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कहीं यूनिफार्म तो कहीं स्वेटर को तरस रहे नौनिहाल
Updated Sat, 08 Dec 2018 01:36 AM IST
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बहजोई। कहीं यूनिफार्म तो कहीं स्वेटर के लिए नौनिहालों को तरसना पड़ रहा है। ठंड के मौसम में बच्चों को प्लास्टिक की पट्टी पर बैठना पड़ रहा है। इससे साफ है कि ग्रामीण अंचलों में बेसिक शिक्षा दम तोड़ रही है।
शुक्रवार को अमर उजाला की टीम ने कई स्कूलों का जायजा लिया। दोपहर सवा बजे करीब विकासखंड बहजोई के गांव बमनेटा के प्राथमिक विद्यालय में बच्चे प्लास्टिक की पट्टी पर बैठे थे। वहीं कुछ बच्चे ड्रेस में थे तो कुछ बच्चे बिना यूनिफार्म में मिले।
कुछ बच्चों का कहना था कि उन्हें अभी तक यूनिफार्म नहीं मिली है तो कुछ बच्चों का कहना था कि एक ही जोड़ी यूनिफार्म मिली है। वहीं बच्चों ने स्वेटर न मिलने की भी बात कही, बाउंड्रीवॉल टूटी थी। एक कक्ष का लोहे के दरवाजा टूटा था और मौके पर मौजूद अकेले शिक्षामित्र भानुप्रताप सिंह का कहना था कि 57 बच्चे मौजूद हैं। प्रधानाध्यापक पर तीन विद्यालयों का चार्ज हैं। वह किसी जरूरी काम से गए हुए हैं।
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खास बात यह रही कि विद्यालय का भवन देखने से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि पिछले कई वर्षों से रंगाई-पुताई नहीं कराई गई है। इसके अलावा अधिकारियों के दूरभाष नंबर व मध्याह्न भोजन योजना आदि की जानकारी के लिए लगी वॉल पेंट भी जगह-जगह से खराब थी।
कक्ष की दीवारों के निचले हिस्से में जगह-जगह गड्ढे बने थे। यह हाल तब है जबकि विद्यालयों की रंगाई-पुताई व वॉल पेंटिंग के लिए धनराशि भेजी जाती है। इसके बाद टीम उच्च प्राथमिक विद्यालय पहुंची वहां तीन शिक्षिकाओं व तीन अनुदेशकों में दो शिक्षिकाएं व एक अनुदेशक मौके पर मिले।
यहां भी बच्चे प्लास्टिक की पट्टी पर ही बैठे मिले। छात्रों का कहना था कि दो जोड़ी ड्रेस में अभी तक एक जोड़ी ड्रेस ही मिली है और स्वेटर अभी तक किसी को नहीं मिले हैं। कुछ बच्चे रंग-बिरंगे तथा कुछ ड्रेस के पुराने स्वेटर पहने हुए थे। मौजूद स्टाफ ने बताया कि 43 बच्चे मौजूद हैं। विद्यालय का चार्ज दूसरे शिक्षक पर है और वह इस समय विद्यालय में नहीं हैं।
जूतों के पड़े लाले, शौचालयों में पड़े ताले
बहजोई। योगी सरकार की सख्ती के बावजूद भी जिले में बेसिक शिक्षा का बुरा हाल है। ग्रामीण अंचलों में अभी भी स्कूलों की स्थिति यह है कि शौचालयों में ताले पड़े रहते है और बच्चों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। इससे केंद्र व राज्य सरकार के स्वच्छता अभियान को पलीता लग रहा है। यह हाल तब है जबकि स्वच्छता अभियान को लेकर सरकारें बड़ा बजट खर्च कर रहीं है। वहीं शुक्रवार को बमनेटा के प्राथमिक विद्यालय के शौचालयों में ताले पड़े थे और बच्चे दीवारों पर लघुशंका कर रहे थे। इसके अलावा उच्च प्राथमिक विद्यालयों के कई बच्चों पर जूते नहीं थे। जानकारी करने पर सामने आया कि बच्चों को जूते छोटे-बड़े मिल गए हैं। इसलिए बच्चे स्कूल में जूते पहनकर नहीं आ पा रहे हैं।
चेकिंग के अभाव में दम तोड़ रही शिक्षा व्यवस्था
बहजोई। चेकिंग के अभाव में जिले में शिक्षा व्यवस्था दम तोड़ रही है। कहीं विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है तो कहीं अधिक शिक्षकों की तैनाती है। बच्चों को स्वेटर, ड्रेस व जूते समय से नसीब नहीं हो पा रहे हैं। यह हाल तब है जबकि बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में नियमित चेकिंग के लिए शासन स्तर से लगातार निर्देश दिए जाते हैं और जिला प्रशासन से लेकर बीएसए, खंड शिक्षा अधिकारी, एबीआरसी व एनपीआरसी आदि की भी समय समय पर चेकिंग के लिए शासन स्तर से व्यवस्था बनाई गई है।
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स्वेटर विद्यालयों में भेजे जा रहे हैं। दूसरी व्यवस्थाओं में सुधार का प्रयास किया जा रहा है। -वीरेंद्र प्रताप सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला संभल।
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शुक्रवार को अमर उजाला की टीम ने कई स्कूलों का जायजा लिया। दोपहर सवा बजे करीब विकासखंड बहजोई के गांव बमनेटा के प्राथमिक विद्यालय में बच्चे प्लास्टिक की पट्टी पर बैठे थे। वहीं कुछ बच्चे ड्रेस में थे तो कुछ बच्चे बिना यूनिफार्म में मिले।
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कुछ बच्चों का कहना था कि उन्हें अभी तक यूनिफार्म नहीं मिली है तो कुछ बच्चों का कहना था कि एक ही जोड़ी यूनिफार्म मिली है। वहीं बच्चों ने स्वेटर न मिलने की भी बात कही, बाउंड्रीवॉल टूटी थी। एक कक्ष का लोहे के दरवाजा टूटा था और मौके पर मौजूद अकेले शिक्षामित्र भानुप्रताप सिंह का कहना था कि 57 बच्चे मौजूद हैं। प्रधानाध्यापक पर तीन विद्यालयों का चार्ज हैं। वह किसी जरूरी काम से गए हुए हैं।
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खास बात यह रही कि विद्यालय का भवन देखने से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि पिछले कई वर्षों से रंगाई-पुताई नहीं कराई गई है। इसके अलावा अधिकारियों के दूरभाष नंबर व मध्याह्न भोजन योजना आदि की जानकारी के लिए लगी वॉल पेंट भी जगह-जगह से खराब थी।
कक्ष की दीवारों के निचले हिस्से में जगह-जगह गड्ढे बने थे। यह हाल तब है जबकि विद्यालयों की रंगाई-पुताई व वॉल पेंटिंग के लिए धनराशि भेजी जाती है। इसके बाद टीम उच्च प्राथमिक विद्यालय पहुंची वहां तीन शिक्षिकाओं व तीन अनुदेशकों में दो शिक्षिकाएं व एक अनुदेशक मौके पर मिले।
यहां भी बच्चे प्लास्टिक की पट्टी पर ही बैठे मिले। छात्रों का कहना था कि दो जोड़ी ड्रेस में अभी तक एक जोड़ी ड्रेस ही मिली है और स्वेटर अभी तक किसी को नहीं मिले हैं। कुछ बच्चे रंग-बिरंगे तथा कुछ ड्रेस के पुराने स्वेटर पहने हुए थे। मौजूद स्टाफ ने बताया कि 43 बच्चे मौजूद हैं। विद्यालय का चार्ज दूसरे शिक्षक पर है और वह इस समय विद्यालय में नहीं हैं।
जूतों के पड़े लाले, शौचालयों में पड़े ताले
बहजोई। योगी सरकार की सख्ती के बावजूद भी जिले में बेसिक शिक्षा का बुरा हाल है। ग्रामीण अंचलों में अभी भी स्कूलों की स्थिति यह है कि शौचालयों में ताले पड़े रहते है और बच्चों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। इससे केंद्र व राज्य सरकार के स्वच्छता अभियान को पलीता लग रहा है। यह हाल तब है जबकि स्वच्छता अभियान को लेकर सरकारें बड़ा बजट खर्च कर रहीं है। वहीं शुक्रवार को बमनेटा के प्राथमिक विद्यालय के शौचालयों में ताले पड़े थे और बच्चे दीवारों पर लघुशंका कर रहे थे। इसके अलावा उच्च प्राथमिक विद्यालयों के कई बच्चों पर जूते नहीं थे। जानकारी करने पर सामने आया कि बच्चों को जूते छोटे-बड़े मिल गए हैं। इसलिए बच्चे स्कूल में जूते पहनकर नहीं आ पा रहे हैं।
चेकिंग के अभाव में दम तोड़ रही शिक्षा व्यवस्था
बहजोई। चेकिंग के अभाव में जिले में शिक्षा व्यवस्था दम तोड़ रही है। कहीं विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है तो कहीं अधिक शिक्षकों की तैनाती है। बच्चों को स्वेटर, ड्रेस व जूते समय से नसीब नहीं हो पा रहे हैं। यह हाल तब है जबकि बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में नियमित चेकिंग के लिए शासन स्तर से लगातार निर्देश दिए जाते हैं और जिला प्रशासन से लेकर बीएसए, खंड शिक्षा अधिकारी, एबीआरसी व एनपीआरसी आदि की भी समय समय पर चेकिंग के लिए शासन स्तर से व्यवस्था बनाई गई है।
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स्वेटर विद्यालयों में भेजे जा रहे हैं। दूसरी व्यवस्थाओं में सुधार का प्रयास किया जा रहा है। -वीरेंद्र प्रताप सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला संभल।