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टोल प्लाजा के कर्मचारी ने लुटवाए थे 14 लाख
Moradabad
Updated Mon, 20 Oct 2014 05:33 AM IST
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मुरादाबाद। टोल प्लाजा के कर्मचारी ने ही साजिश रची और मौका देखकर अपने साथियों को फोन करके 14 लाख रुपये लुटवा डाले। सात अक्तूबर को टोल प्लाजा के मैनेजर अजय यादव से हुई लूट की वारदात का पुलिस ने शुक्रवार को खुलासा कर दिया। कर्मचारी दीपक कुमार और उसके तीन साथियों को पुलिस ने गिरफ्तार करके जेल भेजा है। लूटे गए 6.20 लाख रुपये भी बरामद हो गए हैं। तीन बदमाशों की तलाश की जा रही है।
बकरीद की छुट्टी के बाद सात अक्तूबर की सुबह टोल प्लाजा के मैनेजर तीन दिन में जमा हुए 14 लाख रुपये लेकर अपने एकाउंटेंट सुरेश तिवारी के साथ टोल प्लाजा के आटो में ताड़ीखाना जा रहे थे। हाईवे से जैसे ही वह कुंदरकी रोड के संपर्क मार्ग पर चले, तभी सामने से पल्सर बाइक पर आए पांच बदमाशों ने गन प्वाइंट पर उनसे नगदी से भरा बैग लूट लिया था। वारदात के बाद बदमाश कुंदरकी की ओर फरार हो गए थे। पुलिस ने कई दिन की मशक्कत के बाद टोल प्लाजा की हाईवे पेट्रोल कार के मैनेजर दीपक कुमार पुत्र नरेश सिंह प्रजापति निवासी मानसरोवर कालोनी मझोला को गिरफ्तार किया। तब वारदात का खुलासा हुआ।
दीपक के साथ उसका साथी सचिन पुत्र रामगोपाल ठाकुर निवासी गोविंदनगर कटघर, सूरज पुत्र छेदालाल गंगवार निवासी बीसलपुर पीलीभीत, अर्जुन उर्फ हिमांशु पुत्र वेदपाल ठाकुर निवासी गोविंदनगर को गिरफ्तार किया गया। उनके कब्जे से 6.20 लाख रुपये बरामद हुए। एसएसपी ने बताया कि सचिन भी पहले टोल प्लाजा की एंबुलेंस चलाता था। अर्जुन दीपक का भांजा है। सभी ने मिलकर वारदात की। उनके फरार तीन साथियों राजेंद्र पुत्र रामरक्षपाल, हरिओम पुत्र बुद्धसेन, नन्हें पुत्र शिशुपाल की तलाश की जा रही है।
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वारदात के वक्त मौके पर ही था दीपक
दीपक ने मुखबिरी की और वारदात के वक्त वह कुछ दूरी पर ही खड़ा था। फोन से वह अपने साथियों को निर्देश दे रहा था। दीपक ने बताया कि वह जानता था कि तीन दिन का कैश इकट्ठा हो गया है और यह लाखों में होगा। इसीलिए उसने अपने साथी सचिन के साथ प्लान बनाया। आटो के आने पर वह समझ गया कि कुछ देर में ही मैनेजर रकम लेकर निकलने वाले होंगे। आटो हाईवे से हर बार कुंदरकी रोड की ओर जाता था। इसकी रेकी वह पहले ही कर चुके थे। लिहाजा सुरक्षित मानकर हाईवे से कुंदरकी रोड पर ही बदमाशों ने आटो को रोक लिया और वारदात को अंजाम दिया।
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पहले दो बार कोशिश कर चुके थे बदमाश
दीपक और उसके साथी पहले भी दो बार लूटपाट की कोशिश कर चुके थे। लेकिन दोनों बार गड़बड़ी हो जाती थी। कभी सटीक मुखबिरी नहीं हो पाती तो कभी भीड़भाड़ वाला इलाका आ जाता था। इससे बदमाशों को डर लगता था कि कहीं वह पकड़े न जाएं। दीपक ने बताया कि सचिन अमरोहा में अपनी बीज की दुकान चलाता है। लेकिन वह टोल प्लाजा का रोजाना के कलेक्शन की जानकारी है। वारदात के बाद पुलिस ने तुरंत टोल प्लाजा के कर्मचारियों को हिरासत में नहीं लिया। पहले एक-एक करके सभी की कॉल डिटेल निकलवाई। इसके बाद शक होने पर दीपक पर शिकंजा कसा।
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बकरीद की छुट्टी के बाद सात अक्तूबर की सुबह टोल प्लाजा के मैनेजर तीन दिन में जमा हुए 14 लाख रुपये लेकर अपने एकाउंटेंट सुरेश तिवारी के साथ टोल प्लाजा के आटो में ताड़ीखाना जा रहे थे। हाईवे से जैसे ही वह कुंदरकी रोड के संपर्क मार्ग पर चले, तभी सामने से पल्सर बाइक पर आए पांच बदमाशों ने गन प्वाइंट पर उनसे नगदी से भरा बैग लूट लिया था। वारदात के बाद बदमाश कुंदरकी की ओर फरार हो गए थे। पुलिस ने कई दिन की मशक्कत के बाद टोल प्लाजा की हाईवे पेट्रोल कार के मैनेजर दीपक कुमार पुत्र नरेश सिंह प्रजापति निवासी मानसरोवर कालोनी मझोला को गिरफ्तार किया। तब वारदात का खुलासा हुआ।
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दीपक के साथ उसका साथी सचिन पुत्र रामगोपाल ठाकुर निवासी गोविंदनगर कटघर, सूरज पुत्र छेदालाल गंगवार निवासी बीसलपुर पीलीभीत, अर्जुन उर्फ हिमांशु पुत्र वेदपाल ठाकुर निवासी गोविंदनगर को गिरफ्तार किया गया। उनके कब्जे से 6.20 लाख रुपये बरामद हुए। एसएसपी ने बताया कि सचिन भी पहले टोल प्लाजा की एंबुलेंस चलाता था। अर्जुन दीपक का भांजा है। सभी ने मिलकर वारदात की। उनके फरार तीन साथियों राजेंद्र पुत्र रामरक्षपाल, हरिओम पुत्र बुद्धसेन, नन्हें पुत्र शिशुपाल की तलाश की जा रही है।
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वारदात के वक्त मौके पर ही था दीपक
दीपक ने मुखबिरी की और वारदात के वक्त वह कुछ दूरी पर ही खड़ा था। फोन से वह अपने साथियों को निर्देश दे रहा था। दीपक ने बताया कि वह जानता था कि तीन दिन का कैश इकट्ठा हो गया है और यह लाखों में होगा। इसीलिए उसने अपने साथी सचिन के साथ प्लान बनाया। आटो के आने पर वह समझ गया कि कुछ देर में ही मैनेजर रकम लेकर निकलने वाले होंगे। आटो हाईवे से हर बार कुंदरकी रोड की ओर जाता था। इसकी रेकी वह पहले ही कर चुके थे। लिहाजा सुरक्षित मानकर हाईवे से कुंदरकी रोड पर ही बदमाशों ने आटो को रोक लिया और वारदात को अंजाम दिया।
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पहले दो बार कोशिश कर चुके थे बदमाश
दीपक और उसके साथी पहले भी दो बार लूटपाट की कोशिश कर चुके थे। लेकिन दोनों बार गड़बड़ी हो जाती थी। कभी सटीक मुखबिरी नहीं हो पाती तो कभी भीड़भाड़ वाला इलाका आ जाता था। इससे बदमाशों को डर लगता था कि कहीं वह पकड़े न जाएं। दीपक ने बताया कि सचिन अमरोहा में अपनी बीज की दुकान चलाता है। लेकिन वह टोल प्लाजा का रोजाना के कलेक्शन की जानकारी है। वारदात के बाद पुलिस ने तुरंत टोल प्लाजा के कर्मचारियों को हिरासत में नहीं लिया। पहले एक-एक करके सभी की कॉल डिटेल निकलवाई। इसके बाद शक होने पर दीपक पर शिकंजा कसा।
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