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बैंकों के कर्ज से परेशान किसान ने तालाब में छलांग लगाकर दी जान
Updated Mon, 12 Jun 2017 12:12 AM IST
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धनारी में कर्ज से तंग आकर किसान ने की आत्महत्या
मृतक कैंसर की बीमारी से पीड़ित
अमर उजाला ब्यूरो।
धनारी-बबराला(संभल)।
गरीबी व आर्थिक तंगी के बैंक के कर्ज से परेशान एक किसान ने रेलवे लाइन के पुल से तालाब में छलांग लगा दी। तालाब में पड़े एक पत्थर से सिर लगने के बाद उसकी मौके पर ही मौत हो गई। छलांग लगाने से पहले किसान अपने बेटे को फोन से घटना स्थल आकर बाइक व मोबाइल ले जाने को कहा था। बहरहाल परिजनों की सहमति के बाद पुलिस ने पंचनामा भर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मौत से परिजनों में कोहराम मचा है।
थाना क्षेत्र के गांव खलीलपुर का ओमपाल (55) पुत्र डोरी सिंह मुरादाबाद के बिलारी व बबराला की दो बैंकों से लिए लाखों रुपये के कर्ज में डूबा हुआ था। जिस पर गांव के साहूकारों का भी कर्ज था। आर्थिक तंगी से परेशान किसान तकरीबन पंद्रह वर्षों से कैंसर की बीमारी से ग्रसित था। जिसके चलते वह कमाने व कर्ज चुकाने में नाकाम था। दर्द भरी जिंदगी को उसने समाप्त करने में देर नहीं की और परिजनों को फोन से सूचना दी कि उदरनपुर अजमतनगर के तालाब में छलांग लगाकर आत्महत्या कर रहा हूं। बेटे से बाइक व मोबाइल ले जाने की बात कही और तालाब में छलांग लगा दी। बेटा सचिन वहां पहुंचता तब तक देर हो चुकी थी उसका सिर तालाब में पड़े एक पत्थर पर जा लगा जिससे उसकी मौत हो गई। सूचना पर पुलिस के साथ सैकड़ों की संख्या में भीड़ उपस्थित हुई। पुलिस ने शव को पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। किसान पर कितना के कर्ज था, यह नहीं बता पाए हैं।
भाकियू ने दी सांत्वना
बबराला-धनारी। किसान की आत्महत्या को लेकर भाकियू असली ने इसे मुद्दा बनाने का फैसला करते हुए कर्जमाफी के प्रदेश सरकार से मांग की। साथ ही मृतक किसान के परिजनों को सांत्वना दी।
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भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक असली के राष्ट्रीय प्रमुख साचिव ऋषिपाल सिंह यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार अपने वायदे के मुताबिक किसानों को कर्ज माफ समय से नहीं कर रही है। जिससे किसानों में मायूसी है और किसान आत्महत्या करने को मजबूर है। किसान ओमपाल के द्वारा कुंडे में कूदकर जान देना प्रदेश सरकार पर सवाल खड़े करता है। ज्ञानेन्द्र यादव, रामजीत यादव, जाकिर अली आदि उपस्थित रहे।
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मृतक कैंसर की बीमारी से पीड़ित
अमर उजाला ब्यूरो।
धनारी-बबराला(संभल)।
गरीबी व आर्थिक तंगी के बैंक के कर्ज से परेशान एक किसान ने रेलवे लाइन के पुल से तालाब में छलांग लगा दी। तालाब में पड़े एक पत्थर से सिर लगने के बाद उसकी मौके पर ही मौत हो गई। छलांग लगाने से पहले किसान अपने बेटे को फोन से घटना स्थल आकर बाइक व मोबाइल ले जाने को कहा था। बहरहाल परिजनों की सहमति के बाद पुलिस ने पंचनामा भर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मौत से परिजनों में कोहराम मचा है।
थाना क्षेत्र के गांव खलीलपुर का ओमपाल (55) पुत्र डोरी सिंह मुरादाबाद के बिलारी व बबराला की दो बैंकों से लिए लाखों रुपये के कर्ज में डूबा हुआ था। जिस पर गांव के साहूकारों का भी कर्ज था। आर्थिक तंगी से परेशान किसान तकरीबन पंद्रह वर्षों से कैंसर की बीमारी से ग्रसित था। जिसके चलते वह कमाने व कर्ज चुकाने में नाकाम था। दर्द भरी जिंदगी को उसने समाप्त करने में देर नहीं की और परिजनों को फोन से सूचना दी कि उदरनपुर अजमतनगर के तालाब में छलांग लगाकर आत्महत्या कर रहा हूं। बेटे से बाइक व मोबाइल ले जाने की बात कही और तालाब में छलांग लगा दी। बेटा सचिन वहां पहुंचता तब तक देर हो चुकी थी उसका सिर तालाब में पड़े एक पत्थर पर जा लगा जिससे उसकी मौत हो गई। सूचना पर पुलिस के साथ सैकड़ों की संख्या में भीड़ उपस्थित हुई। पुलिस ने शव को पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। किसान पर कितना के कर्ज था, यह नहीं बता पाए हैं।
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भाकियू ने दी सांत्वना
बबराला-धनारी। किसान की आत्महत्या को लेकर भाकियू असली ने इसे मुद्दा बनाने का फैसला करते हुए कर्जमाफी के प्रदेश सरकार से मांग की। साथ ही मृतक किसान के परिजनों को सांत्वना दी।
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भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक असली के राष्ट्रीय प्रमुख साचिव ऋषिपाल सिंह यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार अपने वायदे के मुताबिक किसानों को कर्ज माफ समय से नहीं कर रही है। जिससे किसानों में मायूसी है और किसान आत्महत्या करने को मजबूर है। किसान ओमपाल के द्वारा कुंडे में कूदकर जान देना प्रदेश सरकार पर सवाल खड़े करता है। ज्ञानेन्द्र यादव, रामजीत यादव, जाकिर अली आदि उपस्थित रहे।