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नाम रोशन करने के बाद भी खिलाड़ियों को सुविधाओं का टोटा
Updated Fri, 02 Nov 2018 03:32 AM IST
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मुरादाबाद। नवंबर माह में जिला से लेकर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता होने के कारण खिलाड़ी कड़ी मेहनत कर रहे हैं। गत प्रतियोगिताओं में राज्य स्तर और अंतर विश्वविद्यालय प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों ने शहर के साथ विभाग का नाम रोशन किया है। खिलाड़ियों में तो दम है लेकिन इसके बावजूद उन्हें सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। क्रीड़ा अधिकारी का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रस्ताव मांगा है।
सोनकपुर स्टेडियम में खिलाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। कालेजों के पास पर्याप्त मैदान न होने की वजह से खिलाड़ी स्टेडियम में ही अभ्यास करने के लिए आते हैं। उन्होंने यहां पर पंजीकरण भी कराया है। खेल विभाग की ओर से इसी सत्र में करीब एथलेटिक्स, जूडो, बॉक्सिंग, सैंबो, हैंडबाल, कबड्डी, खो-खो आदि में करीब 15 खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर और करीब सौ खिलाड़ी प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर विभाग व शहर का नाम रोशन कर चुके हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि विभाग की ओर से प्रतियोगिताओं में खेलने जाने पर टी-शर्ट दी जाती है। किट के तौर पर ट्रैक सूट, जूते, बल्ला, हॉकी, ग्लव्स आदि की सुविधा नहीं दी जाती है। प्रतिदिन दूरदराज से आने में होने वाले खर्चे के अलावा उन्हें अपने ही रुपयों से यह सामान खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इस संबंध में क्रीड़ा अधिकारी अनिमेष सक्सेना ने बताया कि खिलाड़ियों को परेशानी है। इसके लिए अधिकारियों से बात हुई थी। जिलाधिकारी और कमिश्नर ने भारोत्तोलन, जूडो, एथलेटिक्स, क्रिकेट, बॉक्सिंग आदि में खिलाड़ियों को उनका सामान देने के लिए करीब दो लाख रुपये का प्रस्ताव मांगा है। उम्मीद है कि दीपावली के बाद समस्या का समाधान हो जाएगा।
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सोनकपुर स्टेडियम में खिलाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। कालेजों के पास पर्याप्त मैदान न होने की वजह से खिलाड़ी स्टेडियम में ही अभ्यास करने के लिए आते हैं। उन्होंने यहां पर पंजीकरण भी कराया है। खेल विभाग की ओर से इसी सत्र में करीब एथलेटिक्स, जूडो, बॉक्सिंग, सैंबो, हैंडबाल, कबड्डी, खो-खो आदि में करीब 15 खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर और करीब सौ खिलाड़ी प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर विभाग व शहर का नाम रोशन कर चुके हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि विभाग की ओर से प्रतियोगिताओं में खेलने जाने पर टी-शर्ट दी जाती है। किट के तौर पर ट्रैक सूट, जूते, बल्ला, हॉकी, ग्लव्स आदि की सुविधा नहीं दी जाती है। प्रतिदिन दूरदराज से आने में होने वाले खर्चे के अलावा उन्हें अपने ही रुपयों से यह सामान खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इस संबंध में क्रीड़ा अधिकारी अनिमेष सक्सेना ने बताया कि खिलाड़ियों को परेशानी है। इसके लिए अधिकारियों से बात हुई थी। जिलाधिकारी और कमिश्नर ने भारोत्तोलन, जूडो, एथलेटिक्स, क्रिकेट, बॉक्सिंग आदि में खिलाड़ियों को उनका सामान देने के लिए करीब दो लाख रुपये का प्रस्ताव मांगा है। उम्मीद है कि दीपावली के बाद समस्या का समाधान हो जाएगा।
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