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ओशो ध्यान साधना शिविर का समापन
Moradabad
Updated Mon, 11 Mar 2013 05:35 AM IST
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मुरादाबाद। नहीं है आपके पास वक्त कि लगा सकें ध्यान तो कोई बात नहीं है। चलते-फिरते भी खुद का तनाव दूर कर सकते हैं आप। इसके लिए अपनाने होंगे कुछ टिप्स जिन्हें अपनाकर हो सकते हैं आप मानसिक रूप से फिट। ओशो आश्रम पुणे की साधिका मां अमृत साधना के अनुसार कई बार ऐसी परिस्थितियां आ जाती है कि तत्काल दिमाग में तनाव आ जाता है जैसे रास्ते पर चलते हुए यातायात जाम। जाम में फंसने पर गुस्सा आना आम बात है, ऐसे में गुस्से को अंदर न रखकर जिबरिश (गुस्सा शरीर से बाहर निकाल) दें। जिस पर अथवा तरीके पर गुस्सा आ रहा हो उसके लिए जो बोलना चाहते हैं वह बोल दीजिए। धीमी आवाज में कुछ इस तरह बोलें कि दूसरों को कष्ट न हो।
राधाकृष्ण मंदिर दिल्ली रोड में तीन दिवसीय ध्यान साधना शिविर में मां अमृत साधना ने साधकों को ध्यान की कई विधियां समझाईं। इन्हीं में एक थी खुद के नाम का उच्चारण। आंख बंद करने अपने नाम का उच्चारण लगातार करके साधक खुद में ऐसा खो गए कि राजू भटनागर नामक एक साधक चीख-चीखकर रो पड़े। बताया कई बार ध्यान लगाने पर वह खुद में खोते चले जाते हैं और इस तरह की स्थिति आ जाती है। शिविर में नारायण कुमार लोहिया, विपिन कुमार लोहिया, गौरी शंकर, मां पद्मा, सर्वोत्तम, आनंद, स्वामी ज्ञान समर्पण, पंकज, लक्ष्मण, मधु चैतन्य आदि का सहयोग रहा।
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तनाव दूर करने को अपनाएं यह टिप्स
- तनाव होने पर गहरी सांस लेकर छोड़े
- गुस्सा आने पर रोके नहीं बोलकर निकालें
- बास के बुलाने पर डर (तनाव) लगे तो तेज सांस खींचकर तीन बार तेजी से मुंह से सांस छोड़े
- मुट्ठियां सहित शरीर कसकर भींच लें (कस लें), कुछ क्षण सांस रोकने के बाद मुंह से छोड़ें
- एकांत कमरे में पुराना तकिया ले जाकर जिस पर गुस्सा आए उसका अहसास करते हुए तकिए को पीटें, चाकू से काटें