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अधर्म बढ़ने पर भक्तों के कल्याण के लिए अवतार लेते हैं भगवान : देवनायकाचार्य
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बजहां गांव स्थित स्वामी श्री रामानुजाचार्य आश्रम में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन मंगलवार को श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। पीठाधीश्वर ब्रह्मर्षि ब्रह्मचारी श्री देवनायकाचार्य जी महाराज ने बैकुंठ धाम और भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य अवतार का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि जब-जब धरती पर धर्म की हानि और अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान भक्तों के कल्याण के लिए अवतार लेते हैं। अत्याचार से त्रस्त पृथ्वी की पुकार पर भगवान विष्णु ने मथुरा के कारागार में देवकी-वसुदेव के यहां श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया।
वसुदेव द्वारा बाल कृष्ण को टोकरी में रखकर यमुना पार गोकुल ले जाने का प्रसंग सुनते ही पंडाल ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से गूंज उठा। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम, करुणा, धर्म और सत्य का संदेश देता है। भागवत कथा को केवल सुनना नहीं, बल्कि उसके संदेश को जीवन में उतारना ही सार्थक है।
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उन्होंने कहा कि जब-जब धरती पर धर्म की हानि और अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान भक्तों के कल्याण के लिए अवतार लेते हैं। अत्याचार से त्रस्त पृथ्वी की पुकार पर भगवान विष्णु ने मथुरा के कारागार में देवकी-वसुदेव के यहां श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया।
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वसुदेव द्वारा बाल कृष्ण को टोकरी में रखकर यमुना पार गोकुल ले जाने का प्रसंग सुनते ही पंडाल ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से गूंज उठा। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम, करुणा, धर्म और सत्य का संदेश देता है। भागवत कथा को केवल सुनना नहीं, बल्कि उसके संदेश को जीवन में उतारना ही सार्थक है।
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