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पोंटी को आंखें मूंदकर जारी किए लाइसेंस
Moradabad
Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
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मुरादाबाद। पोंटी चड्ढा न बंदूक चला सकता था और न ही रायफल। उनका बायां हाथ कटा हुआ था जबकि दाहिने हाथ में केवल दो उंगलियां थीं। लेकिन फिर भी पिस्टल और रिवाल्वर के लाइसेंस जारी होते चले गए। मुरादाबाद प्रशासन ने ही वर्ष 1985 में रिवाल्वर का लाइसेंस जारी कर दिया था। रामपुर से दो दो लाइसेंस बने थे।
अगर आम आदमी लाइसेंस बनवाना चाहे तो मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। दिन, हफ्ते और महीने तो भूल जाइए दो दो साल बीत गए हैं लोगों को। तमाम ने तो अब लाइसेंसी असलहा लेने का विचार ही छोड़ दिया है। लेकिन पोंटी चड्ढा का रसूख देखिए। वर्ष 1985 में उन्होंने रिवाल्वर के लिए आवेदन किया था। वैसे तो लाइसेंस के आवेदन की फाइल थाना, सीओ आफिस, एलआईयू आफिस, एसएसपी आफिस, डीसीआरबी से होकर असलाह आफिस में पहुंचती है। दूसरी जांच तहसील स्तर पर भी की जाती है। सीएमओ आफिस द्वारा भी मेडिकल रिपोर्ट लगाई जाती है। लेकिन मजे की बात देखिए कि किसी को भी पोंटी के खराब हाथ नजर नहीं आए। बिना जांच पड़ताल के लाइसेंस जारी कर दिए गए। रामपुर प्रशासन ने तो एक ही दिन में पोंटी को दो लाइसेंस दे दिए थे। पोंटी के भाई हरदीप को भी यहां से लाइसेंस मिले। वाकई यह गंभीर मामला है। लापरवाह अफसरों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। ताकि इससे दूसरे अफसरों को सबक मिल सके।
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कोठी 455 के नाम से दौड़ीं फाइलें
मुरादाबाद। जिस समय पोंटी चड्ढा के नाम से लाइसेंस जारी किए गए थे उस समय पोंटी का इतना सियासी रसूख नहीं था। उस वक्त तो चड्ढा फैमिली को लोग जानते थे। कोठी नंबर 455 के नाम से फाइलें दौड़ा करती थीं। वर्ष 1985 में गुरदीप सिंह उर्फ पोंटी चड्ढा के नाम से जो रिवाल्वर का लाइसेंस जारी किया गया था उसमें भी पता कोठी नंबर 455 ही लिखा है।
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