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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   A woman died a month after being bitten by a dog; she was not administered anti-rabies serum despite the severe injuries.

Moradabad News: कुत्ते के काटने से एक माह बाद महिला की मौत, गंभीर जख्म के बाद भी नहीं लगा था एंटी रैबीज सीरम

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 18 May 2026 02:00 AM IST
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A woman died a month after being bitten by a dog; she was not administered anti-rabies serum despite the severe injuries.
कुंदरकी। आवारा कुत्ते के हमले में घायल महिला की बीमारी के कारण मौत हो गई। मृतका का संभल, मुरादाबाद से लेकर दिल्ली तक इलाज चला लेकिन जान नहीं बच सकी। दावा किया जा रहा है कि सरकारी अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाई थी लेकिन सीरम नहीं लगा था। कुंदरकी के मोहल्ला नूरुल्लाह निवासी जैबुल निशा (42) एक माह पहले संभल जिले के सिरसी कस्बे में अपने मायके में गई थीं वहीं उन्हें गली में आवारा कुत्ते ने पांव पर काटकर बुरी तरह जख्मी कर दिया।
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घर वालों के मुताबिक पांच दिन से जैबुल निशा की हालत ज्यादा खराब होने लगी, उन्हें पानी से डर लगने लगा, खाना पीना बंद कर दिया, घर में किसी से बात भी नहीं कर पा रही थीं और हरकतें असामान्य नजर आने पर परिजनों ने उन्हें दिल्ली के अस्पताल में ले जाकर भर्ती कराया लेकिन रविवार की सुबह में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। बताया जाता है कि महिला के पति की पांच साल पहले मौत हो चुकी है। घर में एक बेटा और बेटी ही रह गए जोकि मां को खोने के सदमे से बेहाल नजर आए। सगे संबंधी और रिश्तेदार उन्हें ढांढस बंधाते नजर आए। महिला के रिश्तेदारों ने बताया कि कुत्ते के काटने के बाद मायके वाले संभल के सरकारी अस्पताल ले गए थे लेकिन वहां सिर्फ वैक्सीन लगी, सीरम उपलब्ध नहीं था। वहीं मुरादाबाद जिला अस्पताल में तैनात इमरजेंसी मेडिकल अफसर डॉ. एसपी सिंह का कहना है कि गंभीर रूप से जख्मी मरीजों को एंटी रैबीज सीरम लगना जरूरी है। गहरे घाव में रैबीज का असर जल्दी और ज्यादा होता है। इसलिए वैक्सीन के साथ सीरम लगाया जाता है, जिससे डबल एंटीबॉडी बनती है और मरीज को नुकसान नहीं होता।
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सीएचसी पर हर रोज आते हैं 40 से अधिक पीड़ित
कुंदरकी। तेज गर्मी का प्रकोप बढ़ने के साथ कुंदरकी नगर और ग्रामीण इलाके में कुत्तों, बंदर, बिल्ली आदि जंगली जानवरों के स्वभाव में बदलाव देखने को मिल रहा है। जानवर गर्मी की वजह से आक्रामक हो रहे हैं। कुंदरकी सीएचसी पर हर रोज 40 से 50 लोग ऐसे आते हैं जिनको कुत्ते, बंदर और अन्य जानवरों ने काटा हो। सीएचसी में उपचार के साथ एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाए जाते हैं।
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