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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mirzapur News ›   UP News 6000 heart patients admitted six years not single test Echo machine CCU built 2019

UP News : छह साल में 6000 हृदय रोगी भर्ती, ईको मशीन से एक भी जांच नहीं; 2019 में डेढ़ करोड़ से बनाई गई थी CCU

Sun, 24 Nov 2024 10:27 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर।
अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 24 Nov 2024 10:27 AM IST
सार

Mirzapur News : यह हाल मिर्जापुर के मेडिकल काॅलेज के अधीन मंडलीय अस्पताल का है। मजे की बात यह है कि इसका शुभारंभ केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने 19 जनवरी 2019 को इसका शुभारंभ किया था। बावजूद इसके हृदय रोगियों को दूसरे जिलों में इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा।

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UP News 6000 heart patients admitted six years not single test Echo machine CCU built 2019
मिर्जापुर के मंडलीय अस्पताल के सीसीयू में रखी ईको मशीन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेडिकल काॅलेज के अधीन मंडलीय अस्पताल में छह साल पहले पूर्वांचल का पहला अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर यूनिट बताकर इसका उद्घाटन किया गया था। इस बीच छह साल के दौरान छह हजार से ज्यादा मरीज भर्ती हुए, परंतु सीसीयू में रखी ईको मशीन से एक भी हृदय रोगी की जांच नहीं हो सकी है। 

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इससे जांच पर मरीज का हृदय कितना स्वस्थ है, इसका पता चलता है। सीसीयू में चादर से ढककर ईको मशीन रखी हुई है। जहां चूहों ने ठिकाना बना लिया है।

दिल की धड़कन से पता चलता है कि इंसान कितना स्वस्थ है और उसका हृदय कितना बेहतर तरीके से काम कर रहा है। पिछले दिनों कई ऐसी घटनाएं देखने को मिलीं, जिनमें किसी की नाचते-नाचते मौत हो गई तो कुच की चलते-चलते गिरकर हृदय घात से मौत हो गई। 
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ठंड में हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है। मंडलीय अस्पताल परिसर में हृदय रोगियों के बेहतर इलाज  के लिए पूर्वांचल का पहला अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) की स्थापना की गई थी।

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केंद्रीय राज्यमंत्री ने किया था शुभारंभ
केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने 19 जनवरी 2019 को इसका शुभारंभ किया था। उस दौरान बताया गया था कि डेढ़ करोड़ की लागत से बना यह पहला कार्डियक केयर यूनिट पूर्वांचल का पहला यूनिट है। अब हृदय रोगियों को दूसरे जिलों में इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा। हृदय रोगियों की जांच के लिए अत्याधुनिक मशीनें भी लगाई गई थीं। शुरुआती दौर में तो कोई मशीन नहीं चली। 

हालांकि मेडिकल काॅलेज के अधीन होने पर डिस्पले माॅनिटर आदि कुछ मशीनें चलीं, परंतु हृदय रोग के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण ईको मशीन से एक भी जांच नहीं हो सकी। इसका मुख्य कारण अब तक विशेषज्ञ डाॅक्टर काॅर्डियोलाॅजिस्ट की तैनाती नहीं बताया जा रहा है। हालांकि उपकरणों को चलाने के लिए विशेषज्ञ टेक्नीशियन की भी तैनाती नहीं हो सकी है। 

आठ बेड के सीसीयू हमेशा फुल रहता है। छह साल में छह हजार से ज्यादा मरीज भर्ती हो चुके हैं, परंतु एक भी मरीज की ईको मशीन से अब तक जांच नहीं हो सकी है। अब स्थिति यह है कि बंद कमरे में पड़ी ईको मशीन चादर से ढक दी गई। यहां चूहों ने ठेरा डाल लिया है। कमरे में पड़ी कीमती मशीन खराब हो रही है।

टीएमटी का भी संचालन नहीं
सीसीयू में ईको मशीन के अलावा टीएमटी का भी संचालन नहीं हो रहा है। टीएमटी हृदय के स्वास्थ्य के मूल्यांकन का उपकरण है। इससे डाॅक्टर मरीज के दिल की लय और सांस की लगातार निगरानी करते हैं। 

बोले अधिकारी
ईको मशीन का संचालन काॅर्डियोलाॅजिस्ट करते हैं। काॅर्डियोलाॅजिस्ट की तैनाती नहीं होने के कारण ईको मशीन नहीं चल रही है। - डाॅ. एसके श्रीवास्तव, सीएमएस, मंडलीय अस्पताल

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