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जिला अस्पताल पहुंचने वाले 50 फीसदी बच्चे वायु प्रदूषण से बीमार
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मुरादाबाद। बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण दिल्ली में सांस लेना मुश्किल हो गया है। ऐसे में वहां पर स्कूलों को बंद करा दिया गया है। दिल्ली से करीब 125 किलोमीटर दूर स्थित मुरादाबाद की हवा की गुणवत्ता बहुत खराब हो गई है। रविवार को यहां पर वायु गुणवत्ता सूचकांक 295 दर्ज किया गया, जिसमें लाजपत नगर में एक्यूआई रेड जोन में 304 दर्ज किया गया, जबकि रोजगार कार्यालय में एक्यूआई 286 रहा। शहर में बढ़ता वायु प्रदूषण बच्चों की सेहत के लिए बहुत खतरनाक है। स्थिति यह है कि जिला अस्पताल की बच्चों की ओपीडी में पहुंचने वाले 50 फीसदी बच्चे प्रदूषण की वजह से बीमार हैं। ऐसे में चिकित्सकों ने बच्चों को सुबह-शाम बाहर न घूमने की सलाह दी है।
रविवार रात आठ बजे लाजपत नगर में पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर 487 था, जो डब्ल्यूएचओ द्वारा वायु गुणवत्ता के लिए निर्धारित मानकों से करीब 16 गुना से अधिक है। वहीं, पीएम 10 का अधिकतम स्तर 426, कार्बन डाई ऑक्साइड का अधिकतम स्तर 143 और नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड का अधिकतम स्तर 119 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। रोजगार कार्यालय पर 286 एक्यूआई में पीएम 2.5 की अधिकतम मात्रा 411 और पीएम 10 का अधिकतम स्तर 345 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर रहा। चिकित्सकों का कहना है कि खराब वायु गुणवत्ता से बच्चों को बचाने की आवश्यकता है। उनके साथ बड़े और बुजुर्गों को भी घर में ही रहना चाहिए, ताकि बच्चे बाहर घूमने की जिद न करें। बाहर निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें। घर के अंदर भी धूम्रपान और मच्छरों को मारने वाली कॉइल न जलाएं। उन्हें ताजी सब्जियां, फल, गुनगुना दूध के साथ तरल पदार्थों का अधिक से अधिक सेवन कराएं। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी होगी।
वायु गुणवत्ता सूचकांक और उसका प्रभाव
स्तर गुणवत्ता प्रभाव
शून्य-50 अच्छा कोई प्रभाव नहीं
51-100 संतोषजनक संवेदनशील लोगों को सांस में परेशानी हो सकती है।
101-200 थोड़ा प्रदूषित अस्थमा और हृदय रोग पीड़ित बच्चों व बड़ों को हो सकती हैं सांस की परेशानी
201-300 खराब लंबे समय तक ऐसे वातावरण में रहने से सांस की परेशानी और हृदय पीड़ितों को परेशानी की आशंका
301-400 बहुत खराब लंबे समय तक ऐसे वातावरण से सांस की समस्या की आशंका, फेफड़े-हृदय रोगियों को गंभीर रूप से प्रभावित होने की आशंका
401-500 गंभीर इसे आपातकाल कहा जाता है। स्वस्थ लोगों के श्वसनतंत्र खराब होने की आशंका, फेफड़े और हृदयरोगियों को गंभीर रूप से बीमार होने की आशंका। पूरी तरह से घर के अंदर रहना जरूरी
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जिला अस्पताल ओपीडी में यदि दो सौ बच्चे उपचार कराने के लिए आते हैं तो उसमे से सौ बच्चे खांसी, जुकाम, बुखार आदि से पीड़ित हैं। बहुत से बच्चों को नेबुलाइजर की जरूरत भी पड़ रही है। पहले जो जुकाम-बुखार चार-पांच दिन में ठीक हो रहा था, अब उसे ठीक होने में दस से 12 दिन का समय लग रहा है। यह वायु प्रदूषण का असर है। नवंबर की शुरुआत से समस्या बढ़ी है।
डॉ. वीर सिंह, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
इंस्टाल करके एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग करने के बाद। अभी भी संबंधित विभागीय अधिकारी नहीं संज्ञान में लाए तो दिल्ली जैसे हालात होने की आशंका है। क्योंकि सर्दियों के समय प्रदूषित हवा वातावरण में ही रह जाती है। त्वरित उपाय प्रतिदिन कृत्रिम बारिश, चौराहों पर फव्वारों का संचालन लगाए जाना जरूरी है। महानगर में नए फव्वारे लगाना भी वक्त की जरूरत है। सड़कों पर जाम नहीं लगना चाहिए।
डॉ. अनामिका त्रिपाठी, नोडल अधिकारी सीपीसीबी
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रविवार रात आठ बजे लाजपत नगर में पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर 487 था, जो डब्ल्यूएचओ द्वारा वायु गुणवत्ता के लिए निर्धारित मानकों से करीब 16 गुना से अधिक है। वहीं, पीएम 10 का अधिकतम स्तर 426, कार्बन डाई ऑक्साइड का अधिकतम स्तर 143 और नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड का अधिकतम स्तर 119 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। रोजगार कार्यालय पर 286 एक्यूआई में पीएम 2.5 की अधिकतम मात्रा 411 और पीएम 10 का अधिकतम स्तर 345 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर रहा। चिकित्सकों का कहना है कि खराब वायु गुणवत्ता से बच्चों को बचाने की आवश्यकता है। उनके साथ बड़े और बुजुर्गों को भी घर में ही रहना चाहिए, ताकि बच्चे बाहर घूमने की जिद न करें। बाहर निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें। घर के अंदर भी धूम्रपान और मच्छरों को मारने वाली कॉइल न जलाएं। उन्हें ताजी सब्जियां, फल, गुनगुना दूध के साथ तरल पदार्थों का अधिक से अधिक सेवन कराएं। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी होगी।
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वायु गुणवत्ता सूचकांक और उसका प्रभाव
स्तर गुणवत्ता प्रभाव
शून्य-50 अच्छा कोई प्रभाव नहीं
51-100 संतोषजनक संवेदनशील लोगों को सांस में परेशानी हो सकती है।
101-200 थोड़ा प्रदूषित अस्थमा और हृदय रोग पीड़ित बच्चों व बड़ों को हो सकती हैं सांस की परेशानी
201-300 खराब लंबे समय तक ऐसे वातावरण में रहने से सांस की परेशानी और हृदय पीड़ितों को परेशानी की आशंका
301-400 बहुत खराब लंबे समय तक ऐसे वातावरण से सांस की समस्या की आशंका, फेफड़े-हृदय रोगियों को गंभीर रूप से प्रभावित होने की आशंका
401-500 गंभीर इसे आपातकाल कहा जाता है। स्वस्थ लोगों के श्वसनतंत्र खराब होने की आशंका, फेफड़े और हृदयरोगियों को गंभीर रूप से बीमार होने की आशंका। पूरी तरह से घर के अंदर रहना जरूरी
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जिला अस्पताल ओपीडी में यदि दो सौ बच्चे उपचार कराने के लिए आते हैं तो उसमे से सौ बच्चे खांसी, जुकाम, बुखार आदि से पीड़ित हैं। बहुत से बच्चों को नेबुलाइजर की जरूरत भी पड़ रही है। पहले जो जुकाम-बुखार चार-पांच दिन में ठीक हो रहा था, अब उसे ठीक होने में दस से 12 दिन का समय लग रहा है। यह वायु प्रदूषण का असर है। नवंबर की शुरुआत से समस्या बढ़ी है।
डॉ. वीर सिंह, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
इंस्टाल करके एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग करने के बाद। अभी भी संबंधित विभागीय अधिकारी नहीं संज्ञान में लाए तो दिल्ली जैसे हालात होने की आशंका है। क्योंकि सर्दियों के समय प्रदूषित हवा वातावरण में ही रह जाती है। त्वरित उपाय प्रतिदिन कृत्रिम बारिश, चौराहों पर फव्वारों का संचालन लगाए जाना जरूरी है। महानगर में नए फव्वारे लगाना भी वक्त की जरूरत है। सड़कों पर जाम नहीं लगना चाहिए।
डॉ. अनामिका त्रिपाठी, नोडल अधिकारी सीपीसीबी