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आंखों ही नहीं दिमाग पर भी असर डालता है स्मार्ट फोन
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मुरादाबाद। स्मार्ट फोन बच्चों की आंखों को न केवल कमजोर कर रहा, बल्कि उनका मानसिक और शारीरिक विकास पर भी सीधा असर डाल रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक सर्वे के बाद अभिभावकों से बच्चों को स्मार्ट फोन से दूर रखने की हिदायत दी है।
स्कूलों में ग्रीष्मकालीन छुट्टियां पड़ गई हैं। अधिकतर बच्चे आउटडोर और इनडोर खेलकूद गतिविधियों में प्रतिभाग करने के बजाए मोबाइल पर पिचके रहते हैं। मोबाइल पर ही गेेम खेलने के साथ कार्टून देखते हैं। अधिकतर अभिभावक भी यही चाहते हैं कि उनके बच्चे घर से बाहर न जाएं। इसलिए भी स्मार्ट फोन इस्तेमाल में टोका टोकी नहीं करते हैं। बच्चे सुबह से लेकर रात तक स्मार्ट फोन, टीवी और लैपटॉप समेत दूसरे इलेक्ट्रानिक डिवाइस को अपना दोस्त बना रहे हैं।
जिला अस्पताल के नेत्र विभागाध्यक्ष डा. भावुतोष के मुताबिक डब्ल्यूएचओ ने बच्चों की इस लत को बेहद खतरनाक बताया है। सर्वे रिपोर्ट में कहा कि निर्धारित समय से ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों के आंखों के साथ उनके मानसिक और शारीरिक विकास पर असर डाल रही है। खासकर, पांच साल की उम्र से नीचे के बच्चों के लिए ज्यादा घातक है। डब्ल्यूएचओ ने एक साल से पांच साल की उम्र के बच्चों के अभिभावकों के लिए बकायदा गाइड लाइन जारी की हैं। एक साल के बच्चों के को स्क्रीन से दूर रखने और एक दिन में कम से कम आधा घंटे पेट के बल लेटाने और फर्श पर खेल खिलाने को शारीरिक विकास के लिए बेहतर बताया है। एक से दो साल के बच्चों को तीन घंटे शारीरिक गतिविधि कराने और कहानियां सुनाने को फायदेमंद बताया है। तीन से चार साल के बच्चों को अधिकतम तीन से चार घंटे फिजिकल एक्टिविटी कराने की सलाह दी है।
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डा. भावुतोष बताते हैं पांच साल की उम्र तक बच्चों में कॉगनिटिव स्किल विकसित नहीं होता है। बच्चे सही और गलत में फर्क नहीं समझ पाते हैं। देखने और सुनते हैं वहीं दोहराते हैं। चिकित्सा अधीक्षक डा. राजेंद्र कुमार बताते हैं अधिकतर अभिभावक बच्चों को खाना खिलाने के वक्त टीवी के सामने बैठा देते हैं। इससे बच्चों का ध्यान टीवी पर चला जाता है। इससे बच्चे भूख से कम और अधिक खाना खा लेते हैं। जिससे उनका शारीरिक विकास पर असर पड़ता है।
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स्कूलों में ग्रीष्मकालीन छुट्टियां पड़ गई हैं। अधिकतर बच्चे आउटडोर और इनडोर खेलकूद गतिविधियों में प्रतिभाग करने के बजाए मोबाइल पर पिचके रहते हैं। मोबाइल पर ही गेेम खेलने के साथ कार्टून देखते हैं। अधिकतर अभिभावक भी यही चाहते हैं कि उनके बच्चे घर से बाहर न जाएं। इसलिए भी स्मार्ट फोन इस्तेमाल में टोका टोकी नहीं करते हैं। बच्चे सुबह से लेकर रात तक स्मार्ट फोन, टीवी और लैपटॉप समेत दूसरे इलेक्ट्रानिक डिवाइस को अपना दोस्त बना रहे हैं।
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जिला अस्पताल के नेत्र विभागाध्यक्ष डा. भावुतोष के मुताबिक डब्ल्यूएचओ ने बच्चों की इस लत को बेहद खतरनाक बताया है। सर्वे रिपोर्ट में कहा कि निर्धारित समय से ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों के आंखों के साथ उनके मानसिक और शारीरिक विकास पर असर डाल रही है। खासकर, पांच साल की उम्र से नीचे के बच्चों के लिए ज्यादा घातक है। डब्ल्यूएचओ ने एक साल से पांच साल की उम्र के बच्चों के अभिभावकों के लिए बकायदा गाइड लाइन जारी की हैं। एक साल के बच्चों के को स्क्रीन से दूर रखने और एक दिन में कम से कम आधा घंटे पेट के बल लेटाने और फर्श पर खेल खिलाने को शारीरिक विकास के लिए बेहतर बताया है। एक से दो साल के बच्चों को तीन घंटे शारीरिक गतिविधि कराने और कहानियां सुनाने को फायदेमंद बताया है। तीन से चार साल के बच्चों को अधिकतम तीन से चार घंटे फिजिकल एक्टिविटी कराने की सलाह दी है।
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डा. भावुतोष बताते हैं पांच साल की उम्र तक बच्चों में कॉगनिटिव स्किल विकसित नहीं होता है। बच्चे सही और गलत में फर्क नहीं समझ पाते हैं। देखने और सुनते हैं वहीं दोहराते हैं। चिकित्सा अधीक्षक डा. राजेंद्र कुमार बताते हैं अधिकतर अभिभावक बच्चों को खाना खिलाने के वक्त टीवी के सामने बैठा देते हैं। इससे बच्चों का ध्यान टीवी पर चला जाता है। इससे बच्चे भूख से कम और अधिक खाना खा लेते हैं। जिससे उनका शारीरिक विकास पर असर पड़ता है।