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राजस्व महकमे की लापरवाही पर मां की जगह पिता को खतौनी पर मार डाला, विरासत दर्ज
Updated Thu, 25 Oct 2018 01:13 AM IST
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Tehsil ministerial staff association boycott because of the work done on behalf of the vacant office of the clerk copy writer and revenue.
- फोटो : amarujala
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राजस्व महकमे की लापरवाही के कारण मां की जगह पिता को खतौनी पर राजस्व रिकार्ड में मार डाला और विरासत में बेटों का नाम दर्ज किया। मामले का खुलासा होने पर तहसीलदार ने आनन-फानन में खतौनी पर लापरवाही के कारण आदेश को निरस्त कर दिया, लेकिन किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। मामला धल्लिया गांव के एक किसान से जुड़ा है।
क्षेत्र के राजस्व गांव धल्लिया में गाटा संख्या 86 रकबा - 2.4320 हेक्टेअर अनोखे लाल, उसकी पत्नी लीलावती और छोटे भाई रोशन लाल के नाम संयुक्त रूप से संक्रमणीय भूमिधर के रूप में खतौनी में दर्ज है। लीलावती की पिछले दिनों मृत्यु हो चुकी है। संबधित लीलावती के वारिसों ने अपनी मां की विरासत दर्ज कराने की प्रक्रिया हल्का लेखपाल से कराई।
तब हल्का लेखपाल की रिपोर्ट पर सुपरवाइजर कानूनगो ने लीलावती के स्थान पर अनोखे लाल को मृतक दर्शाते हुए सात अगस्त 2018 को विरासत का आदेश सोमपाल और दुर्गेश बाबू के नाम वारिस के रूप में दर्ज कर दिया। इस बीच अनोखे लाल के बेटे बैंक से लोन लेने पहुंचे। तब पता चला कि अनोखेलाल खतौनी पर मृतक दर्ज हैं।
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तब लोन मरे हुए के नाम से कैसे हो सकता है? जिस पर अनोखेलाल के बेटे सकते में आ गए। हल्का लेखपाल से शिकायत की गई। तब उसने आनन-फानन में तहसीलदार को रिपोर्ट दी और अनोखेलाल को मृत दिखाकर सोमपाल और दुर्गेश बाबू के नाम दर्ज की गई विरासत आदेश 26 सितंबर 2018 को निरस्त कर दिया और मृतक लीलावती के स्थान पर सोमपाल और दुर्गेश बाबू का नाम दर्ज कर दिया।
राजस्व विभाग की लापरवाही के कारण जिंदा अनोखे लाल को मृतक दिखाने के विरासत के आदेश को लेकर तहसीलदार अशोक कुमार सिंह से बात की गई। तब उनका कहना था कि उनकी कोर्ट में यह मामला आया होगा और गलत आदेश निरस्त कर दिया।
लापरवाही संज्ञान में आने पर कार्रवाई को लेकर बात की गई। तब उनका कहना है कि इस मामले को लेकर किसी ने कोई कार्रवाई की मांग नहीं की। इसलिए कार्रवाई नहीं की गई।
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क्षेत्र के राजस्व गांव धल्लिया में गाटा संख्या 86 रकबा - 2.4320 हेक्टेअर अनोखे लाल, उसकी पत्नी लीलावती और छोटे भाई रोशन लाल के नाम संयुक्त रूप से संक्रमणीय भूमिधर के रूप में खतौनी में दर्ज है। लीलावती की पिछले दिनों मृत्यु हो चुकी है। संबधित लीलावती के वारिसों ने अपनी मां की विरासत दर्ज कराने की प्रक्रिया हल्का लेखपाल से कराई।
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तब हल्का लेखपाल की रिपोर्ट पर सुपरवाइजर कानूनगो ने लीलावती के स्थान पर अनोखे लाल को मृतक दर्शाते हुए सात अगस्त 2018 को विरासत का आदेश सोमपाल और दुर्गेश बाबू के नाम वारिस के रूप में दर्ज कर दिया। इस बीच अनोखे लाल के बेटे बैंक से लोन लेने पहुंचे। तब पता चला कि अनोखेलाल खतौनी पर मृतक दर्ज हैं।
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तब लोन मरे हुए के नाम से कैसे हो सकता है? जिस पर अनोखेलाल के बेटे सकते में आ गए। हल्का लेखपाल से शिकायत की गई। तब उसने आनन-फानन में तहसीलदार को रिपोर्ट दी और अनोखेलाल को मृत दिखाकर सोमपाल और दुर्गेश बाबू के नाम दर्ज की गई विरासत आदेश 26 सितंबर 2018 को निरस्त कर दिया और मृतक लीलावती के स्थान पर सोमपाल और दुर्गेश बाबू का नाम दर्ज कर दिया।
राजस्व विभाग की लापरवाही के कारण जिंदा अनोखे लाल को मृतक दिखाने के विरासत के आदेश को लेकर तहसीलदार अशोक कुमार सिंह से बात की गई। तब उनका कहना था कि उनकी कोर्ट में यह मामला आया होगा और गलत आदेश निरस्त कर दिया।
लापरवाही संज्ञान में आने पर कार्रवाई को लेकर बात की गई। तब उनका कहना है कि इस मामले को लेकर किसी ने कोई कार्रवाई की मांग नहीं की। इसलिए कार्रवाई नहीं की गई।