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गलत सीवर लाइन का भुगतान नहंी करेगा जल निगम
Updated Thu, 23 Aug 2018 02:08 AM IST
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मुरादाबाद।
रेलवे कालोनी हरथला में 30 साल से खंडहर पड़ी कालोनियों में सीवर लाइन डालने को जल निगम के अफसरों ने गंभीरता से लिया है। मंगलवार को समाचार प्रकाशित होने के बाद उक्त क्षेत्र में सीवर लाइन के मेजरमेंट पर रोक लगा दी गई है। अब अधिकारियों के निरीक्षण के बाद ही सीवर लाइन के संबंध में फैसला होगा। गलत स्थान पर सीवर डालने पर जल निगम भुगतान नहीं करेगा।
शासन की नमामि गंगे योजना के तहत महानगर के प्रथम जोन में सीवर लाइन डाली जा रही है। इस जोन में रेलवे की हरथला कालोनी भी आती है। इसमें अंग्रेजों के जमाने की 1930-33 में बनाए गए भवनों की कई कालोनियां हैं, जो खंडहर हो चुकी हैं। उक्त कालोनियों में 30 साल से कोई नहीं रह रहा है। इनमें घास और झाड़ के ऊंचे जंगल उग आए हैं। इन कालोनियों में न तो नाली हैं और न ही सड़क।
इसके बावजूद जल निगम द्वारा डाली जा रही सीवर लाइन को बड़े स्तर पर इस जंगलनुमा खंडहर कालोनियों वाले क्षेत्र में डाल दिया गया है। इससे शासन की करीब एक करोड़ रुपये लागत की सीवर लाइन इस क्षेत्र में डाल दी गई है। इसका समाचार प्रकाशित होने पर अफसरों में हड़कंप मच गया। हालांकि जल निगम और एलएंडटी के अधिकारी खंडहर में सीवर लाइन डाले जाने पर अनभिज्ञता जता रहे हैं।
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रेलवे कालोनी हरथला में सीवर का काम फिलहाल रोक दिया गया है। उक्त क्षेत्र का निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही आगे का काम कराया जाएगा।
- एसकेसिंह, पीओ - एलएंडटी।
सीवर लाइन वहां डाला जाना है, जहां पर इसकी आवश्यकता है। खंडहर और सुनसान क्षेत्र में सीवर लाइन डालना औचित्यहीन है। सर्वे होने तक उक्त लाइन के मेजरमेंट पर रोक लगा दी गई है।
- बीके गर्ग, एई-सीवर प्रोजेक्ट।
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रेलवे कालोनी हरथला में 30 साल से खंडहर पड़ी कालोनियों में सीवर लाइन डालने को जल निगम के अफसरों ने गंभीरता से लिया है। मंगलवार को समाचार प्रकाशित होने के बाद उक्त क्षेत्र में सीवर लाइन के मेजरमेंट पर रोक लगा दी गई है। अब अधिकारियों के निरीक्षण के बाद ही सीवर लाइन के संबंध में फैसला होगा। गलत स्थान पर सीवर डालने पर जल निगम भुगतान नहीं करेगा।
शासन की नमामि गंगे योजना के तहत महानगर के प्रथम जोन में सीवर लाइन डाली जा रही है। इस जोन में रेलवे की हरथला कालोनी भी आती है। इसमें अंग्रेजों के जमाने की 1930-33 में बनाए गए भवनों की कई कालोनियां हैं, जो खंडहर हो चुकी हैं। उक्त कालोनियों में 30 साल से कोई नहीं रह रहा है। इनमें घास और झाड़ के ऊंचे जंगल उग आए हैं। इन कालोनियों में न तो नाली हैं और न ही सड़क।
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इसके बावजूद जल निगम द्वारा डाली जा रही सीवर लाइन को बड़े स्तर पर इस जंगलनुमा खंडहर कालोनियों वाले क्षेत्र में डाल दिया गया है। इससे शासन की करीब एक करोड़ रुपये लागत की सीवर लाइन इस क्षेत्र में डाल दी गई है। इसका समाचार प्रकाशित होने पर अफसरों में हड़कंप मच गया। हालांकि जल निगम और एलएंडटी के अधिकारी खंडहर में सीवर लाइन डाले जाने पर अनभिज्ञता जता रहे हैं।
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रेलवे कालोनी हरथला में सीवर का काम फिलहाल रोक दिया गया है। उक्त क्षेत्र का निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही आगे का काम कराया जाएगा।
- एसकेसिंह, पीओ - एलएंडटी।
सीवर लाइन वहां डाला जाना है, जहां पर इसकी आवश्यकता है। खंडहर और सुनसान क्षेत्र में सीवर लाइन डालना औचित्यहीन है। सर्वे होने तक उक्त लाइन के मेजरमेंट पर रोक लगा दी गई है।
- बीके गर्ग, एई-सीवर प्रोजेक्ट।