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Moradabad News: फर्जी फर्म बनाकर जीएसटी चोरी करने वाले दो आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट
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मुरादाबाद। गरीब लोगों के नाम से फर्जी फर्म बनाकर जीएसटी चोरी और सरकार से आईटीसी इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने वाले आरोपी उत्तराखंड के जसपुर निवासी जिशान और वसीम के खिलाफ 1500 पेज की चार्जशीट दाखिल कर दी है। मामले की विवेचना एसआईटी ने की थी। चार्जशीट में 16 गवाह बनाए गए हैं।
राज्य कर विभाग खंड सात मुरादाबाद के राज्य कर अधिकारी प्रवीण कुमार ने 11 नवंबर 2025 को ठाकुरद्वारा थाने में उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले के जसपुर निवासी मोहम्मद शहजाद, अकील अहमद, शाने आलम, विनोद कुमार, इकरा अकील, शबाना खातून, जमशेद हसन, जावेद अली, अतुल कुमार, नाजिम, मोहम्मद सुहेल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें बताया कि मोहम्मद शहजाद के नाम से एक फर्म पंजीकृत की गई थी। ठाकुरद्वारा क्षेत्र में फर्म में पता दिया गया था। टीम ने मौके पर जाकर जांच की तो कोई फर्म नहीं मिली जबकि फर्म के नाम पर लकड़ी की खरीद-फरोख्त दिखाई गई थी। एसआईटी की विवेचना में सामने आया कि जिन लोगों के नाम पर फर्म खोली गई थी, उन्हें पता ही नहीं था। पूरे फर्जीवाड़े में उत्तराखंड के जसपुर निवासी जिशान और वसीम की भूमिका सामने आई।
एसआईटी ने जसपुर में दबिश दी तो पता चला कि दोनों बिजनौर जेल में बंद हैं। वहां भी इन्होंने फर्जी फर्म बनाकर जीएसटी चोरी और सरकार से आईटीसी लिया था। एसआईटी ने दोनों आरोपियों के खिलाफ कोर्ट से बी वारंट जारी कराया। पूछताछ में सामने आया कि उन्होंने गरीब, ई-रिक्शा चालक व मजदूरों से सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर दस्तावेज लिए और फिर इन दस्तावेज के जरिये फर्जी फर्म खोली थी। बिना खरीद-फरोख्त लकड़ी का कारोबार दिखाया और फर्जी बिल बनाकर जीएसटी चोरी की। साथ ही सरकार से आईटीसी भी लिया। एसपी देहात कुंवर आकाश सिंह ने बताया कि एसआईटी ने मामले में करीब 1500 पेज की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की है, जिसमें 16 गवाह बनाए हैं। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अब इस मामले में कोर्ट में सुनवाई होगी।
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राज्य कर विभाग खंड सात मुरादाबाद के राज्य कर अधिकारी प्रवीण कुमार ने 11 नवंबर 2025 को ठाकुरद्वारा थाने में उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले के जसपुर निवासी मोहम्मद शहजाद, अकील अहमद, शाने आलम, विनोद कुमार, इकरा अकील, शबाना खातून, जमशेद हसन, जावेद अली, अतुल कुमार, नाजिम, मोहम्मद सुहेल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें बताया कि मोहम्मद शहजाद के नाम से एक फर्म पंजीकृत की गई थी। ठाकुरद्वारा क्षेत्र में फर्म में पता दिया गया था। टीम ने मौके पर जाकर जांच की तो कोई फर्म नहीं मिली जबकि फर्म के नाम पर लकड़ी की खरीद-फरोख्त दिखाई गई थी। एसआईटी की विवेचना में सामने आया कि जिन लोगों के नाम पर फर्म खोली गई थी, उन्हें पता ही नहीं था। पूरे फर्जीवाड़े में उत्तराखंड के जसपुर निवासी जिशान और वसीम की भूमिका सामने आई।
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एसआईटी ने जसपुर में दबिश दी तो पता चला कि दोनों बिजनौर जेल में बंद हैं। वहां भी इन्होंने फर्जी फर्म बनाकर जीएसटी चोरी और सरकार से आईटीसी लिया था। एसआईटी ने दोनों आरोपियों के खिलाफ कोर्ट से बी वारंट जारी कराया। पूछताछ में सामने आया कि उन्होंने गरीब, ई-रिक्शा चालक व मजदूरों से सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर दस्तावेज लिए और फिर इन दस्तावेज के जरिये फर्जी फर्म खोली थी। बिना खरीद-फरोख्त लकड़ी का कारोबार दिखाया और फर्जी बिल बनाकर जीएसटी चोरी की। साथ ही सरकार से आईटीसी भी लिया। एसपी देहात कुंवर आकाश सिंह ने बताया कि एसआईटी ने मामले में करीब 1500 पेज की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की है, जिसमें 16 गवाह बनाए हैं। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अब इस मामले में कोर्ट में सुनवाई होगी।
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