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‘हमने तो कर दिया था पाई - पाई का हिसाब - किताब’

Sat, 13 May 2017 02:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद Updated Sat, 13 May 2017 02:35 AM IST
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bsp workers open truth about nasimuddin
मायावती व नसीमुद्दीन सिद्दीकी - फोटो : amar ujala
मायावती ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी से जिन चार मंडलों का हिसाब - किताब मांगा था उनमें मुरादाबाद मंडल का भी नाम है। यानी यहां के प्रत्याशियों और पदाधिकारियों ने पार्टी हाईकमान तक चंदे की रकम नहीं पहुंचाई। नसीमुद्दीन के खुलासों और मायावती के पलटवार से बसपा के भीतर ही नहीं सियासी हल्कों में भी भूचाल मचा है।
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मामला सीधे तौर पर मुरादाबाद से जुड़ा है लिहाजा हमने चंदे की रकम पर यहां के प्रत्याशियों और पदाधिकारियों की नब्ज टटोली। ज्यादातर लोग बोलने में कतराते नजर आए लेकिन कुछ ने खुलकर बोला भी। जिन्होंने चुप्पी साधी वो भी इशारों - इशारों में काफी कुछ कह गए।
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वहीं एकाध प्रत्याशी ने यहां तक कह डाला कि तय करेंगे कि माया के साथ रहें या नसीमुद्दीन के, क्योंकि पार्टी का हाल किसी से छुपा नहीं रह गया अब। अलबत्ता एक बात पर सभी एकराय थे कि इनमें से किसी पर भी चंदे की रकम बकाया नहीं है।
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पार्टी ने जो भी रसीदें काटनी को दी थीं, उनकी रकम इकट्ठी करके तय सिस्टम के जरिए हाईकमान को भिजवा दी गई थी। मुरादाबाद पर चवन्नी बाकी नहीं है। ये रकम हाईकमान तक कैसे नहीं पहुंची, इसे बीच वाले जानें, उंगली नसीमुद्दीन पर उठ रही हैं क्योंकि इस व्यवस्था के इंचार्ज वही थे।
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