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संभल : रहस्यमयी बीमारी से 19 बंदरों की मौत, जांच के लिए बरेली भेजा गया शव 

Wed, 08 Apr 2020 12:25 AM IST
Mohit Mudgal अमर उजाला नेटवर्क, संभल
अमर उजाला नेटवर्क, संभल Published by: Mohit Mudgal Updated Wed, 08 Apr 2020 12:25 AM IST
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19 monkey died due to unknown reason in sambhal sent to bareilly for postmortem
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

संभल के पवांसा क्षेत्र में बीते आठ दिनों में रहस्यमय बीमारी से 19 बंदरों की मौत हो चुकी है। बंदरों की मौत की वजह अभी साफ नहीं है। पवांसा के बुजुर्ग बताते हैं पिछले 30 वर्ष में ऐसा कभी नहीं हुआ जब लगातार बंदरों की मौत हो रही हो। इसलिए लोग आशंकित हैं। बंदरों की मौत होने की वजह स्पष्ट किए जाने के लिए जांच-पड़ताल पर जोर दे रहे हैं।

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बंदरों की मौत के बारे में ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी। वन विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। इसके बाद पशुधन विभाग को सूचित किया गया। पशुधन विभाग से तीन पशु चिकित्साधिकारी पहुंचे जिन्होंने एक बंदर का शव अपने कब्जे में लिया और उसे पोस्टमार्टम के लिए बरेली भेजा है। जबकि एक बीमार बंदर की सेहत का परीक्षण भी किया।
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संभल स्थित पशु चिकित्सालय के चिकित्साधिकारी डा. एल के गुप्ता ने बताया कि मीडिया रिपोर्ट से उन्हें पता लगा है कि अमेरिका में एक बाघ में कोरोना के संक्रमण की पुष्टि हुई है। इसके बाद पशु चिकित्सा विभाग सतर्क है। जैसे ही संभल के करीबी कस्बा पवांसा में उन्हें बंदरों की मौत होने की जानकारी मिली तो वह अपनी टीम के साथ पवांसा गए थे। वहां ग्रामीणों ने बताया कि सात दिनों से बंदरों की आकस्मिक मौत का सिलसिला जारी है। बंदरों की पहले तबीयत बिगड़ती है और 24 से 48 घंटे में मौत हो जाती है।
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आकस्मिक मौत का शिकार हुए अधिकतर बंदरों को दफना दिया गया है। जबकि एक बंदर का शव मंगलवार की दोपहर में पशु चिकित्सा विभाग की टीम कब्जे में लिया गया। टीम में शामिल तीनों डाक्टर कोरोना को लेकर सतर्क थे और अपने बचाव के लिए बंदर का शव बरेली स्थित सेंटर फॉर एनिमल डिजीज रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक को भेजा गया है। वहां से बंदर की मौत की वजह स्पष्ट हो सकेगी।

बचाव की किट पहन कर डॉक्टर ने लिया बीमार बंदर का तापमान  
बचाव की किट पहनकर पशु चिकित्सक ने एक बीमार बंदर का तापमान लिया लेकिन जब वे तापमान ले रहे थे तभी बहुत सारे बंदर एकत्र होने लगे। इस पर जल्दी जल्दी उन्होंने बीमार बंदर का तापमान लिया और उसे वहीं पर छोड़ दिया। वहीं डाक्टरों की सुरक्षा के लिए तमाम ग्रामीण लाठी लेकर डाक्टरों के आसपास खड़े रहे।


ग्रामीण सतर्क हैं और दे रहे तत्काल सूचना
पवांसा निवासी 67 वर्षीय श्याम राघव ने बताया कि एक बंदर की हालत बिगड़ी थी। बंदर पशुशाला पड़ा था। इसकी सूचना देने के लिए सुबह सात बजे पशु चिकित्सालय को फोन किया। चिकित्सकों  की टीम 11.30 बजे पहुंची। तब तक बंदर की मृत्यु हो गई थी।

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