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एडीओ पंचायत को हाईकोर्ट से मिली राहत, निलंबन आदेश पर रोक
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मुरादाबाद। प्रशासकों का कार्यकाल खत्म होने के बाद भी शासकीय धन की निकासी के मामले में निलंबित हुए मूंढापांडे ब्लॉक के तत्कालीन एडीओ (पंचायत) चंद्रपाल को हाईकोर्ट से राहत मिली है। चंद्रपाल द्वारा दायर याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निलंबन आदेश पर रोक लगाते हुए चार सप्ताह में राज्य सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा गया है।
प्रशासकों के कार्यकाल के दौरान ग्राम पंचायत सचिवों और सहायक विकास अधिकारियों ने वित्तीय अनियमितताएं कीं, जिनकी पुष्टि शासन स्तर से गठित जांच समिति के द्वारा की गई। ग्राम पंचायतों में 27 मई 2021 को कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी कुछ प्रशासकों द्वारा धनराशि का भुगतान किया गया। ऐसे ही एक मामले में मूंढापांडे ब्लॉक के तत्कालीन एडीओ (पंचायत) चंद्रपाल सिंह को शासन स्तर से निलंबित किया गया था। चंद्रपाल सिंह के द्वारा अपने निलंबन आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। मामले की सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता द्वारा तर्क दिया गया कि जिस 3,46,875 रुपये की धनराशि के अनियमित भुगतान का आरोप याची के विरुद्ध लगा है, वह धनराशि कोविड 19 वैश्विक महामारी के दौरान सामग्री आपूर्ति करने वाली विभिन्न फर्मो को भुगतान की गई है। यह भुगतान डिजिटल रूप से किया गया है, जोकि पोर्टल लॉक होने और बिना पासवर्ड के नहीं किया जा सकता है।
याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि डीपीआरओ के निर्देश पर ही यह भुगतान किया गया था। साथ ही इसी मामले में निलंबित किए गए तथा प्रशासक के रूप में तैनात रहे ग्राम पंचायत सचिव दयाराम को विभागीय जांच में केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया गया और याची को निलंबन के काफी दिनों बाद भी आरोप पत्र नहीं दिया गया है, जो कि सरकारी सेवक अनुशासन और अपील नियम 1999 के विरुद्ध है। इस पर सुनवाई उपरांत न्यायमूर्ति आलोक माथुर की एकल पीठ ने एडीओ पंचायत चंद्रपाल सिंह के निलंबन आदेश पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह में प्रति शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश दिया। साथ ही मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 जनवरी 2022 की तिथि नियत की है।
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प्रशासकों के कार्यकाल के दौरान ग्राम पंचायत सचिवों और सहायक विकास अधिकारियों ने वित्तीय अनियमितताएं कीं, जिनकी पुष्टि शासन स्तर से गठित जांच समिति के द्वारा की गई। ग्राम पंचायतों में 27 मई 2021 को कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी कुछ प्रशासकों द्वारा धनराशि का भुगतान किया गया। ऐसे ही एक मामले में मूंढापांडे ब्लॉक के तत्कालीन एडीओ (पंचायत) चंद्रपाल सिंह को शासन स्तर से निलंबित किया गया था। चंद्रपाल सिंह के द्वारा अपने निलंबन आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। मामले की सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता द्वारा तर्क दिया गया कि जिस 3,46,875 रुपये की धनराशि के अनियमित भुगतान का आरोप याची के विरुद्ध लगा है, वह धनराशि कोविड 19 वैश्विक महामारी के दौरान सामग्री आपूर्ति करने वाली विभिन्न फर्मो को भुगतान की गई है। यह भुगतान डिजिटल रूप से किया गया है, जोकि पोर्टल लॉक होने और बिना पासवर्ड के नहीं किया जा सकता है।
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याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि डीपीआरओ के निर्देश पर ही यह भुगतान किया गया था। साथ ही इसी मामले में निलंबित किए गए तथा प्रशासक के रूप में तैनात रहे ग्राम पंचायत सचिव दयाराम को विभागीय जांच में केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया गया और याची को निलंबन के काफी दिनों बाद भी आरोप पत्र नहीं दिया गया है, जो कि सरकारी सेवक अनुशासन और अपील नियम 1999 के विरुद्ध है। इस पर सुनवाई उपरांत न्यायमूर्ति आलोक माथुर की एकल पीठ ने एडीओ पंचायत चंद्रपाल सिंह के निलंबन आदेश पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह में प्रति शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश दिया। साथ ही मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 जनवरी 2022 की तिथि नियत की है।
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