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अब दुश्वारियों और बीमारियों की बाढ़ से घिरे ग्रामीण
Updated Fri, 07 Sep 2018 02:28 AM IST
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मुरादाबाद।
डिलारी ब्लाक के दर्जनों गांव अब दुश्वारियों और बीमारियों की बाढ़ से घिर गए हैं। मुख्तार बडेरा और आसपास के कई गांवों में अभी तक बाढ़ का पानी भरा है। गांवों के संपर्क मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। नैनीताल हाइवे से डिलारी को जोड़ने वाली सड़क (लाइफ लाइन) कई जगहों पर बाढ़ के पानी से ठहरी है। मुख्तार बडेरा गांव के पास बीस फीट से अधिक सड़क गायब हो चुकी है। सड़क की जगह नाला बह रहा है। सामूहिक श्रमदान से ग्रामीण नाले पर अस्थाई पुल बनाने में जुट गए हैं। गंदगी से गांवों में बुरा हाल है और हर घर में कोई न कोई व्यक्ति बिस्तर पर बीमार पड़ा है।
रामगंगा की बाढ़ ने डिलारी ब्लाक के मुख्तार बडेरा, गाजीपुरा, सिहाली, मझोली, चंगेरी, फाजलपुर, गक्खरपुर समेत कई गांवों में कहर बरपाया है। धान और उड़द की खेती चौपट हो चुकी है। सब्जियां सड़ गई हैं। खेतों और गांवों को जोड़ने वाले संपर्क मार्गों में अभी तक दो से तीन फीट तक पानी भरा है। कई मकान जलमग्न हैं। मुख्तार बडेरा गांव के पास सड़क बह गई है। यह सड़क डिलारी से नैनीताल हाइवे को जोड़ने वाली मुख्य सड़क है। सड़क बहने से कई गांवों के लिए आवागमन बंद है। डिलारी से मुरादाबाद आने के लिए ग्रामीणों को धारक नगला से होकर आना पड़ रहा है। इससे 30 किमी से लंबा फेरा लग रहा है।
बाढ़ के पानी के साथ कुत्ते, बिल्लियां, गीदड़ बहकर आए। उनकी सड़ांध ग्रामीणों का जीना दूभर कर रही है। जिन इलाकों में पानी उतर रहा है वहां मछलियां मर रही हैं और उनकी दुर्गंध पूरे गांव में फैल रही है। बाढ़ के साथ बहकर आई गंदगी जगह-जगह फैली है। इससे बीमारियां फैल गई हैं। हर घर में कोई न कोई व्यक्ति बुखार, डायरिया और एनर्जी से पीड़ित है। गांजीपुर गांव के बुन्दू के मुताबिक अभी तक गांवों में प्रशासन की टीमें निरीक्षण के लिए नहीं पहुंची हैं। नुकसान का आंकलन तो दूर चिकित्सा सुविधाएं तक नहीं दी गई हैं। मुख्तार बडेरा में ग्रामीण अपने संसाधनों से बाढ़ में बही सड़क पर रेते के कट्टे डालकर पैदल आवागमन के लिए अस्थायी पुल बना रहे हैं।
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- गांवों में बीमारियां फैल गई हैं। लोग परेशान हैं। खेती चौपट है और अनाज भीगने के बाद सड़ने लगा है। ग्रामीण एक दूसरे का सहयोग कर जैसे तैसे चूल्हा जला रहे हैं। - शाहरुख
- गांवों में मच्छरों की भरमार हो गई है। मच्छर मारने की दवा का छिड़काव नहीं होने से मलेरिया का खतरा मंडराने लगा है। जगह-जगह मरे हुए जानवरों को ग्रामीण गड्ढे खोदकर दबा रहे हैं। - मो रिजवान
- गांवों के संपर्क मार्गों पर पानी भरा है। स्कूल बंद होने से बच्चे घरों में कैद हैं। ग्रामीण संपर्क मार्गों में घुटने-घुटने पानी से होकर मुख्य मार्ग तक आ रहे हैं। - जसवंत सिंह
- प्रशासनिक अधिकारी तो दूर अभी तक कोई नेता ग्रामीणों का हाल जानने नहीं पहुंचा है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है। अगले साल लोकसभा चुनाव में नेताओं को वोट मांगने के लिए गांव में घुसने नहीं देंगे। - नवाब जान
- गांवों में जलभराव होने पर पानी की निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। गांवों में संपर्क मार्गों के साथ नालियों का निर्माण कराया जाए, ताकि बारिश होने पर पानी बाहर हो सके। - रफी हसन
- डिलारी को जोड़ने वाली सड़क गड्ढों में गायब हो गई है। सड़क पर कई फीट गहरे गड्ढे बने हैं। प्रशासन को आवागमन सुचारु बनाने के लिए गड्ढों में भरान और नालों पर अस्थायी पुल बनाने चाहिए। - साबिर खां
मछलियों के सहारे चल रहे कई परिवारों में चूल्हे
खेती चौपट होने और अनाज सड़ने के बाद कई परिवारों का पेट मछलियों से भर रहा है। खेत तालाब बने हैं। ग्रामीण सुबह से खेतों में मछलियां पकड़ने जा रहे हैं। पूरे दिन मछलियां पकड़ने के बाद शाम को उनसे पेट भर रहे हैं। कई ग्रामीण मछलियां पकड़ने के बाद उन्हें बेचकर चूल्हा जलाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के मुताबिक परिवार का पेट भरने के लिए कुछ तो करना ही पड़ेगा। प्रशासन के राहत का इंतजार करते रहे तो भूखे मर जाएंगे।
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डिलारी ब्लाक के दर्जनों गांव अब दुश्वारियों और बीमारियों की बाढ़ से घिर गए हैं। मुख्तार बडेरा और आसपास के कई गांवों में अभी तक बाढ़ का पानी भरा है। गांवों के संपर्क मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। नैनीताल हाइवे से डिलारी को जोड़ने वाली सड़क (लाइफ लाइन) कई जगहों पर बाढ़ के पानी से ठहरी है। मुख्तार बडेरा गांव के पास बीस फीट से अधिक सड़क गायब हो चुकी है। सड़क की जगह नाला बह रहा है। सामूहिक श्रमदान से ग्रामीण नाले पर अस्थाई पुल बनाने में जुट गए हैं। गंदगी से गांवों में बुरा हाल है और हर घर में कोई न कोई व्यक्ति बिस्तर पर बीमार पड़ा है।
रामगंगा की बाढ़ ने डिलारी ब्लाक के मुख्तार बडेरा, गाजीपुरा, सिहाली, मझोली, चंगेरी, फाजलपुर, गक्खरपुर समेत कई गांवों में कहर बरपाया है। धान और उड़द की खेती चौपट हो चुकी है। सब्जियां सड़ गई हैं। खेतों और गांवों को जोड़ने वाले संपर्क मार्गों में अभी तक दो से तीन फीट तक पानी भरा है। कई मकान जलमग्न हैं। मुख्तार बडेरा गांव के पास सड़क बह गई है। यह सड़क डिलारी से नैनीताल हाइवे को जोड़ने वाली मुख्य सड़क है। सड़क बहने से कई गांवों के लिए आवागमन बंद है। डिलारी से मुरादाबाद आने के लिए ग्रामीणों को धारक नगला से होकर आना पड़ रहा है। इससे 30 किमी से लंबा फेरा लग रहा है।
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बाढ़ के पानी के साथ कुत्ते, बिल्लियां, गीदड़ बहकर आए। उनकी सड़ांध ग्रामीणों का जीना दूभर कर रही है। जिन इलाकों में पानी उतर रहा है वहां मछलियां मर रही हैं और उनकी दुर्गंध पूरे गांव में फैल रही है। बाढ़ के साथ बहकर आई गंदगी जगह-जगह फैली है। इससे बीमारियां फैल गई हैं। हर घर में कोई न कोई व्यक्ति बुखार, डायरिया और एनर्जी से पीड़ित है। गांजीपुर गांव के बुन्दू के मुताबिक अभी तक गांवों में प्रशासन की टीमें निरीक्षण के लिए नहीं पहुंची हैं। नुकसान का आंकलन तो दूर चिकित्सा सुविधाएं तक नहीं दी गई हैं। मुख्तार बडेरा में ग्रामीण अपने संसाधनों से बाढ़ में बही सड़क पर रेते के कट्टे डालकर पैदल आवागमन के लिए अस्थायी पुल बना रहे हैं।
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- गांवों में बीमारियां फैल गई हैं। लोग परेशान हैं। खेती चौपट है और अनाज भीगने के बाद सड़ने लगा है। ग्रामीण एक दूसरे का सहयोग कर जैसे तैसे चूल्हा जला रहे हैं। - शाहरुख
- गांवों में मच्छरों की भरमार हो गई है। मच्छर मारने की दवा का छिड़काव नहीं होने से मलेरिया का खतरा मंडराने लगा है। जगह-जगह मरे हुए जानवरों को ग्रामीण गड्ढे खोदकर दबा रहे हैं। - मो रिजवान
- गांवों के संपर्क मार्गों पर पानी भरा है। स्कूल बंद होने से बच्चे घरों में कैद हैं। ग्रामीण संपर्क मार्गों में घुटने-घुटने पानी से होकर मुख्य मार्ग तक आ रहे हैं। - जसवंत सिंह
- प्रशासनिक अधिकारी तो दूर अभी तक कोई नेता ग्रामीणों का हाल जानने नहीं पहुंचा है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है। अगले साल लोकसभा चुनाव में नेताओं को वोट मांगने के लिए गांव में घुसने नहीं देंगे। - नवाब जान
- गांवों में जलभराव होने पर पानी की निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। गांवों में संपर्क मार्गों के साथ नालियों का निर्माण कराया जाए, ताकि बारिश होने पर पानी बाहर हो सके। - रफी हसन
- डिलारी को जोड़ने वाली सड़क गड्ढों में गायब हो गई है। सड़क पर कई फीट गहरे गड्ढे बने हैं। प्रशासन को आवागमन सुचारु बनाने के लिए गड्ढों में भरान और नालों पर अस्थायी पुल बनाने चाहिए। - साबिर खां
मछलियों के सहारे चल रहे कई परिवारों में चूल्हे
खेती चौपट होने और अनाज सड़ने के बाद कई परिवारों का पेट मछलियों से भर रहा है। खेत तालाब बने हैं। ग्रामीण सुबह से खेतों में मछलियां पकड़ने जा रहे हैं। पूरे दिन मछलियां पकड़ने के बाद शाम को उनसे पेट भर रहे हैं। कई ग्रामीण मछलियां पकड़ने के बाद उन्हें बेचकर चूल्हा जलाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के मुताबिक परिवार का पेट भरने के लिए कुछ तो करना ही पड़ेगा। प्रशासन के राहत का इंतजार करते रहे तो भूखे मर जाएंगे।