प्रशासन को पत्र लिखकर दे दिया है कि प्रशासन से कोई सहयोग नहीं लिया जाएगा। सभी श्रद्धालु अपने घर पर परात या टब में गंगाजल डालकर उसी पानी में खड़े होकर अर्घ्य देंगे।
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चार दिवसीय व्रत की सबसे कठिन और महत्वपूर्ण रात्रि कार्तिक शुक्ल की षष्ठी होती है। षष्ठी को यह व्रत मनाए जाने के कारण ही इसका नामकरण छठ व्रत पड़ा। मैंने नए वस्त्र पहनने के बाद पूरा शृंगार किया और विधि विधान से छठी मैया की पूजा की है।
शालू सिंह, बुद्धि विहार।
कोरोना संक्रमण की वजह से इस बार घाट पर भीड़ कम है। मास्क लगाकर पूजा के लिए जाएंगे। 20 नवंबर की शाम को छठी मैया को अर्घ्य देने के लिए पानी में उतरेंगे। बांस की टोकरी जिसे दौरा कहते हैं, उसे प्रसाद से भरेंगे। छठी मैया से यही प्रार्थना है कि यह कोरोना काल जल्दी खत्म हो जाए।
कंचन सिंह, विकास नगर।
इसकी शुरुआत सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण ने की थी। वह भगवान सूर्य के परम भक्त थे और रोज घंटों कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे। इस व्रत में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है। 11 वर्ष से छठ पूजन कर रही हूं। मेरी सास ने मुझे पूजन की परंपरा सौंपी थी।
बेबी सिंह, बुद्धि विहार।
दीपावली की खरीदारी के साथ ही छठ पूजा की खरीदारी कर ली थी। पांच वर्ष से छठ पूजन का व्रत कर रही हूं। यह व्रत पीढ़ी दर पीढ़ी सास अपनी बहू को देती है। मुझे भी मेरी सास ने बिहार (वैशाली जनपद) बुलाकर यह परंपरा सौंपी थी।
पिंकू देवी, मिलन विहार।
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बुधवार को चार दिवसीय महापर्व छठ के पहले दिन व्रती महिलाओं ने स्नान कर नए कपड़े धारण किए। विधि विधान से पूजा के बाद चला दाल, कद्दू की सब्जी और चावल को प्रसाद के तौर पर ग्रहण किया। व्रती के भोजन करने के बाद परिवार के बाकी सदस्यों ने भोजन किया। नहाय खाय में व्रती महिलाओं ने छठ पूजा के गीत कांच ही बंास के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए, करेली छठ बरतिया से उनखे लागी आदि गाए। समिति के पदाधिकारियों द्वारा घाटों पर पूजन के लिए आने वाली महिलाओं को सैनिटाइजेशन करने और उनके तापमान की जांच करने बाद प्रवेश दिया जाएगा।
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नगर निगम की ओर से भी होगा सैनिटाइजेशन
बुधवार को घाटों पर रंगाई-पुताई का कार्य किया गया। पूर्वांचल लोक सेवा संस्था के अध्यक्ष परमजीत सिंह ने बताया कि गुरुवार को नगर निगम की ओर से पार्क में साफ-सफाई कराई जाएगी। इसके साथ ही परिसर को सैनिटाइज भी किया जाएगा। पूर्वांचल जन कल्याण संस्था के सचिव अशोक कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि कोरोना संक्रमण की वजह से सामूहिक रामगंगा किनारे विधि विधान से मानते थे। इस बार जिला प्रशासन को पत्र लिखकर दे दिया है कि प्रशासन से कोई सहयोग नहीं लिया जाएगा। सभी श्रद्धालु अपने घर पर परात या टब में गंगाजल डालकर उसी पानी में खड़े होकर अर्घ्य देंगे।
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चार दिवसीय व्रत की सबसे कठिन और महत्वपूर्ण रात्रि कार्तिक शुक्ल की षष्ठी होती है। षष्ठी को यह व्रत मनाए जाने के कारण ही इसका नामकरण छठ व्रत पड़ा। मैंने नए वस्त्र पहनने के बाद पूरा शृंगार किया और विधि विधान से छठी मैया की पूजा की है।
शालू सिंह, बुद्धि विहार।
कोरोना संक्रमण की वजह से इस बार घाट पर भीड़ कम है। मास्क लगाकर पूजा के लिए जाएंगे। 20 नवंबर की शाम को छठी मैया को अर्घ्य देने के लिए पानी में उतरेंगे। बांस की टोकरी जिसे दौरा कहते हैं, उसे प्रसाद से भरेंगे। छठी मैया से यही प्रार्थना है कि यह कोरोना काल जल्दी खत्म हो जाए।
कंचन सिंह, विकास नगर।
इसकी शुरुआत सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण ने की थी। वह भगवान सूर्य के परम भक्त थे और रोज घंटों कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे। इस व्रत में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है। 11 वर्ष से छठ पूजन कर रही हूं। मेरी सास ने मुझे पूजन की परंपरा सौंपी थी।
बेबी सिंह, बुद्धि विहार।
दीपावली की खरीदारी के साथ ही छठ पूजा की खरीदारी कर ली थी। पांच वर्ष से छठ पूजन का व्रत कर रही हूं। यह व्रत पीढ़ी दर पीढ़ी सास अपनी बहू को देती है। मुझे भी मेरी सास ने बिहार (वैशाली जनपद) बुलाकर यह परंपरा सौंपी थी।
पिंकू देवी, मिलन विहार।
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