फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mirzapur News ›   Vaswara society had camped Vindhyachal

मंत्र से ज्यादा भाव से करते हैं आराधना

Sun, 10 Apr 2016 12:19 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, मिर्जापुर
ब्यूरो/ अमर उजाला, मिर्जापुर Updated Sun, 10 Apr 2016 12:19 AM IST
विज्ञापन
Vaswara society had camped Vindhyachal
मां विंध्यवासिनी
विंध्याचल में भाव और भक्ति की पराकाष्ठा देखनी हो तो चैत्र नवरात्र में तृतीया से पंचमी तक आने वाले वैसवारा समाज की भक्ति देखी जा सकती है। वैसवारा समुदाय की पूजन पद्धति भाव पर आधारित होती है। इसमें परिवार के सभी सदस्य नया सफेद वस्त्र धारण कर मां विंध्यवासिनी का दर्शन करते हैं। ये मंत्र से ज्यादा भाव से आराधना करते हैं।
विज्ञापन


वैसवारा समाज के भक्तों के गले में एक कपड़े की पंखे जैसी माला होती है, जिसे यह रास्ते भर डोलाते चलते हैं, जिसे हंकनी कहते हैं। मां के चंवर डोलाने की भाव से यह जुड़ी है। साथ ही ये आटे से बने दीपक का ही इस्तेमाल करते हैं। गाजे-बाजे के साथ मां की पूजा आराधना भाव विभोर होकर करते हैं। देखने वालों को भी भक्ति रस में सराबोर कर देते हैं।
विज्ञापन


विंध्याचल के तीर्थ पुरोहित प्रेमशंकर मिश्र ने बताया कि उन्नाव, रायबरेली, लखनऊ, बुंदेलखंड, कानपुर देहात से वैसवारे समाज के लोग मां का दर्शन पूजन करने आते हैं। नवरात्र की पंचमी को दर्शन-पूजन करके चले जाते हैं। समूह में आने वाले वैसवारा समाज के लोग तमाम प्रकार के वाद्य यंत्र लेकर ढोल मंजीरा लेकर नाचते-गाते आते हैं। सफेद वस्त्र धारण करके आते हैं। अन्नदान करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


मां विंध्यवासिनी के दरबार में वैसवारा समाज प्राचीन काल से आता रहा है। कहा जाता है कि 1200 ई. के आसपास वैसवारों में मध्यप्रदेश्‍ा के छतरपुर का मां का एक अनन्य भक्त भानु भगत हुआ करता था। उसे मां के साक्षात दर्शन होेते थे। एक बार भानु भगत ने मां से कहा कि आप उसके निवास पर ही चलिए, ताकि उसे यहां न आना पड़े।


मां ने कहा कि यदि तुम मेरे विग्रह को ले जाना ही चाहते हो तो रास्ते में उसे कहीं मत रखना। मां के ऐसा कहने पर भानु भगत ने मां के शर्त को स्वीकार कर लिया और मां के विग्रह को भक्त मंडली के साथ ले जाने लगा। जब भानु भगत प्रयाग की धरती पर पहुंचा तो थक जाने के बाद विग्रह को वहीं रख दिया। शर्त के अनुसार ऐसा करने पर मां वहां से अलोप हो गईं और विंध्याचल में आकर विराजमान हो गईं। प्रयाग में जहां से मां अलोप हुईं वहीं मां अलोपी हैं, जहां मां की पूजा बिना विग्रह के होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed