{"_id":"58277e054f1c1bc932b3b770","slug":"cash-deposite-and-alert-in-it","type":"story","status":"publish","title_hn":"इधर कैश जमा उधर आईटी अलर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इधर कैश जमा उधर आईटी अलर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Sun, 13 Nov 2016 02:34 AM IST
विज्ञापन
500-1000 के पुराने नोट बदलने को लेकर इलाहाबाद बैंक के बाहर लगी लाइनें।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यदि आप ये समझते हैं कि सरकार की आंखों में धूल झोंककर काले धन को सफेद कर लेंगे तो आप बड़ी भूल कर रहे हैं। इधर आप अपने खाते में कैश जमा करेंगे उधर बैंकों के सर्वर में अपलोड खास साफ्टवेयर तुरंत आईटी (इनकम टैक्स) को अलर्ट कर देगा।
साफ्टवेयर के जरिए आपके बैंक खाते में पड़ रही एक - एक पाई पर आयकर महकमे की सीधी नजर है। हाल ही में एक खास साफ्टवेयर के जरिए देश की सभी बैंकों के सर्वर को सीधे इनकम टैक्स महकमे से कनेक्ट कर दिया गया है।
जिसकी बदौलत बैंक खातों में डाले और निकाले जा रहे एक - एक रुपये की जानकारी आटोमेटिक सीधे इनकम टैक्स विभाग को पहुंच रही है। एक्सचेंज हो रही रकम का भी आईडी नंबर के हिसाब से पूरा लेखा जोखा तैयार किया जा रहा है।
विज्ञापन
बैंकों में हो रहे पूरे लेनदेन को फिल्टर करने के लिए आईटी एक्सपर्ट्स की फौज दिन - रात काम कर रही है। बैंकों में हर दिन करोड़ों रुपये जमा हो रहे हैं। आंकड़ा हजार करोड़ के पार है। दावा है ढाई लाख रुपये तक छूट रहेगी। लेकिन ढाई लाख वाले भी बेफिक्र न रहें।
इनकम टैक्स महकमा इस बात की पूरी छानबीन करेगा कि अचानक आपके खाते में ढाई लाख कहां से आए। एकाउंट खुलने के बाद से जिन खातों में कभी आंकड़ा 10 हजार तक नहीं पहुंचा उनमें अचानक से लाख - दो लाख रुपये डाले जाने पर आईटी ऐसे एकाउंट्स को रडार पर लेगा।
हजार और पांच सौ के नोट बंद होने के बाद से बैंकों में पुराने नोट जमा कराने और नोट बदलने के लिए लाइन लगी हुई हैं। लोगों को लग रहा है कि आयकर विभाग को भला कैसे पता चलेगा कि उन्हाेंने कितनी रकम एक्सचेंज की और कितनी खाते में डाली निकाली।
लेकिन यह भूल ना ही करें तो अच्छा है। आईटी विभाग पहले से ही अपनी तैयारियों में जुटा हुआ है। पिछले सालों में खातों से हुआ संदिग्ध लेन देन का रिकार्ड उनके पास पहले से ही है और उसकी जांच भी की जा रही है।
दूसरा दस लाख से अधिक की धनराशि एक खाते में जमा करने पर उसकी रिपोर्ट आयकर विभाग के पास आटोमेटिकली पहुंचती है। इस समय बैंकों में जो हजार और पांच सौ के नोट जमा कराए जा रहे हैं उन सभी का रिकार्ड आनलाइन है।
प्रतिदिन जमा होने वाले कैश की रिपोर्ट हर दिन आरबीआई को जा रही है। जो आरबीआई के माध्यम से आयकर विभाग तक पहुंचेगी।
विज्ञापन
साफ्टवेयर के जरिए आपके बैंक खाते में पड़ रही एक - एक पाई पर आयकर महकमे की सीधी नजर है। हाल ही में एक खास साफ्टवेयर के जरिए देश की सभी बैंकों के सर्वर को सीधे इनकम टैक्स महकमे से कनेक्ट कर दिया गया है।
विज्ञापन
जिसकी बदौलत बैंक खातों में डाले और निकाले जा रहे एक - एक रुपये की जानकारी आटोमेटिक सीधे इनकम टैक्स विभाग को पहुंच रही है। एक्सचेंज हो रही रकम का भी आईडी नंबर के हिसाब से पूरा लेखा जोखा तैयार किया जा रहा है।
विज्ञापन
बैंकों में हो रहे पूरे लेनदेन को फिल्टर करने के लिए आईटी एक्सपर्ट्स की फौज दिन - रात काम कर रही है। बैंकों में हर दिन करोड़ों रुपये जमा हो रहे हैं। आंकड़ा हजार करोड़ के पार है। दावा है ढाई लाख रुपये तक छूट रहेगी। लेकिन ढाई लाख वाले भी बेफिक्र न रहें।
इनकम टैक्स महकमा इस बात की पूरी छानबीन करेगा कि अचानक आपके खाते में ढाई लाख कहां से आए। एकाउंट खुलने के बाद से जिन खातों में कभी आंकड़ा 10 हजार तक नहीं पहुंचा उनमें अचानक से लाख - दो लाख रुपये डाले जाने पर आईटी ऐसे एकाउंट्स को रडार पर लेगा।
हजार और पांच सौ के नोट बंद होने के बाद से बैंकों में पुराने नोट जमा कराने और नोट बदलने के लिए लाइन लगी हुई हैं। लोगों को लग रहा है कि आयकर विभाग को भला कैसे पता चलेगा कि उन्हाेंने कितनी रकम एक्सचेंज की और कितनी खाते में डाली निकाली।
लेकिन यह भूल ना ही करें तो अच्छा है। आईटी विभाग पहले से ही अपनी तैयारियों में जुटा हुआ है। पिछले सालों में खातों से हुआ संदिग्ध लेन देन का रिकार्ड उनके पास पहले से ही है और उसकी जांच भी की जा रही है।
दूसरा दस लाख से अधिक की धनराशि एक खाते में जमा करने पर उसकी रिपोर्ट आयकर विभाग के पास आटोमेटिकली पहुंचती है। इस समय बैंकों में जो हजार और पांच सौ के नोट जमा कराए जा रहे हैं उन सभी का रिकार्ड आनलाइन है।
प्रतिदिन जमा होने वाले कैश की रिपोर्ट हर दिन आरबीआई को जा रही है। जो आरबीआई के माध्यम से आयकर विभाग तक पहुंचेगी।