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80 हजार बच्चों को नहीं मिले स्वेटर और यूनिफॉर्म
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मुरादाबाद। प्रदेश सरकार की ओर से प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को धनराशि नहीं मिलने से विषम स्थितियां पैदा हो गई हैं। जनपद में प्राथमिक विद्यालयों के करीब 80 हजार विद्यार्थियों का यूनिफार्म नहीं बन सकी है। स्थिति यह है कि स्वेटर, जूते-मोजे के अभाव में बच्चे ठंड में ठिठुरते हुए स्कूल पहुंच रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों की प्रदेश सरकार से गुहार है कि कम से कम बच्चों पर सरकार को रहम करना चाहिए। इस संबंध में बेसिक शिक्षा अधिकारी का कहना है कि अगले सप्ताह तक दूसरे चरण की धनराशि आने की संभावना है।
मुरादाबाद जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग में डीबीटी के लिए 19,7658 विद्यार्थियों का नामांकन हुआ है। प्रदेश सरकार ने विद्यार्थियों को यूनिफार्म, बैग, स्वेटर, जूता-मोजा लेने के लिए 1100 रुपये उनके खातों में भेजने का फैसला लिया था। शैक्षिक सत्र बीतने में करीब तीन माह का समय बचा है। दिसंबर माह में भी आठ दिन बीत चुके हैं। सर्दी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के अभिभावक धनराशि नहीं मिलने के कारण स्वेटर नहीं खरीद सके हैं। नतीजतन बच्चों को ठिठुरते हुए ही स्कूल जाना पड़ रहा है।
17 हजार की लौट गई धनराशि
मुरादाबाद जनपद के एक लाख 97 हजार विद्यार्थियों में से पहले चरण में छह नवंबर को एक लाख 34 हजार विद्यार्थियों के खाते में 1100 रुपये आए थे। इस तरह दूसरे चरण के लिए करीब 63 हजार विद्यार्थी शेष बचे थे, लेकिन पहले चरण में 17 हजार ऐसे अभिभावक थे, जिनके बैंक खाते आधार से लिंक नहीं होने की वजह से सरकार से आई धनराशि लौट गई। ऐसे में दूसरे चरण के 63 और पहले चरण के 17 हजार बच्चों को मिलाकर अब 80 हजार विद्यार्थियों को धनराशि का इंतजार कर रहे हैं।
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44 हजार बच्चों का शेष है सत्यापन
डीबीटी के लिए शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों का डेटा अपलोड किया जा रहा है। उसका सत्यापन खंड शिक्षा अधिकारी और बाद में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा किया जा रहा है। 19,7658 विद्यार्थियों में से मुरादाबाद में 44412 बच्चों का सत्यापन अभी शेष है।
30 में से 27 हजार को भेजी धनराशि
कुंदरकी। ग्राम तेवर पट्टी उर्फ काजीपुरा के प्राइमरी स्कूल में 403 बच्चे हैं। छात्र सनी, रहबर अली, छात्रा आंचल ने धनराशि नहीं आने की जानकारी दी। फरीदपुर सिंहाड़ा के कंपोजिट स्कूल में छात्र याकूब ने बताया कि उनके पिता मजदूर हैं। अभी तक यूनिफॉर्म नहीं खरीद सके हैं। कुलबाड़ा गांव के प्राइमरी स्कूल में छात्रा इंशा, आहिल आदि बच्चों ने बताया कि यूनिफॉर्म खरीद के लिए पैसा नहीं मिल सका है। भीकनुपर गांव के प्राइमरी स्कूल में प्रधानाध्यापक ब्रह्मपाल सिंह ने बताया कि पंजीकृत 188 बच्चों में से अभी 148 बच्चों के अभिभावकों के बैंक खातों में यूनिफॉर्म खरीद के लिए धनराशि भेजी जा चुकी है। कुंदरकी नगर के कंपोजिट स्कूल के शिक्षक विकास राजपूत ने बताया कि विद्यालय में पंजीकृत 695 बच्चों में से मात्र 94 बच्चों के अभिभावकों के बैंक खातों में धनराशि पहुंच सकी है। खंड शिक्षा अधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि ब्लॉक में पंजीकृत तीस हजार बच्चों में से 27 हजार बच्चों का डाटा ऑनलाइन फीडिंग कराकर यूनिफॉर्म का पैसा भेज दिया गया है। अब सिर्फ तीन हजार बच्चे ही शेष रह गए हैं।
अधिकारियों के दावे को विद्यार्थियों ने झुठलाया
बिलारी। सहसपुर निवासी कन्या प्राइमरी स्कूल की छात्रा साफिया, सपना, तनिष्क, अब्दुल्ला प्राइमरी स्कूल की छात्रा नाजरा बी, छात्र अरशद, पैंठ बाजार जूनियर हाईस्कूल के छात्र अहमद के बैंक खाते में भी धनराशि नहीं पहुंची है। बिलारी के खंड शिक्षा अधिकारी मोहित कुमार ने दावा किया कि सभी अभिभावकों के बैंक खातों में निर्धारित धनराशि पहुंच चुकी है।
छजलैट ब्लाक के 7810 बच्चों को नहीं मिली धनराशि
कांठ। विकास खंड छजलैट में सभी विद्यालयों में 20076 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें से 7810 बच्चे ऐसे हैं, जिनके अभिभावकों के खातों में भेजी की धनराशि अभी तक नहीं आई है। कंपोजिट विद्यालय कांठ की प्रियांशी, फैजान, मोहम्मद विलाल, इंशा, सैजन, इलमा, कशिश, अलफिसा, प्राथमिक विद्यालय माननगर के विवेक कुमार, राधिका, वंशिका, अल्फेज आदि का कहना है कि उनके पिता मेहनत मजदूरी करते हैं। सरकार से मिलने वाली धनराशि अभी तक नहीं मिली है। कंपोजिट विद्यालय कांठ के प्रधानाध्यापक उदयवीर सिंह का कहना है कि पंजीकृत 262 में से 156 बच्चों के अभिभावकों के खातों में धनराशि भेजी जा चुकी है। 41 बच्चे हैं, जिनके अभिभावकों के बैंक खातों में या तो कोई त्रुटि है या फिर आधार कार्ड से लिंक नहीं है। 65 बच्चों के आवेदन खंड शिक्षाधिकारी कार्यालय में लंबित है। खंड शिक्षा अधिकारी भुवन प्रकाश का कहना है कि पहले चरण में छजलैट ब्लाक के 12266 बच्चों को धनराशि मिल चुकी है। जल्द ही दूसरे चरण में शेष रह गए 7810 बच्चों को इसका लाभ मिल जाएगा।
विद्यार्थियों का डेटा अपलोड करने में पूरे प्रदेश में मुरादाबाद का सातवां स्थान है। एक-दो दिन में सभी विद्यार्थियों का डेटा डीबीटी पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा। उम्मीद है कि अगले सप्ताह तक सभी विद्यार्थियों के खाते में धनराशि पहुंच जाएगी।
बुद्धप्रिय सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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मुरादाबाद जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग में डीबीटी के लिए 19,7658 विद्यार्थियों का नामांकन हुआ है। प्रदेश सरकार ने विद्यार्थियों को यूनिफार्म, बैग, स्वेटर, जूता-मोजा लेने के लिए 1100 रुपये उनके खातों में भेजने का फैसला लिया था। शैक्षिक सत्र बीतने में करीब तीन माह का समय बचा है। दिसंबर माह में भी आठ दिन बीत चुके हैं। सर्दी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के अभिभावक धनराशि नहीं मिलने के कारण स्वेटर नहीं खरीद सके हैं। नतीजतन बच्चों को ठिठुरते हुए ही स्कूल जाना पड़ रहा है।
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17 हजार की लौट गई धनराशि
मुरादाबाद जनपद के एक लाख 97 हजार विद्यार्थियों में से पहले चरण में छह नवंबर को एक लाख 34 हजार विद्यार्थियों के खाते में 1100 रुपये आए थे। इस तरह दूसरे चरण के लिए करीब 63 हजार विद्यार्थी शेष बचे थे, लेकिन पहले चरण में 17 हजार ऐसे अभिभावक थे, जिनके बैंक खाते आधार से लिंक नहीं होने की वजह से सरकार से आई धनराशि लौट गई। ऐसे में दूसरे चरण के 63 और पहले चरण के 17 हजार बच्चों को मिलाकर अब 80 हजार विद्यार्थियों को धनराशि का इंतजार कर रहे हैं।
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44 हजार बच्चों का शेष है सत्यापन
डीबीटी के लिए शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों का डेटा अपलोड किया जा रहा है। उसका सत्यापन खंड शिक्षा अधिकारी और बाद में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा किया जा रहा है। 19,7658 विद्यार्थियों में से मुरादाबाद में 44412 बच्चों का सत्यापन अभी शेष है।
30 में से 27 हजार को भेजी धनराशि
कुंदरकी। ग्राम तेवर पट्टी उर्फ काजीपुरा के प्राइमरी स्कूल में 403 बच्चे हैं। छात्र सनी, रहबर अली, छात्रा आंचल ने धनराशि नहीं आने की जानकारी दी। फरीदपुर सिंहाड़ा के कंपोजिट स्कूल में छात्र याकूब ने बताया कि उनके पिता मजदूर हैं। अभी तक यूनिफॉर्म नहीं खरीद सके हैं। कुलबाड़ा गांव के प्राइमरी स्कूल में छात्रा इंशा, आहिल आदि बच्चों ने बताया कि यूनिफॉर्म खरीद के लिए पैसा नहीं मिल सका है। भीकनुपर गांव के प्राइमरी स्कूल में प्रधानाध्यापक ब्रह्मपाल सिंह ने बताया कि पंजीकृत 188 बच्चों में से अभी 148 बच्चों के अभिभावकों के बैंक खातों में यूनिफॉर्म खरीद के लिए धनराशि भेजी जा चुकी है। कुंदरकी नगर के कंपोजिट स्कूल के शिक्षक विकास राजपूत ने बताया कि विद्यालय में पंजीकृत 695 बच्चों में से मात्र 94 बच्चों के अभिभावकों के बैंक खातों में धनराशि पहुंच सकी है। खंड शिक्षा अधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि ब्लॉक में पंजीकृत तीस हजार बच्चों में से 27 हजार बच्चों का डाटा ऑनलाइन फीडिंग कराकर यूनिफॉर्म का पैसा भेज दिया गया है। अब सिर्फ तीन हजार बच्चे ही शेष रह गए हैं।
अधिकारियों के दावे को विद्यार्थियों ने झुठलाया
बिलारी। सहसपुर निवासी कन्या प्राइमरी स्कूल की छात्रा साफिया, सपना, तनिष्क, अब्दुल्ला प्राइमरी स्कूल की छात्रा नाजरा बी, छात्र अरशद, पैंठ बाजार जूनियर हाईस्कूल के छात्र अहमद के बैंक खाते में भी धनराशि नहीं पहुंची है। बिलारी के खंड शिक्षा अधिकारी मोहित कुमार ने दावा किया कि सभी अभिभावकों के बैंक खातों में निर्धारित धनराशि पहुंच चुकी है।
छजलैट ब्लाक के 7810 बच्चों को नहीं मिली धनराशि
कांठ। विकास खंड छजलैट में सभी विद्यालयों में 20076 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें से 7810 बच्चे ऐसे हैं, जिनके अभिभावकों के खातों में भेजी की धनराशि अभी तक नहीं आई है। कंपोजिट विद्यालय कांठ की प्रियांशी, फैजान, मोहम्मद विलाल, इंशा, सैजन, इलमा, कशिश, अलफिसा, प्राथमिक विद्यालय माननगर के विवेक कुमार, राधिका, वंशिका, अल्फेज आदि का कहना है कि उनके पिता मेहनत मजदूरी करते हैं। सरकार से मिलने वाली धनराशि अभी तक नहीं मिली है। कंपोजिट विद्यालय कांठ के प्रधानाध्यापक उदयवीर सिंह का कहना है कि पंजीकृत 262 में से 156 बच्चों के अभिभावकों के खातों में धनराशि भेजी जा चुकी है। 41 बच्चे हैं, जिनके अभिभावकों के बैंक खातों में या तो कोई त्रुटि है या फिर आधार कार्ड से लिंक नहीं है। 65 बच्चों के आवेदन खंड शिक्षाधिकारी कार्यालय में लंबित है। खंड शिक्षा अधिकारी भुवन प्रकाश का कहना है कि पहले चरण में छजलैट ब्लाक के 12266 बच्चों को धनराशि मिल चुकी है। जल्द ही दूसरे चरण में शेष रह गए 7810 बच्चों को इसका लाभ मिल जाएगा।
विद्यार्थियों का डेटा अपलोड करने में पूरे प्रदेश में मुरादाबाद का सातवां स्थान है। एक-दो दिन में सभी विद्यार्थियों का डेटा डीबीटी पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा। उम्मीद है कि अगले सप्ताह तक सभी विद्यार्थियों के खाते में धनराशि पहुंच जाएगी।
बुद्धप्रिय सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी