घर में शौचालय न होने से गई तीन मासूमों की जान

Moradabad  Bureauमुरादाबाद ब्यूरो Updated Thu, 27 Sep 2018 02:21 AM IST
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मुरादाबाद (जितेंद्र कुमार)।
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घर में शौचालय न बनवाने की कीमत मो. काले को अपने दो बेटों की जिंदगी गंवाकर चुकानी पड़ी। इनके साथ गए मो. जरीफ का बेटा भी सदा के लिए चला गया। काले की पत्नी परवीन की मानें तो उनके घर में शौचालय नहीं है। दोनों बेटे शौच का बहाना बनाकर तालाब के पास पहुंच गए। पति-पत्नी का कहना है कि उनके घर में शौचालय होता तो वह अपने बेटों को तालाब के पास नहीं जाने देते और उनके बच्चे जिंदा होते।
मो. काले रतनपुर कलां गांव में अनीस के मकान में परिवार के साथ रहता है। मो. काले कबाड़ की फेरी करता है और उसकी पत्नी परवीन मजदूरी। परवीन ने बताया कि राजकीय इंटर कालेज के पास सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन बन रहा है। जिसमें वह मजदूरी करती है। बुधवार सुबह आठ बजे वह मजदूरी करने गई थी, जबकि पति फेरी करने चला गया था। उसके बेटे भी उसके साथ गए थे। बच्चे मां के पास ही खेल रहे थे। इसी बीच उन्होंने तालाब में नहाने जाने की जिद की। लेकिन उसने अपने बच्चों को नहीं जाने दिया। इसके बाद वह शौच जाने को कहने लगे। मां ने बताया कि उसके घर में शौचालय नहीं है। जिस कारण सभी बच्चे घर जंगल में खुले में शौच हो जाते हैं। उसने बच्चों को जाने दिया। कुछ देर बाद उसके पास तीसरे नंबर का बेटा भागते हुए आया और उसने बताया कि इस्माइल और अरकान तालाब में डूब गए। उनके पास अलकमा भी डूब गया है। वह भागते हुए मौके पर पहुंची। पति-पत्नी का कहना है कि उनके घर में शौचालय होता तो वह बच्चों को कभी तालाब के पास नहीं जाने देते।
काले का न अपना मकान, न ही बना राशन कार्ड
मुरादाबाद। तालाब में डूबकर जान गंवाने वाले इस्माइल और अरकान के परिवार का अपना कोई मकान भी नहीं है। गांव के पास बने अनीस के मकान में नौ सदस्यों का ये परिवार रहता है। काले की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर होने के कारण मकान मालिक इससे किराया भी नहीं लेता है। मूलरूप से बदायूं निवासी काले की पत्नी बिहार से है। पिछले दस साल से काले इस गांव में रह रहा है। वह कबाड़ की फेरी करता है तो पत्नी मजदूरी करती है। परिवार में बेटी मुस्कान, इस्माइल, अरकान, इकरार, अलफिजा, गुलफिजा और अलतमस हैं। इस्माइल और अरकान की मौत हो चुकी है। आर्थिक रूप से बेहद कमजोर इस परिवार के पास अपना न तो मकान है और न ही गांव में कोई जमीन का टुकड़ा। इसके बावजूद सरकार की ओर से इस परिवार न तो आवास मिल पाया और न ही शौचालय। राशन कार्ड के लिए काले ने चक्कर लगाए। लेकिन राशन कार्ड नहीं बन पाया। काले और उसका परिवार का कहना है कि सरकार की ओर से उन्हें आज तक किसी तरह की कोई मदद नहीं मिली है।
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