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Moradabad News: मथुरा वृंदावन के कलाकारों ने राजा सत्यवादी हरिश्चंद्र नाटक का मंचन कर दिया सत्य के रास्ते पर चलने का संदेश

Fri, 23 Oct 2026 02:38 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद Updated Fri, 23 Oct 2026 02:38 AM IST
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Artists from Mathura-Vrindavan staged the play 'Raja Satyavadi Harishchandra', conveying the message of following the path of truth.
ठाकुरद्वारा। मथुरा वृंदावन के कलाकारों ने बृहस्पतिवार को देर रात सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की कहानी के नाटक का मंचन किया और इससे लोगों को सत्य निष्ठा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। मंच पर पूजा अर्चना के बाद रात 10:00 बजे नाटक का मंचन शुरू हुआ। कलाकारों ने बताया कि सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र अयोध्या के सूर्यवंश के 36 वें राजा थे। वह धर्मात्मा, दानी और सत्यवादी होने के लिए प्रसिद्ध थे। उन्होंने कुलदेव वशिष्ठ के कहने पर वरुण देव की उपासना कर पुत्र रोहित की प्राप्ति की। कलाकारों ने बताया कि उनके सत्यवादी और दानी होने की एक बार ऋषि विश्वामित्र ने परीक्षा ली। जिसमें हरिश्चंद्र ने अपना राज-पाट सहित सब कुछ दान कर दिया लेकिन जब विश्वामित्र ने उनसे दान के बाद दक्षिणा देने को कहा तो उनके पास देने को कुछ नहीं था। इस पर उन्होंने स्वयं, अपनी पत्नी रानी तारा पुत्र रोहित को बेच दिया। इससे मिली धनराशि दक्षिणा में देकर अपना सत्यवादी और दानी होने का धर्म पूरा किया। स्वयं श्मशान में डोम के यहां जाकर नौकरी करने लगे। उनकी फिर परीक्षा ली गई। उनके पुत्र रोहित को एक सांप ने काट लिया। जिससे उनकी मौत हो गई। तब तारा पुत्र रोहित के शव को लेकर से श्मशान में पहुंची। तो हरिश्चंद्र ने अपनी पत्नी से शव का अंतिम संस्कार करने के लिए कर देने को कहा। तारा ने पैसे देने में असमर्थता जताई तो उन्होंने बिना कर के श्मशान में शव का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। इस पर तारा ने अपनी साड़ी को फाड़ कर उसे कर के रूप में देने की कोशिश की। तभी आकाशवाणी हुई और तारा को साड़ी फाड़ने से रोक दिया गया। आकाशवाणी में बताया गया कि यह उनकी परीक्षा चल रही थी। वे परीक्षा में सत्यवादी और धर्म के मार्ग पर चलने वाले साबित हुए हैं उनकी जीत हो गई है उन्हें फिर से राज-पाट मिल गया और पुत्र भी जीवित हो गया। कार्यक्रम का संचालन रामलीला कमेटी के प्रबंधक अवनीश शर्मा, दिनेश कुमार पूठिया, रवि जौहरी एडवोकेट आदि ने किया।
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गांव सुल्तानपुर दोस्त और भायपुर में बृहस्पतिवार को दशहरा मेले का आयोजन किया गया। देर शाम तक मेले में रामलीला का संक्षिप्त मंचन किया गया। रावण का वध होते ही उसके पुतले का दहन किया गया। पुतले का दहन होते ही श्री राम के जयकारे गूंजने लगे। मेले में आसपास के गांव के लोग बड़ी संख्या में पहुंचे। वहां लगे खेल तमाशों का आनंद उठाया। कोतवाल मनोज परमार ने बताया कि दोनों स्थानों पर लगा मेला शांतिपूर्वक संपन्न हो गया है।
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