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सता में आने पर सब भूल जाते हैं वादे
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मुरादाबाद। कांग्रेस ने मंगलवार को चुनावी घोषणा पत्र ‘जन आवाज’ जारी कर दिया है। इसमें बेरोजगारी और गरीबी दूर करने के साथ किसानों के लिए अतिरिक्त बजट समेत कई वादे किए हैं। मतदाताओं ने घोषणा पत्र पर बेबाक राय दी। अधिकतर मतदाताओं ने कहा कि चुनावी वादे सिर्फ जुमले होते हैं। सत्ता में भले कोई भी पार्टी आए, लेकिन उनके वादे कभी पूरे नहीं होते।
कचहरी रोड पर चाय की दुकान चलाने वाले सुरेश यादव कहते हैं, नेता और राजनीतिक दल जनता को बेवकूफ बनाते हैं। जनता भी बनती है। अधिकतर चुनावों में ऐसा ही होता आया है। जनता के जागरूक नहीं होने तक होता रहेगा। सुरेश यादव ने कहा कि सत्ता तक पहुंचने के लिए सभी दल लोक लुभावने वादे करते हैं। 72 हजार रुपये सालाना मिलने से गरीबी तो दूर हो जाएगी, लेकिन इसका दुरुपयोग भी खूब होगा। जैसा कि बेरोजगारी भत्ता योजना में हुआ। भत्ता लेने के लिए कई लोगों ने नौकरी ही नहीं की।
अधिवक्ता सूरज सिंह ने कहा कि बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है। कांग्रेस ने इसका जिक्र किया, अच्छी बात है। लेकिन बेरोजगारों के साथ मजाक नहीं होना चाहिए। किसी भी पार्टी की सरकार बने, उसकी इच्छाशक्ति होगी तो गरीबी दूर कर सकती है। इसके लिए 72 हजार रुपये अनुदान देना कोई बड़ी बात नहीं है। डिप्टी गंज निवासी सोनू के मुताबिक मनरेगा ने गांवों से पलायन रोका है। 150 दिन रोजगार की गारंटी मिलने से बड़ी राहत मिलेगी और ग्रामीणों को रोजगार की तलाश में ठोकरें नहीं खानी पड़ेंगी।
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लाइनपार निवासी राजीव और सिविल लाइन में सड़क किनारे फड़ लगाने वाले पप्पू का कहना है कि जनता के वोट की कीमत चुनाव तक ही होती है। इसके लिए नेता झूठे वादे कर जनता को रिझाते हैं। राजीव ने कहा कि, मोदी सरकार भी बेरोजगारों को नौकरी देने और 15 लाख रुपये देने के वादे के साथ सरकार में आई थी। इसके बाद न तो नौकरिायां मिली और न ही किसी के खाते में 15 लाख रुपये तो दूर 15 रुपये नहीं आए।
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कचहरी रोड पर चाय की दुकान चलाने वाले सुरेश यादव कहते हैं, नेता और राजनीतिक दल जनता को बेवकूफ बनाते हैं। जनता भी बनती है। अधिकतर चुनावों में ऐसा ही होता आया है। जनता के जागरूक नहीं होने तक होता रहेगा। सुरेश यादव ने कहा कि सत्ता तक पहुंचने के लिए सभी दल लोक लुभावने वादे करते हैं। 72 हजार रुपये सालाना मिलने से गरीबी तो दूर हो जाएगी, लेकिन इसका दुरुपयोग भी खूब होगा। जैसा कि बेरोजगारी भत्ता योजना में हुआ। भत्ता लेने के लिए कई लोगों ने नौकरी ही नहीं की।
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अधिवक्ता सूरज सिंह ने कहा कि बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है। कांग्रेस ने इसका जिक्र किया, अच्छी बात है। लेकिन बेरोजगारों के साथ मजाक नहीं होना चाहिए। किसी भी पार्टी की सरकार बने, उसकी इच्छाशक्ति होगी तो गरीबी दूर कर सकती है। इसके लिए 72 हजार रुपये अनुदान देना कोई बड़ी बात नहीं है। डिप्टी गंज निवासी सोनू के मुताबिक मनरेगा ने गांवों से पलायन रोका है। 150 दिन रोजगार की गारंटी मिलने से बड़ी राहत मिलेगी और ग्रामीणों को रोजगार की तलाश में ठोकरें नहीं खानी पड़ेंगी।
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लाइनपार निवासी राजीव और सिविल लाइन में सड़क किनारे फड़ लगाने वाले पप्पू का कहना है कि जनता के वोट की कीमत चुनाव तक ही होती है। इसके लिए नेता झूठे वादे कर जनता को रिझाते हैं। राजीव ने कहा कि, मोदी सरकार भी बेरोजगारों को नौकरी देने और 15 लाख रुपये देने के वादे के साथ सरकार में आई थी। इसके बाद न तो नौकरिायां मिली और न ही किसी के खाते में 15 लाख रुपये तो दूर 15 रुपये नहीं आए।