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महंगाई की मार-रसोई तक हाहाकार
Updated Mon, 10 Sep 2018 02:12 AM IST
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मुरादाबाद।
महंगाई की मार अब बेकाबू हो चली है। पेट्रोल और डीजल के सहारे अब महंगाई की मार रसोई तक पहुंच गई है। तो वहीं मालवाहक वाहनों ने तीस फीसदी किराया बढ़ा दिया है। इससे आमजन को एक और झटका लगा है। गैस सिलेंडर और सब्जियों के दाम पहले से ही आसमान पर हैं। इससे लोगों की रसोई का महीने का खर्च सवा गुना तक बढ़ गया है। इसके साथ ही अब बाजार में खाद्य पदार्थों के दामों में भी उछाल आ जाएगा। बाजार पर महंगाई का असर आने में एक सप्ताह का समय लगेगा।
जिले में रसोई का ज्यादातर सामान दिल्ली से आता है। मसाले, घी, तेल, आटा, बेसन और दाल आदि की आपूर्ति दिल्ली-गाजियाबाद से होती है। वहां से ट्रक और टैंपो से इनको लाया जाता है। वाहन यूनियनों ने किराए में 30 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है। इसका असर सामान की ढुलाई पर पड़ेगा। बाजार में एक सप्ताह में इस महंगाई का असर आना शुरू हो जाएगा। ट्रक आपरेटर्स यूनियन के अध्यक्ष आरडी चतुर्वेदी ने बताया कि डीजल 54 रुपये से बढ़कर 72 का आंकड़ा पार कर गया है। आखिर कब तक माल ढुलाई को नहीं बढ़ाया जाएगा। अब पुराने रेट पर काम करना संभव नहीं है।
गैस सिलेंडर
गैस सिलेंडर के रेट एकाएक उछलकर बेकाबू हो चले हैं। दो महीने में सिलेंडर सौ रुपये महंगा हो गया है। घरेलू सिलेंडर अब 840 रुपये का मिल रहा है। इसका सीधा असर लोगों के रसोई के बजट पर पड़ रहा है। सामान्य वर्ग को महंगाई का अहसास होने लगा है। बाजार के जानकारों का मानना है कि पेट्रोलियम पदार्थों में जिस तरह रोजाना की बढ़ोतरी हो रही है, उससे सिलेंडर के दामों में और उछाल की आशंका बढ़ती जा रही है।
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सब्जी
बारिश और बाढ़ के चलते हरी सब्जियों की आवक पहले से ही कम है। बाजार में हरी सब्जियां 40 फीसदी कम आ रही हैं। ऐसे में सब्जियों के दाम काफी ज्यादा बढ़े हुए हैं। थोक बाजार में ही हरी सब्जियां पचास रुपये को छू रही हैं। रिटेल में लोगों को ज्यादातर सब्जियों 60 से 80 रुपये किलो खरीदनी पड़ रही हैं।
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महंगाई की मार अब बेकाबू हो चली है। पेट्रोल और डीजल के सहारे अब महंगाई की मार रसोई तक पहुंच गई है। तो वहीं मालवाहक वाहनों ने तीस फीसदी किराया बढ़ा दिया है। इससे आमजन को एक और झटका लगा है। गैस सिलेंडर और सब्जियों के दाम पहले से ही आसमान पर हैं। इससे लोगों की रसोई का महीने का खर्च सवा गुना तक बढ़ गया है। इसके साथ ही अब बाजार में खाद्य पदार्थों के दामों में भी उछाल आ जाएगा। बाजार पर महंगाई का असर आने में एक सप्ताह का समय लगेगा।
जिले में रसोई का ज्यादातर सामान दिल्ली से आता है। मसाले, घी, तेल, आटा, बेसन और दाल आदि की आपूर्ति दिल्ली-गाजियाबाद से होती है। वहां से ट्रक और टैंपो से इनको लाया जाता है। वाहन यूनियनों ने किराए में 30 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है। इसका असर सामान की ढुलाई पर पड़ेगा। बाजार में एक सप्ताह में इस महंगाई का असर आना शुरू हो जाएगा। ट्रक आपरेटर्स यूनियन के अध्यक्ष आरडी चतुर्वेदी ने बताया कि डीजल 54 रुपये से बढ़कर 72 का आंकड़ा पार कर गया है। आखिर कब तक माल ढुलाई को नहीं बढ़ाया जाएगा। अब पुराने रेट पर काम करना संभव नहीं है।
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गैस सिलेंडर
गैस सिलेंडर के रेट एकाएक उछलकर बेकाबू हो चले हैं। दो महीने में सिलेंडर सौ रुपये महंगा हो गया है। घरेलू सिलेंडर अब 840 रुपये का मिल रहा है। इसका सीधा असर लोगों के रसोई के बजट पर पड़ रहा है। सामान्य वर्ग को महंगाई का अहसास होने लगा है। बाजार के जानकारों का मानना है कि पेट्रोलियम पदार्थों में जिस तरह रोजाना की बढ़ोतरी हो रही है, उससे सिलेंडर के दामों में और उछाल की आशंका बढ़ती जा रही है।
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सब्जी
बारिश और बाढ़ के चलते हरी सब्जियों की आवक पहले से ही कम है। बाजार में हरी सब्जियां 40 फीसदी कम आ रही हैं। ऐसे में सब्जियों के दाम काफी ज्यादा बढ़े हुए हैं। थोक बाजार में ही हरी सब्जियां पचास रुपये को छू रही हैं। रिटेल में लोगों को ज्यादातर सब्जियों 60 से 80 रुपये किलो खरीदनी पड़ रही हैं।