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कर्ज लेकर सब्जी बोई बहा ले गईं गंगा माई
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Wed, 31 Aug 2016 12:19 AM IST
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सब्जीमंडी गुलजार हुई।
- फोटो : अमर उजाला
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छानबे ब्लॉक के गंगा किनारे के गांवों के किसानों ने मानसून का रुख देखकर कर्ज लेकर सब्जी की खेती की थी। बाढ़ ने पूरी फसल बरबाद कर दी। इससेे किसान चिंतित हैं। बाढ़ की वजह से धान, अरहर, तिल, मूंग, उर्द बाजरा के अलावा सब्जी की खेती चौपट हुई है। किसान अब प्रशासन का मुंह देख रहे हैं। प्रशासन ने अभी बाढ़ से हुई सब्जियों की खेती की बर्बादी का आकलन भी नहीं शुरू किया है।
देवरी मुतलिके गौरा में वकील कुमार निषाद ने लगभग 30 बीघा जमीन वार्षिक किराये पर लेकर काफी लागत लगा कर सब्जी की खेती की थी जो बाढ़ के पानी की वजह से बर्बाद हो गई। बाढ़ का पानी उतरने के बाद वे मदद के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। ग्राम महडौरा, बिरोही, भटेवरा, गोड़सर, खम्हरिया कला, रैपुरी, जोपा, ऊंचडीह, सुपंथा आदि गंावों में फसलों के अलावा मिर्च और सब्जी की खेती पानी से बर्बाद हुई है। इसमें कितने ही किसानों ने कर्ज लेकर सब्जी की खेती की थी जिन्हें अब कर्ज उतारने की चिंता सता रही है। इस इलाके में उगने वाली सब्जियों को आसपास के बाजार में बेचा जाता था।
सब्जियों की आवक कम होने के कारण किसानों को खाने के लिए भी सब्जी मंहगे दामों पर खरीदनी पड़ रही है। बाढ़ से बर्बाद हुए किसान अब प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं के यहां दौड़ लगा रहे हैं कि उन्हें मुआवजे की रकम मिल जाय ताकि कर्ज को उतारने में कुछ मदद मिल सके। वहीं अभी प्रशासन की ओर से बाढ़ से बर्बादी का आकलन ही शुरू नहीं हुआ है। प्रशासन ने बाढ़ में गिरे घरों का ही मुआवजा दिया है।
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देवरी मुतलिके गौरा में वकील कुमार निषाद ने लगभग 30 बीघा जमीन वार्षिक किराये पर लेकर काफी लागत लगा कर सब्जी की खेती की थी जो बाढ़ के पानी की वजह से बर्बाद हो गई। बाढ़ का पानी उतरने के बाद वे मदद के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। ग्राम महडौरा, बिरोही, भटेवरा, गोड़सर, खम्हरिया कला, रैपुरी, जोपा, ऊंचडीह, सुपंथा आदि गंावों में फसलों के अलावा मिर्च और सब्जी की खेती पानी से बर्बाद हुई है। इसमें कितने ही किसानों ने कर्ज लेकर सब्जी की खेती की थी जिन्हें अब कर्ज उतारने की चिंता सता रही है। इस इलाके में उगने वाली सब्जियों को आसपास के बाजार में बेचा जाता था।
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सब्जियों की आवक कम होने के कारण किसानों को खाने के लिए भी सब्जी मंहगे दामों पर खरीदनी पड़ रही है। बाढ़ से बर्बाद हुए किसान अब प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं के यहां दौड़ लगा रहे हैं कि उन्हें मुआवजे की रकम मिल जाय ताकि कर्ज को उतारने में कुछ मदद मिल सके। वहीं अभी प्रशासन की ओर से बाढ़ से बर्बादी का आकलन ही शुरू नहीं हुआ है। प्रशासन ने बाढ़ में गिरे घरों का ही मुआवजा दिया है।
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