{"_id":"5abbf0f94f1c1bec298b467c","slug":"8-lakh-fine-on-insurance-company","type":"story","status":"publish","title_hn":"इंश्योरेंस कंपनी पर आठ लाख का जुर्माना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इंश्योरेंस कंपनी पर आठ लाख का जुर्माना
मुरादाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 29 Mar 2018 01:55 AM IST
विज्ञापन
जुर्माना ठोका
- फोटो : demo pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जीवन बीमा कराने के बाद भी इंश्योरेंस कंपनी द्वारा मृतक के परिजनो को क्लेम ना देने पर उपभोक्ता फोरम ने कंपनी के ऊपर आठ लाख रूपये का जुर्माना ठोंका है साथ ही आदेश दिया है कि जुर्माने की रकम के साथ तीन हजार रूपये दो माह में पीड़ित को अदा करे। ग्राम कमालपुर फतेहाबाद बिलारी निवासी भगवान दास ने अपने पुत्र मुकेश का जीवन बीमा बजाज एलाइंस लाईफ इंश्योरेंस कंपनी से 2004 में कराया था जिसमें भगवान दास नामिनी थे।
मुकेश की तबियत खराब हो जाने के कारण 2014 में उसकी मौत हो गई। इस दौरान भगवान दास लगातार किस्ते अदा करते रहे। मुकेश की मौत के बाद क्लेम के लिये आवेदन किया गया। किन्तु कंपनी द्वारा क्लेम को खारिज कर दिया गया। जिसकी शिकायत भगवानदास ने उपभोक्ता फोरम प्रथम में की। जहां कंपनी ने बीमा किया जाना स्वीकार किया साथ ही जवाब में कहा कि मुकेश की मृत्यु जहर खाने से हूई है।
जबकी कंपनी स्वाभाविक मौत को ही आधार मानकर क्लेम करती है। लेकिन कंपनी द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया जिससे यह साबित हो कि मुकेश की मृत्यु जहर खाने से हुई हो। फोरम के अध्यक्ष लियाकत अली एवं सदस्य मंजू श्रीवास्तव ने दोनो पक्षों को सुना और कं पनी को दोषी मानते हुये आठ लाख रूपये के साथ साथ तीन हजार रूपये वाद व्यय के रूप में वादी को दो माह में देने का आदेश सुनाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मुकेश की तबियत खराब हो जाने के कारण 2014 में उसकी मौत हो गई। इस दौरान भगवान दास लगातार किस्ते अदा करते रहे। मुकेश की मौत के बाद क्लेम के लिये आवेदन किया गया। किन्तु कंपनी द्वारा क्लेम को खारिज कर दिया गया। जिसकी शिकायत भगवानदास ने उपभोक्ता फोरम प्रथम में की। जहां कंपनी ने बीमा किया जाना स्वीकार किया साथ ही जवाब में कहा कि मुकेश की मृत्यु जहर खाने से हूई है।
विज्ञापन
जबकी कंपनी स्वाभाविक मौत को ही आधार मानकर क्लेम करती है। लेकिन कंपनी द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया जिससे यह साबित हो कि मुकेश की मृत्यु जहर खाने से हुई हो। फोरम के अध्यक्ष लियाकत अली एवं सदस्य मंजू श्रीवास्तव ने दोनो पक्षों को सुना और कं पनी को दोषी मानते हुये आठ लाख रूपये के साथ साथ तीन हजार रूपये वाद व्यय के रूप में वादी को दो माह में देने का आदेश सुनाया है।
विज्ञापन