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पति की निशानी लूट ले गए लुटेरे
मुरादाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 25 Feb 2018 02:23 AM IST
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चेन लूट
- फोटो : net image
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बेटों के साथ इलाज कराने मुरादाबाद आ रहीं जामिया मिल्लिया के लेक्चरर की मां की चेन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर लूट ली गई। म्यांमार बार्डर पर तैनाती के दौरान उनके पति ने उन्हें ये चेन तोहफे के रूप में दी थी। पति की चार साल पहले मौत हो चुकी है। पति की निशानी लुटने का उन्हें बेहद गम है।
दिल्ली के किशनगढ़ निवासी अजय प्रसाद जामिया मिल्लिया में लेक्चरर हैं। उनकी मां मीना प्रसाद का मुरादाबाद के एक हकीम से इलाज चल रहा है। शनिवार सुबह पौने छह बजे मीना अपने बेटे अजय प्रसाद और अभिषेक प्रसाद के साथ दल्ली से मुरादाबाद आने के लिए नई दिल्ली स्टेशन पर काठगोदाम शताब्दी एक्सप्रेस पकड़ने के लिए पहुंची। उनकी ट्रेन के एसी कोच सी-8 में सीट नंबर 70,71,72 थी। ट्रेन में सवार होने के दौरान पीछे से किसी ने झपट्टा मारा और चेन लूटकर फरार हो गया।
भीड़ का फायदा उठाते हुए लुटेरा भाग गया। मुरादाबाद पहुंचे पीड़ितों ने घटना की तहरीर जीआरपी को दी। निल क्राइम नंबर पर रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना नई दिल्ली जीआरपी को ट्रांसफर कर दी गई। अजय ने बताया कि उनके पिता दुर्गा प्रसाद सेना के इंजीनियरिंग विंग में तैनात थे। करीब बीस साल पहले दुर्गा प्रसाद नागालैंट से जुड़ी म्यांमार सीमा तैनात थे। तभी मीना प्रसाद उनसे मिलने के लिए वहां गई थीं और दुर्गा प्रसाद ने वहां की निशानी के तौर पर उन्हें यह चेन दिलाई थी। दुर्गा प्रसाद की चार साल पहले मौत हो गई। मीना एक निशानी के तौर पर चेन पहने हुए थीं। अब चेन लुट जाने से वह बेहद आहत हैं।
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दिल्ली के किशनगढ़ निवासी अजय प्रसाद जामिया मिल्लिया में लेक्चरर हैं। उनकी मां मीना प्रसाद का मुरादाबाद के एक हकीम से इलाज चल रहा है। शनिवार सुबह पौने छह बजे मीना अपने बेटे अजय प्रसाद और अभिषेक प्रसाद के साथ दल्ली से मुरादाबाद आने के लिए नई दिल्ली स्टेशन पर काठगोदाम शताब्दी एक्सप्रेस पकड़ने के लिए पहुंची। उनकी ट्रेन के एसी कोच सी-8 में सीट नंबर 70,71,72 थी। ट्रेन में सवार होने के दौरान पीछे से किसी ने झपट्टा मारा और चेन लूटकर फरार हो गया।
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भीड़ का फायदा उठाते हुए लुटेरा भाग गया। मुरादाबाद पहुंचे पीड़ितों ने घटना की तहरीर जीआरपी को दी। निल क्राइम नंबर पर रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना नई दिल्ली जीआरपी को ट्रांसफर कर दी गई। अजय ने बताया कि उनके पिता दुर्गा प्रसाद सेना के इंजीनियरिंग विंग में तैनात थे। करीब बीस साल पहले दुर्गा प्रसाद नागालैंट से जुड़ी म्यांमार सीमा तैनात थे। तभी मीना प्रसाद उनसे मिलने के लिए वहां गई थीं और दुर्गा प्रसाद ने वहां की निशानी के तौर पर उन्हें यह चेन दिलाई थी। दुर्गा प्रसाद की चार साल पहले मौत हो गई। मीना एक निशानी के तौर पर चेन पहने हुए थीं। अब चेन लुट जाने से वह बेहद आहत हैं।
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