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मोदी की कुर्सी की लगी बोली, सवा लाख तक पहुंची कीमत
नीरज शर्मा/आगरा
Updated Tue, 26 Nov 2013 01:41 AM IST
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भले रैलियों में उमड़ी भीड़ पर सियासी प्रतिदावे हुए लेकिन भाजपा के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच कितनी है, मोहब्बत की नगरी में एक कुर्सी इसका पैमाना बन गई है।
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आगरा के कोठी मीना बाजार मैदान में गत 21 नवंबर को हुई विजय शंखनाद रैली में नरेंद्र मोदी मंच पर रखी इसी कुर्सी पर कुछ देर के लिए बैठे थे। मोदी के शैदाई कार्यकर्ता इसे पाने के लिए बड़ी कीमत चुकाने को तैयार हैं। रैली के तुरंत बाद किसी एक के इच्छा जताने के बाद तो जैसे इसकी होड़ लग गई।
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सांसद और विधायक भी इसमें कूद पड़े। हाल यह कि सामान्य सी इस कुर्सी की कीमत अब तक सवा लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।
कार्यकर्ताओं का मानना है कि देश का भावी प्रधानमंत्री जिस कुर्सी पर बैठा हो, वह उनके घर हो तो उनके लिए सौभाग्य की बात होगी। दरअसल, एक कार्यकर्ता ने मंच की व्यवस्था करने वाले पार्टी के ही पार्षद और टेंट हाउस संचालक प्रमोद उपाध्याय को दो हजार में वह कुर्सी बेचने का प्रस्ताव दिया।
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बात फैली तो और भी प्रस्ताव आने लगे। बोली अब सवा लाख तक पहुंच चुकी है। विधायक योगेंद्र उपाध्याय ने 1.11 लाख रुपये कीमत लगा दी। सांसद राम शंकर कठेरिया 1.21 लाख देने को तैयार हुए तो विधायक जगन गर्ग ने 1.25 लाख का प्रस्ताव दे डाला।
वहीं अब प्रमोद उपाध्याय अड़ गए। उनका कहना है कि पार्टी के कई नेता फोन कर कुर्सी को खरीदने की पेशकश कर चुके हैं। लेकिन वह इसे किसी भी कीमत पर बेचने को तैयार नहीं हैं।
मोदी के जाते ही लगने लगी थी कुर्सी की बोली
मोदी के लौटते और रैली खत्म होते ही ‘हॉट केक’ बनी कुर्सी की बोली लगनी शुरू हो गई थी। भाजपा के एक कार्यकर्ता की चली होती तो शायद यह कुर्सी उसके घर होती। उसने टेंट मालिक प्रमोद उपाध्याय को भुलावे में डालने की कोशिश की।
बोला, ‘मेरे घर में कोई कुर्सी नहीं है। आप तो बदलते रहते हैं। कुछ कुर्सियां मुझे दे दीजिए।’ प्रमोद के इनकार पर उसने जब सिर्फ एक कुर्सी के लिए जिद की तो आसपास खड़े लोग उसके इरादे भांप गए। फिर तो वे भी बढ़-चढ़कर प्रस्ताव देने लगे। प्रमोद इनकार करते रहे लेकिन होड़ बढ़ती चली गई।